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Saturday, 28 November 2020

मुझे आज जागना है

*नव कल्प*

आज मुझे खुद को बोध से भरना है
आज मुझे स्वयं के प्रति जागना है
अपनी देह के मौन संवाद समझने हैं 
अपने मन की घाटी में गूंजते नाद सुनने हैं
अपनी आत्मा की पुकार सुननी है
आज मुझे वो करना है जो मुझे करना है
मुझे आज वो नहीं करना, जो नहीं करना है
आज के दिन मेरा हर कदम जागृत हो
अपनी धड़कनों के प्रति जागूँ
श्वास को आज ज़्यादा गहराई से समझूं
आज स्वाद में ज़्यादा ज़ायका ले पाऊँ
आज स्पर्श को ज़्यादा जज़्ब करूँ
आज गंध को अधिक महसूस करूँ 
आज रंगों को उनकी पूरी छटा में देखूँ
आज अपनी अनुभूतियों के बंधन खोल दूं 
आज अपने वजूद के कण कण से, 
रोम रोम से, कोने कोने से जागूँ
बस जाग ही जाऊं !!!

@मन्यु आत्रेय

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