Morning Bliss with Manyu Aatreya
Sunday, 14 December 2025
मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा
Tuesday, 3 December 2024
लोगों को उनके हाल पर छोड़ दो !!
Monday, 2 December 2024
आपका कांधा कौन इस्तेमाल कर रहा है?
@मन्यु आत्रेय
धूर्त लोग हमेशा अपने महत्वपूर्ण और संवेदनशील काम करवाने के लिये किसी ऐसे आदमी का कांधा तलाश करते हैं जिस पर रखकर अपनी बंदूक चलवाई जाये, ताकि उसके पीछे वे स्वयं छुपे रहें। कई साल पहले क़यामत से क़यामत तक फ़िल्म देखने के लिये अपने एक कजिन के उकसावे पर मैने पिताजी से पैसे मांगे और डांट खाई। मेरा कज़िन चेहरे पर मासूमियत लिये खड़ा रहा, उल्टे मुझे पढ़ाई लिखाई के नाम पर कड़वे उपदेश सुनने पड़े।
नई दिल्ली में एनसीसी के रिपब्लिक डे कैंप के दौरान मेरे एक साथी ने मुझसे मेरी हैंड रायटिंग में एक खूबसूरत लव लेटर लिखवाया था और मैने दोस्ती यारी में लिख भी दिया। कैंप ख़त्म होने के बाद हमारी एक बैचमेट ने वो ही लेटर मुझे वापस देकर कहा था कि यदि वो ये लेटर कैंप एड्जुटेंट को दे देती तो मुझे कैंप से निकाल दिया जाता। वो जानती थी कि लेटर भले ही मेरे साथी ने दिया था लेकिन वो हैंड रायटिंग मेरी थी।
कुछ साल पहले मेरे एक सहकर्मी के शिकायत करने पर मैं उसकी टीम के कर्मचारियों को लेक्चर पिला देता था कि उन्हें कैसे अच्छे से काम करना चाहिए। ज़ाहिर सी बात है इसमें मेरे सहकर्मी का तो कुछ नहीं बिगड़ता था उल्टे मेरी ही छवि खराब हो जाती थी। हमारे एक बॉस जिनकी गुड बुक में मैं था, उनसे कोई अनुमति लेने के लिये मेरी टीम के लोग मुझे ही इस्तेमाल करते थे और इसके लिये मुझे चने के झाड़ पर चढ़ाया जाता था।
जब हमें लगता है कि हमारे प्रयास से कोई काम नही होगा, या हम खुद सामने नहीं आना चाहते तो किसी और की मदद लेते हैं। यह स्वाभाविक है, लेकिन जब लोग अपने असली मंतव्य को छुपा कर हमें भ्रमित करके अपने मकसद में इस्तेमाल करते हैं तो वह उनके लिए फायदेमंद भले हो, अक्सर हमारे लिए नुकसानदेह होता है।
लोग दूसरों के काँधे से बंदूक कैसे चलाते हैं?
एक व्यक्ति आपके पास आता है। अपने प्रयोजन की पृष्ठभूमि आपके सामने तैयार करता है। वह अपने विचार को आपके दिमाग मे भरता है। आपको समझाता है कि कैसे यह करना आपके लिए अच्छा होगा। वो आपको प्रेरित करता है, आपको कुछ संभावित तरीके सुझाता है, आपकी सहायता करता है और आपके प्रयासों के लिए आपकी सराहना करके आपमे हवा भरता है। जब आप उसके सुझाये अनुसार करते है, तो वो बिल्कुल तटस्थ बना रहता है, ऐसे दिखाता है जैसे इससे उसका कुछ भी लेना देना नहीं है।
आपको कमज़ोर पड़ता देख या राह से भटकते देख वो आपको फिर प्रेरित करता है ताकि आप उसी लाइन पर ही बने रहें। सफल हो जाने पर उसका स्वार्थ सध जाता है। वह सिर्फ लाभ, यश, और अच्छे में भागीदार बनता है, हानि बदनामी और बुराई में वो सीधा कन्नी काट लेता है। उल्टा आप मे अपराध बोध भरने का प्रयास करता है कि आपने गलत किया, आपके चक्कर मे वो स्वयं फंस गया है।
आपका कांधा क्यों चुना जाता है?
आपका कांधा इसलिये चुना जाता है क्योंकि वे लोग उस प्रयास या काम के परिणामों को स्वयं नहीं झेलना चाहते, यानी उन्हें ये लगता है कि यदि कुछ ग़लत हो गया तो उसका परिणाम नहीं भोगना है, इसलिये वे आपको बलि का बकरा बनाना चाहते हैं। या उन्हें लगता है कि आपके पास उस काम को करवाने की क्षमता, पहुंच, साधन-संसाधन हैं। या वो आपको भरोसा करने वाला और बेवकूफ़ सा मानते हैं। हो सकता है वो आपको कहीं फंसाना चाहता हो। हर एक के अपने कारण हो सकते हैं। अधिकांश बार केवल भावी परिणाम से खुद को बचाने के लिये लोग आपके कांधे पर रखकर बंदूक चलाते हैं।
जेठानी देवरानी का इस्तेमाल करके सास को दस बात सुना देती है। सास अपने बेटे के माध्यम से अपनी बहू को प्रताड़ित करती है। सहकर्मी अपने बॉस के किसी खास कर्मचारी के माध्यम से किसी बात की अनुमति पाने की कोशिश करते हैं। भाई बहनों में जो पापा के करीब होता है उसके माध्यम से कोई छूट मांगी जाती है। ये छोटी मोटी बातें हैं जिनका कोई बड़ा नुक़सान नहीं होता। परंतु आपसी लड़ाई करवाने कुछ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। राजनेता मौक़ा तलाशते रहते हैं कि किसी का कांधा मिले तो अपनी राजनीतिक बंदूक चलाई जाये।
कैसे पहचानें कि कोई आपके कांधे से बंदूक चला रहा है?
- जब कोई व्यक्ति किसी काम को करने के लिये आपको प्रेरित करता है, जो वो भी कर सकता था, तो सोचिये कि इसके पीछे इसका उद्देश्य क्या है और इसका संभावित परिणाम क्या हो सकता है?
- जब कोई तभी आपसे संपर्क करे जब उसे आपसे कुछ चाहिये, अन्यथा वो आपके संपर्क में रहने या आपके जीवन में रूचि नहीं दिखाता। स्वार्थी आदमी हमेशा इस्तेमाल करना चाहता है।
- कोई व्यक्ति आपकी भावनाओं, ज़रूरतों, प्राथमिकताओं को किनारे करने के लिये आपको प्रेरित कर रहा हो और किसी दूसरी दिशा में ले जा रहा हो तो समझो वो आपका कांधा तैयार कर रहा है।
- आवश्यकता से अधिक प्रशंसा या चापलूसी करना ऐसे लोगों की रणनीति होती है, जैसे जिसे आपसे पैसे चाहिये वो आपकी उदारता की प्रशंसा करेगा कि आप कैसे सभी की मदद करते हैं।
- कोई आप पर ही पूरा दायित्व डाल रहा है, आपको दोषी या बाध्य महसूस करवा रहा है और इससे मुक्ति सिर्फ़ तभी हो सकती है जब आप उसके अनुसार काम करें तो समझिये कि वो आपका इस्तेमाल करना चाहता है।
- जब भी कोई व्यक्ति आपको बदले में कुछ भी न दे या फिर बहुत कम दे तो समझिये कि वो आप का इस्तेमाल कर रहा था। यह बदला कुछ भी हो सकता है।
- किसी से बात करने के बाद आपकी ऊर्जा बहुत कम हो जाती है, आप विवश, नाराज़ या निराश महसूस करते हैं, तो समझिये कि आपका कांधा तैयार किया जा रहा था।
- जो व्यक्ति किसी काम के पीछे के उद्देश्यों पर खुलकर बात नहीं कर रहा है, उसके भावी नकारात्मक प्रभावों को छिपाना चाहता है या बहुत हल्के में दर्शा रहा है।
- जो आपको असावधानी या लापरवाही में रखना चाह रहा है, बहुत ही साधारण बात बनाकर पेश कर रहा है, तो हो सकता है कि वो आपका इस्तेमाल करना चाहता है।
- जो हमेशा अपनी प्राथमिकताओं पर काम करे और आपको स्वयं की प्राथमिकताओं की बजाय उसकी प्राथमिकताओं की तरफ़ ले जाये तो वो आपका इस्तेमाल करना चाहता है।
कैसे बचें ऐसे लोगों से?
- जो आपके बहुत खा़स हैं, बेहद क़रीबी हैं, जो आपके लिये बहुत कुछ करते हैं, उनके लिये कुछ भी करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन सिर्फ़ एकतरफ़ा इस्तेमाल करने वालों से सतर्क रहना सीखना जरूरी है।
- जो भी कोई काम बताये उसके मक़सद, तरीक़े, लाभ हानि के बारे में अच्छे से विचार कीजिये और अगर इस बात का कोई ठोस कारण नहीं दिखता कि वो स्वयं इसे क्यों नहीं कर रहा है, आप भी मत कीजिये।
- अपनी छठी इंद्री पर भरोसा कीजिये, आपकी अंतरात्मा आपको ऐसे लोगों के प्रति चौकस करती है, आपको कहीं न कहीं अंदर से महसूस होता है कि कुछ तो गड़बड़ है।
- जो भी आपके भीतर अपराध बोध भरकर कोई खा़स काम आपसे करवाना चाहता है तो उससे सतर्क हो जाईये।
- जो भी उस काम के भावी परिणामों से स्वयं को अलग थलग रखने की कोशिश में हो, या उस काम के प्रति एकदम अनजान या अबोध बनने की कोशिश कर रहा हो, वो आपको आगे करके खुद बचना चाहता है।
- लोगों की सीमा तय कीजिये। लोगों के काम करवाने की अपनी सीमा भी पहचानिये।
लोगों से उपयुक्त व्यवहार कैसे करें?
@मन्यु आत्रेय
आपने अक्सर वो वाक्य पढ़ा होगा-‘‘जो व्यवहार तुम स्वयं के साथ नहीं चाहते वैसा व्यवहार दूसरों के साथ मत करो।’’ ये वाक्य किसी हद तक सही है, लेकिन कई बार हमारे अच्छा व्यवहार करने के बावजूद कुछ लोग हमसे बदतमीज़ी या असभ्यता से पेश आते हैं, हमारे हानिरहित होने के बावजूद हमें नुक़सान पहुंचाते हैं। हमसे झूठ बोलते हैं, हमसे छल करते हैं, हमारे रास्ते में रोड़े अटकाते हैं, हमें संकटों में फंसाकर आगे बढ़ने रोकते हैं।
कहा जाता है कि सांप को कितना ही दूध पिला लो, उसका ज़हर अमृत नहीं बन जायेगा। धूर्त, लालची, अहंकारी, प्रतिशोध की भावना से भरे हुए व्यक्ति के साथ कितना भी अच्छा व्यवहार कर लो, वो आपको हानि पहुंचाने का अवसर शायद ही छोड़ेगा, इसलिये ऐसे लोगों के साथ बहुत ही सावधानी से व्यवहार करना चाहिये।
हमारी सुरक्षा, सुविधा, सम्मान और सफलता बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि हम किसके साथ कैसा व्यवहार करते हैं। ये जितना सामने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है उससे कहीं ज़्यादा हम पर निर्भर करता है। हममें लोक व्यवहार की जितनी ज़्यादा समझ होगी, हम दूसरों से उतना उपयुक्त व्यवहार कर पायेंगे। सामने वाले व्यक्ति के स्वभाव, स्थिति परिस्थिति, प्रभाव, गतिविधियों, अपने प्रति व्यवहार, और उद्देश्य को ध्यान में रखकर उससे व्यवहार करने में समझदारी है लेकिन यह समझना बहुत ही जटिल है कि किसके साथ कैसा व्यवहार करना उचित होगा क्योंकि यह भी सामने वाले व्यक्ति पर ही निर्भर होता है जैसे क्रोधी के क्रोध को आपका शांत व्यवहार ठंडा भी कर सकता है और भड़का भी सकता है।
किस माथे पर कैसा चन्दन लगायें ?
- समझदार, सकारात्मक संवेदनशील, सहानुभूति रखने और परवाह करने वाले लोगों के साथ ईमानदारी, सकारात्मकता और सम्मान से व्यवहार करना चाहिये, कृतज्ञता दिखानी चाहिये
- ज्ञानी, लोक व्यवहार में निपुण, तीव्र बुद्धि के लोगों से मार्गदर्शन लेकर उनकी प्रशंसा करनी चाहिये। उनसे संघर्ष के समाधान का कौशल सीखना चाहिये।
- आपमें उत्साह जगाने वाले, प्रेरणा देने वाले, आपकी रचनात्मकता जगाने वाले लोगों के अच्छे विचारों को ग्रहण करना, उत्साह दिखाना, उनसे रचनात्मकता को ग्रहण करना चाहिये।
- अंहकारी, आत्मकेंद्रित और सहानुभूति रहित लोगों की सीमायें तय करनी चाहिये। तटस्थ और थोड़ा सा औपचारिक व्यवहार रखें। ऐसा व्यवहार न करें कि उनका अहंकार और बढ़ जाये, इससे आपका ही नुक़सान होगा।
- स्वार्थी, धूर्त, दूसरों का शोषण करने वाले लोगों से सतर्क रहें। उनसे एक स्वस्थ दूरी बनाये रखें। अपनी गोपनीय बातें, अपने स्वप्न, योजनायें साझा नहीं करें। अपनी भावनात्मक कमज़ोरी कभी भी उन पर ज़ाहिर नहीं करें।
- आलोचना करने, दोष निकालने वाले, जजमेंटल और नकारात्मक लोगों के व्यवहार पर शांत रहें, स्पष्ट संचार करें, उनसे मार्गदर्शन मांगने की शैली में उनकी बातों का स्पष्टीकरण मांगें जिसमें कई बार वे विफल होंगे और उनका मक़सद समझ आ जायेगा कि ये हमारा मनोबल तोड़ना चाहता है।
- भावनात्मक रूप से अस्त व्यस्त, क्रोधी, पीठ पीछे प्रतिरोध करने वाले और नुक़सान पहुंचाने वाले लोगों से सीधे कट टू कट और मुद्दों पर बात करनी चाहिये। आमने सामने बात करनी चाहिये। उनसे अपेक्षा नहीं रखें, खुलकर संवाद करें।
- अपनी भावनाओं से जो स्वयं ही अनजान हैं, जो दूसरों पर उनके प्रभावों को नहीं जानते, जिनके अंदर अचानक भावनाओं का विस्फोट होता है और अचानक भयानक कोई भी निर्णय ले लेते हैं, उनसे समानांतर दूरी बना कर रखें। अगर उनकी भावनाओं को लेकर उन्हें जागरूक कर सकते हैं तो अप्रत्यक्ष रूप से कीजिये। यदि नहीं कर सकते तो जितना आपका वास्ता है उसी के अनुसार उनसे तटस्थ और संयत व्यवहार रखिये। ऐसे लोग बर्र के छत्ते की तरह होते हैं ये न भूलिये।
- जो आपको मार्गदर्शन करते हैं, नेतृत्व करते हैं, रास्ता दिखाते हैं उनका सम्मान करें, उनसे सीखें, नपी तुली प्रतिक्रिया दें और उनके एवं अपने साझा लक्ष्यों पर ध्यान बनाये रखें। उनके मार्गदर्शन में आपको अपने लक्ष्यों की ओर जाना है न कि उनके उद्देश्यों की पूर्ति का साधन बनना है।
- जो आपका अनुसरण करते हैं, आपके सहयोगी हैं, आपके दिशा निर्देशों का पालन करते हैं, उन्हें यथासंभव स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करें, सहायता दें, उनकी राय, अभिमत और विचारों की उपयुक्तता का सम्मान करें।
- चुनौती देने वाले, ख़तरा मोल लेने वाले, अधिकारों और परंपराओं से विद्रोह करने वाले लोगों के दृष्टिकोणों को देखें समझें, खुली चर्चा करें, आप क्या सोचते हैं, दोनों में समानता और असमानता को समझिये और अपना पक्ष संभालकर रखिये।
- जो लोग तटस्थ, निष्पक्ष दिखते हैं, उनकी तटस्थता का सम्मान कीजिये, उनसे भी मार्गदर्शन ले सकते हैं, वे संघर्ष का समाधान कैसे निकालते हैं इसे समझिये।
- कुछ लोग मिस्टर परफेक्शनिस्ट होते हैं, उन्हें हर बात एकदम परफेक्ट चाहिये होती है, आपसे जितना बनता है उतना कीजिये। जिस प्रकार वे बारीक विवरण पर ध्यान देते हैं उसकी सराहना कीजिये, उनसे काफी कुछ सीखने को है ये बताईये और संतुलित प्रतिक्रिया दीजिये। उनके जैसा जुनून हर किसी में नहीं हो सकता।
- कामों को टालने वाले, दूसरों पर थोपने का प्रयास करने वाले, बहानासाईटिस वाले लोगों पर अपनी निर्भरता कम कर लीजिये, उनके कामों को पूरा करने में उनकी मदद कर सकते हैं, परंतु उनके काम खुद पर लदने की परिस्थिति दिखे तो तुरंत सतर्क हो जाईये।
वैसे ये कुछ ही प्रकार के लोग हैं, इनके अलावा और भी प्रकार के लोग आपको मिल सकते हैं उनसे व्यवहार के और भी तरीक़े हो सकते हैं। यह अपने जीवन अनुभव से आप सीख सकते हैं कि किस प्रकार के व्यक्ति से आप कैसा व्यवहार कर पाते हैं और स्वयं की सुरक्षा, सुविधा, सम्मान और सफलता सुनिश्चित कर पाते हैं।
लोक व्यवहार की सप्तपदी
- जिसे जितना बताना हो उससे ज़्यादा कभी मत बताईये।
- अपनी गोपनीय बातें साझा मत कीजिये।
- अनावश्यक अपमान मत कीजिये। अनावश्यक चुनौती मत दीजिये।
- आंख मूंद कर किसी पर भरोसा मत कीजिये,लोगों की मेंटल स्कैनिंग सुरक्षा के लिये आवश्यक है।
- ग़लत आदमी का भरोसेमंद बनने, साथ देने के प्रयास कभी मत कीजिये।
- अच्छे लोगों के साथ सज्जनता, विश्वसनीयता और तटस्थता रखिये।
- किसी से भी सिर्फ उतनी ही निकटता बढ़ाओ जितना नुक़सान सहने की क्षमता हो।
Friday, 29 November 2024
मेरी अधूरी प्रेम कहानी
@ मन्यु आत्रेय
एक उम्र में आंखों में हसरत थी,
ज़िंदगी की राहों में आखें बिछाये बैठा था कि कोई तो हो जिसे आखों में बसा सकूं।
आंखें थकने लगी थी कि तभी किसी से आंखें चार हो गई और वो आंखों में उतर गई।
आंखों की भाषा आखें पढ़ने लगी। दिन रात आंखों ही आंखों में कटने लगे।
लेकिन पता नहीं था कि कोई हम पर आंखें गड़ाये बैठा है। मैं किसी की आंखों का कांटा बन गया हूॅं।
प्रेम में आंखों पर ऐसा परदा पड़ गया था कि समझ ही नहीं आया कि वो धीरे धीरे आंखें फेरती जा रही थी।
अब वो मुझसे आंखें चुराने लगी थी।
वो खुद किसी और की आंखों में गड़ गई थी, उसकी आंखें फिर किसी और से चार हो गई थी।
बड़ी होशियारी से वो मेरी आंखों में धूल झोंक रही थी।
उसकी आंखों का तो पानी ही मर गया था लेकिन मैं प्रेम में आंखों का अंधा बना रहा।
मैं जो उसकी आंखो का तारा था, कब उसकी आंख की किरकिरी बन गया समझ ही नहीं आया।
जिसे मैंने आंखों पर बिठाया था वो बात बात पर मुझे आंखें दिखाने लगी थी,
छोटी सी चूक पर भी आखें लाल पीली करके देखती थी।
उसे देखने के इंतज़ार में आंखें थकने लगी थी।
आंखों में तेल डालकर मैं उसकी प्रतीक्षा करता रहा।
उसकी आंखों में चर्बी छा चुकी थी, अब वो कहीं और आंखें सेंक रही थी।
मैं फिर भी खुश था कि कम से कम उसकी आंखें तो ठंडी हो रही हैं।
मेरी वफ़ा और उसकी जफ़ा में आंख मिचोली चल रही थी।
आखि़रकार उसने मुझे आंख में पड़े तिनके सा अपने जीवन से निकाल दिया।
मेरी आंखें रह रह कर भर आती।
आखें मूँद लेने का ख़्याल मन में आ जाता, कभी लगता कि आंखें बंद ही हो जातीं।
मेरी ग़लती सिर्फ़ यही थी कि उस पर आंखें मूंद कर भरोसा किया,
उसे आंखों की पुतली बनाये रखा, उस पर आंखें नहीं रखी।
मगर इस धोखे के बाद मेरी आंखें खुल गई और मेरी आंखें पत्थर हो गई
मैंने ठान लिया था अब इन आंखों में कोई नहीं बसेगा।
मगर कुछ दिनों बाद जब आँखों का पानी जम गया
किसी और से मेरी आँखे चार हो गई.
Thursday, 28 November 2024
दख़लंदाज़ी या हस्तक्षेप कैसे पहचानें?
हस्तक्षेप और दख़लंदाज़ी से जुड़ी कुछ बातें
@ मन्यु आत्रेय
जब कोई आपके कामों में या जीवन में गै़र ज़रूरी अनाधिकृत दख़लंदाज़ी करता है तो आपको यह महसूस होता है-
- उस व्यक्ति की उपस्थिति आपको असहज और बेचैन कर देती है।
- आप उसके सामने बंधे हुए और मजबूर महसूस करने लगते हैं।
- आपके मन में अचानक तनाव आ जाता है। घबराहट होने लगती है।
- आपके अंदर भावनाओं का नकारात्मक द्वंद्व पैदा हो जाता है।
- आप जल्दी से जल्दी उस व्यक्ति और माहौल से दूर हो जाना चाहते हैं।
कैसे जानें कि कोई दखल दे रहा है ?
कई बार लोग अप्रत्यक्ष रूप से भी आपके मामलों में दख़ल दिये होते हैं और आप पहचान नहीं पाते। तो आप कैसे पहचानेंगे कि कोई आपके मामले में दख़ल या हस्तक्षेप कर रहा है?
- कोई हमें बिना मांगे सलाह देने लगता है उसका स्वर आदेश जैसा होता है।
- वो हमारे दायरे का उल्लंघन करने वाले सवाल, काफ़ी सवाल पूछता है।
- कुछ लोग हम पर अवांछित अधिकार जमाते हैं। जितना उनका हक़ या पात्रता बनती है उससे ज़्यादा वे हक़ दिखाते हैं।
- जब कोई हमारे फै़सलों में गै़र ज़रूरी रूप से शामिल होने की कोशिश करता है या हमें उसके हिसाब से निर्णय लेने के लिये प्रेरित करता है।
- कभी कभी कोई व्यक्ति अपनी आशा, अपेक्षा, इच्छा या इंसानियत की दुहाई देकर हमसे अपनी मनमर्जी का व्यवहार करवाना चाहता है।
- ऐसे लोग हममें अपराध बोध, क्रोध या आत्म दया पैदा करके हमें अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास करते हैं।
- कोई क्रोध में, तैश में या हमें नीचा दिखाते हुए सारी कमान अपने हाथ में लेने की कोशिश करता है जबकि वो काम हमें करना चाहिये था।
- कुछ लोग यह दर्शाते हुए कि हम कम जानते हैं और वे ज़्यादा जानते हैं, हावी होने की कोशिश करते हैं। उनके शब्दों और गतिविधि से समझा जा सकता है।
- जो लगातार केवल नकारात्मक बातों, कमियों, चूकों को लेकर आलोचना के स्वर में बातें करता है वो भी दखलंदाज़ी कर रहा होता है।
- जो हमारे विकल्प के सामने अनावश्यक रूप से कई कई विकल्प प्रस्तुत करने की कोशिश करता है, वह अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करता है।
- कभी कभी कोई व्यक्ति हम पर हद से ज़्यादा निर्भरता जताने लगता है।
- कुछ लोग हमारे बारे में अफ़वाहें फैलाते रहते हैं, गॉसिप करते हैं और हमारे मामले का तमाशा बनाने की कोशिश करते रहते हैं, कई बार हमें ये पता नहीं होता कि कौन ऐसा कर रहा है।
- कुछ लोग ड्रैकुला की तरह हमसे हमारा आशावाद, सकारात्मकता और उत्साह चूस लेते हैं और हमें किसी ड्रामा में उलझा देते हैं।
- जिस समय आपका कुछ महत्वपूर्ण काम हो उसी समय वे कुछ ध्यान बंटाने वाली गतिविधि कर देते हैं या फिर तमाशा खड़ा कर देते हैं।
- कुछ लोग सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नकारात्मकता फैलाते रहते हैं, कभी व्यंग्य करके, कभी टीका टिप्पणी करके वे हमें प्रभावित करते हैं।
- लोग दख़लंदाज़ी क्यों करते हैं?
- हर व्यक्ति के दखल देने के अलग अलग कारण हो सकते हैं, कभी यह स्वभाव का भाग हो सकता है तो कभी किसी मक़सद से हो सकता है, कभी कभी व्यक्ति को समझ नहीं आता कि वह दूसरे के मामले में दख़ल दे रहा है। \
इन कारणों से लोगों का दख़ल हो जाता है-
- जब कोई स्वयं को आपका हितैषी मानता है, आपसे जुड़ा हुआ महसूस करता है तो वो आपके मामले में दख़ल देने का अधिकार समझने लगता है।
- ऐसा व्यक्ति आपको कोई ग़लती या चूक करने से रोकने के लिये, आपको कथित रूप से किसी नुक़सान से बचाने के लिये हस्तक्षेप करता है।
- कुछ लोग आपके मामले में हस्तक्षेप करके अपना महत्व दिखाना चाहते हैं। अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं, नियंत्रण करना चाहते हैं।
- वे अपने किसी लाभ या फ़ायदे या हित के चलते हस्तक्षेप करते हैं। जैसे कई बार लोग अपने आर्थिक लाभ के लिये दख़लंदाज़ी करते हैं।
- कोई दूसरों के ध्यान का केंद्र बिन्दु बनने के लिये ऐसा कुछ करता है जो किसी के मामले में दख़ल बन जाता है।
- कभी कभी कुछ लोग अपना आत्मविश्वास, अपना मान सम्मान बढ़ाने अपनी अल्प प्रतिष्ठा को बचाने के लिये भी दख़ल देते हैं।
- कोई कभी कभी लोगों के समूह में खुद को शामिल रखने के लिये बीच बीच में कूदने लगता है ताकि वो भी उस समूह का हिस्सा बन जाये।
- कुछ लोग बहुत ज़्यादा अहंमन्य होते हैं जो पूरा नियंत्रण, सारी प्रशंसा, सारा श्रेय, सारी उपलब्धियों पर अपना ही दावा ठोकना चाहते हैं।
- कुछ लोग भावनात्मक रूप से कमज़ोर पड़ने, व्याकुलता, तनाव या अन्य भावनात्मक चुनौतियों में खु़द को समायोजित करने के लिये दूसरों के मामले में टांग अड़ाने लगते हैं।
- किसी किसी ने अतीत में जो मानसिक झटका खाया होता है, जिस अवसाद से वो गुज़रा होता है उससे खुद को उबारने के लिये वो दूसरों के जीवन में अपना दखल बढ़ा देता है।
- व्यक्ति किस आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक पृष्ठभूमि से आता है इसका भी प्रभाव पड़ता है। पश्चिमी देशों में लोग अपने काम से काम रखते हैं, और हमारे समाज में लोग अपना काम छोड़कर अन्य सभी के काम से काम रखते हैं।
- कुछ लोग दूसरों के जैसे दोस्तों, परिवार, समाज आदि के दबाव में होते हैं और स्वयं को एक अच्छा दोस्त, परिजन या शुभचिंतक सिद्ध करने के लिये ऐसे मामले में हस्तक्षेप करते हैं जिसकी कोई आवश्यकता नहीं थी।
- कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें निजी दायरे की समझ नहीं होती, वे किसी के भी जीवन में घुसते चले जाते हैं।
- कुछ लोग बहुत ही जिज्ञासु होते हैं, अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिये वे दूसरों के मामले में टांग अड़ाने लगते हैं।
- किसी किसी को ये समझ ही नहीं आता कि जो व्यवहार उसके हिसाब से अच्छा है वो दूसरे के हिसाब से बहुत हस्तक्षेप करने वाला हो सकता है।
- कोई आदमी बोर होने के कारण या निरूद्देश्य सा ही दख़ल देने लग जाता है, जिस बात से उसका कोई वास्ता ही नहीं होता। वो अपने जीवन का अर्थ तलाश करने के लिये दूसरों को उंगली करने लगता है।
- कुछ लोगों को दूसरों के मामले में टांग अड़ाने, हस्तक्षेप करने दख़लंदाज़ी करने की आदत पड़ जाती है।
- कई बार किसी व्यक्ति के हस्तक्षेप करने के पीछे इनमें से एक से अधिक कारण भी हो सकते हैं।
- कभी कभी हम सोचते हैं कि हम इस मामले को निपटा सकते हैं, या हम स्वयं को विशेषज्ञ या सक्षम मानकर हस्तक्षेप करते हैं। कभी किसी बात का समर्थन करके, कभी किसी बात का विरोध करके हम अक्सर दख़लंदाज़ी करते ही रहते हैं।
- जो व्यक्ति आपका जितना क़रीबी होगा, जिससे आपका जितना अधिक वास्ता होगा उसके मामले में आप उतनी जल्दी और उतना अधिक दख़ल देंगे।
दखल देने वालों का क्या करें?
लोगों के व्यवहार को देखिए, समझिये। ऊपर जो तरीके बताए गए हैं दखल करने के उनको खोजिए कि कौन ऐसा कर रहा है। उन कारणों को जानने की कोशिश कीजिये । लोगों के स्वार्थ के छुपे हुए दांत पहचानने की कला सीखिए। लोगों के हस्तक्षेप का मक़सद जानिए। सोचिए कि इस व्यक्ति के हस्तक्षेप से मामला किस दिशा में जा सकता है?
दखल देने वाले से आपके संबंध, प्रभाव और स्थिति से तय होता है कि आप उसका कितना प्रतिरोध कर पाएंगे। जहां हम सीधा प्रतिरोध नहीं कर सकते वहां विषयांतर करना एक अच्छी रणनीति होती है।
लोगों के लिए सीमा निर्धारित कीजिये। बिना हिचक लोगों को विनम्रता से सीधे या संकेतों में बोल दीजिए कि अपने काम से काम रखें। कुछ लोगों का दखल अक्सर आपकी मदद करने होता है, जैसे शिक्षक, माता पिता भाई बहन दोस्त, जो आपको सही दिशा में ले जाना चाहते हैं और गलती, चूक, नुकसान से बचाना चाहते हैं।
आपको जीवन भर दूसरों के दख़ल का सामना करना पड़ेगा और दूसरों के जीवन में दख़ल देना पड़ेगा, बस इसकी कम से कम क़ीमत आपको चुकानी पड़े वो तरीक़ा खोजने की ज़रूरत होगी।
Wednesday, 27 November 2024
असली अच्छे और ढोंगी अच्छे लोगों को कैसे पहचानें?
@ मन्यु आत्रेय
वाक़ई अच्छे व्यक्ति कैसे होते हैं?
अच्छा होने का ढोंग करने वालों को कैसे पहचानें?
कब सतर्क हो जाना चाहिये?
ऐसे ‘अच्छे’ लोगों से कैसे निपटें?
मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा
मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा आज मैं एक संकल्प के साथ उठता हूँ— मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा। कल की स्मृतियाँ और कल की चिंताएँ द...
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मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा आज मैं एक संकल्प के साथ उठता हूँ— मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा। कल की स्मृतियाँ और कल की चिंताएँ द...
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एटीट्यूड दिखाने वालों का क्या किया जाये? @ मन्यु आत्रेय एटीट्यूड दिखाने वाले लोग अक्सर किसी को पसंद नहीं आते, पता नहीं अजीब सी च...
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@मन्यु आत्रेय कभी कभी लोगों को उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए। आमतौर पर हमें अपने करीबी लोगों की परवाह होती है और हम उनके लिए कुछ कर...


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