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Sunday, 29 November 2020

खिलता कंवल हो जाऊं

*नव कल्प*

आज के दिन 
मुझे यह बात याद रखनी है 
कि मैं अपने जीवन की 
किसी भी बात से ज़्यादा महत्वपूर्ण हूँ 
कोई भी तर्क, कोई भी बात, कोई भी व्यक्ति, 
कोई भी स्थिति, कोई भी संबंध 
जो मुझ पर थोंपा जाए, वह
मुझसे ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं है 
जो मुझे स्वीकार नहीं है
कोई भी बात 
मेरा मन खट्टा नहीं कर सकती,
कोई भी बात मुझे 
पूरी तरह से निराश नहीं कर सकती 
तनावपूर्ण स्थिति में भी मुझे 
अपने अस्तित्व का संतुलन बनाये रखना है
मुझे वही करना है जो सही और ज़रूरी है 
वही जो मेरी जीवन यात्रा को समृद्ध करे, 
न कि वह जो मुझे बांधे 
मैं अपने आस पास हो रही 
किसी भी घटना से अलग हूँ
मैं कीचड़ में खिला कमल हूँ 
जो उससे हमेशा पृथक और सुंदर है!! 

@मन्यु आत्रेय

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