body {-webkit-user-select:none; -html-user-select:none; -moz-user-select:none; -ms-user-select:none; user-select:none;}

Tuesday, 22 December 2020

अधूरेपन को स्वीकार करना है

नव कल्प
आज के दिन 
मुझे ये समझ लेना है 
कि अधूरापन स्वाभाविक है 
ज़िन्दगी में कुछ न कुछ अधूरा छूट जाता है 
बल्कि काफी कुछ अधूरा रह जाता है
कभी बातें अधूरी रह जाती हैं जो ज़िन्दगी भर पूरी नहीं हो पाती हैं
कभी काम अधूरे रह जाते हैं 
दिमाग पर छा जाते हैं
कई अधूरे इरादे दिल की तलहटी में डूबे हुए हैं 
कई सपने कहीं किसी तंद्रिल करवट तले 
सिसकने लगते हैं 
कई नवजात इच्छाओं की भ्रूण हत्या हो जाती है
कुछ रिश्ते जो उम्र भर पूरे नहीं हो पाते
पर अपनी दहलीज़ को भी लांघ नहीं पाते 
न जाने कितनी चीजें पूरी सीख नहीं पाते हैं
अभिमन्यु बन कर चक्रव्यूह में फंसते जाते हैं 
कुछ अधूरी कविताएं मचलती हैं 
कुछ अधूरी दास्ताने तड़पती रहती हैं 
कुछ अधूरे वाक़यात उम्र के उसी मोड़ पर 
ठिठुरे खड़े रह जाते हैं 
कुछ मुलाकातें कभी पूरी नहीं हो पाती, 
ऐसे ही अधूरेपन में लिपटी हुई ज़िन्दगी 
पूरी नहीं हो पाती 
मगर बावजूद इसके, 
ज़िन्दगी में कुछ तो ऐसा ज़रूर होता है
जो पूरा होता है 
कभी कभी पूरा होकर कुछ नष्ट हो जाता है
मिट जाया करता है
इसलिए ज़िन्दगी के हर उस अधूरेपन को , 
जो कभी पूरा नहीं होगा, 
उसके अधूरेपन के साथ स्वीकार करना है
क्योंकि कई अधूरी चीजें भी एक ज़िन्दगी को खूबसूरत बना सकती हैं

@मन्यु आत्रेय

6 comments:

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा   आज मैं एक संकल्प के साथ उठता हूँ— मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा।  कल की स्मृतियाँ और कल की चिंताएँ द...