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Tuesday, 8 December 2020

अपनी उपलब्धता की कीमत समझो

*नवकल्प*

आज के दिन 
मुझे यह समझना है 
मेरे होने न होने से दुनिया मे
बहुत ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता
ज़िन्दगी चलती रहती है, 
लोग अपनी राह तलाश करके 
अपने जीवन को संवार ही लेते हैं 
सारी दुनिया के लिए स्वयं को उपलब्ध
रखने के लिए मुझे अपने आप को 
खोना नहीं है, भूलना नहीं है, गंवाना नहीं हैं
करीबी से करीबी रिश्ता ही क्यों न हो 
सबका जीवन चलता रहेगा 
मैं रहूं तो भी और न रहूं तो भी
थोड़े बहुत व्यवधान के बाद सब कुछ 
सामान्य गति से चलने लगेगा
अधिकांश लोगों को मेरी उतनी ज़रूरत नहीं 
जितनी मुझे महसूस होती है
या वे प्रदर्शित करते हैं 
लोग अक्सर सिर्फ लोक व्यवहार निभाते रहते हैं
इसलिए मुझे किसी के लिए भी 
अपनी उपलब्धता इतनी नहीं रखनी कि
उसकी कीमत और कद्र कम कर दी जाए
लोगों के पास हमेशा विकल्प होते हैं
मुझे वो पता हों या न हों, 
पर मेरे पास मेरा कोई विकल्प नहीं है 
मुझे इसे संभालना है, इसे संवारना है
ये मेरी ज़िंदगी है इसे मुझे अच्छे से जीना है

@मन्यु आत्रेय

4 comments:

  1. वाह बहुत उत्तम सर आपके विचार एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं आप यूं हीं हमें आत्म विश्वास बढ़ाने में सहायक विचार देते रहिए बहुत बहुत आभार आपका 🌺🙏

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    1. Anu ji bahut dhanyawad aapki sarahna mayne rakhti hai

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