नव कल्प
आज एक बात गांठ बांध लेनी है
कि कभी भी अपनी भावनाओं को
अपात्र लोगों के सामने व्यक्त नहीं करना है,
बहुत कम लोग ऐसे होते हैं
जो व्यक्त की गई भावनाओं का सम्मान करते है,
उन्हें समझने की कोशिश करते हैं
बेहद चुनिंदा सच्चे लोग ही हमे ऐसे मिलते हैं
लोग या तो भावनाओं से खेलने लगते हैं
या उसका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं
या मज़ाक बनाने लगते हैं
दुनिया एक बाज़ार है
यहां झूठी मुस्कुराहट की कीमत
सच्चे आंसुओं से ज़्यादा लगाई जाती है
यहाँ भावना को उजागर करने को भी
एक इश्तेहार संमझा जाता है
इस बाजार में भावनाओं की नीलामी नहीं करनी,
जो चीज़ बाज़ार में आती है बाज़ारू हो जाती है
इस बाज़ार में जो पेशेवर लोग हैं
वो जज़्बात की ज़बान नहीं समझते
भावना सिर्फ उसी के सामने व्यक्त करनी है
जो उसे वैसे ही धन्य भाव से ग्रहण करे
जैसे भगवान के प्रसाद को किया जाता है
किसी को भी जांचे परखे बिना अपनी
गहन और बेहद अहम भावनाएं किसी के सामने
प्रकट करना एक लापरवाही होगी
हालांकि बरसो पुराने लोग भी अपनी भावना
प्रकट किए जाने लायक नहीं होते
मेरी भावनाएं मेरी पहचान है
मेरा अस्तित्व है, मेरी शख्सियत है
लेकिन जो मेरी भावनाओं की कद्र करे
वो संबंध मेरे लिए सबसे बढ़कर होगा
मेरी भावनाएं मेरे वजूद का अभिन्न भाग है
जो मेरी भावना को स्वीकार करता है
वो मेरे वजूद को भी स्वीकार करता है
जो मुझे स्वीकार करेगा मैं उसे स्वीकार करूंगा !
संभालूंगा, रक्षा करूंगा और आगे बढ़ाऊंगा
क्योंकि वही इंसान मेरे जीवन की असली संपदा है
@मन्यु आत्रेय
Super perfect and beautifully written sir👌👌👌🙏🏻🙏🏻💐💐💐
ReplyDeleteNice...... 👍🏻👍🏻
ReplyDelete🙏🌺🌹🌺🙏, श्री मान जी शुभ प्रभात परेसाम उपकारः परमो धर्मः । मनुष्य के मन में जब उपकार की भावना बलवती होती हैं वह अपने भावनाओं बह जाता है वह यह नहीं समझ पाता कि मनुष्य किसी प्रकार का(कपटी है या विश्वासपात्र) विचार रखता है और दुष्ट व कपटी मनुष्य उनके भावनाओं से खेलता है और कपट करता है लेकिन सच्चे व व्यवहार कुशल मनुष्य उनके भावना को बढ कर साथ देता है और अपना समर्थन किया करता है। ( क्षमा वीरस्य भुषणं) श्री मान जी आपके विचार से सहमत हैं।
ReplyDeleteएक दम सही लेख है सर् जी
ReplyDeleteabsolutely right sir ji 🙏
ReplyDeleteउत्तम सत्य ऐसा ही करना चाहिए 🌸🙏
ReplyDeleteThis lesson has to be tied tightly. In my life
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