नव कल्प
आज के दिन मुझे यह ध्यान रखना है
कि मैं सिर्फ उसी को कुछ दूं
जिसकी उसे ज़रूरत हो, जो लेने का पात्र हो
और जो दिए जाने की क़द्र करे
चाहे वो रुपये हों, कोई और चीज़,
परवाह हो, ध्यान हो या भावनात्मक सहारा
भरोसा हो या प्रेरणा, चाहे वो समय हो
प्रेम हो चाहे साथ हो चाहे समर्पण
ये ही वो निधियां हैं जो मैं किसी को दे सकता हूँ
जिसे ज़रूरत न हो उसे वो देना फ़िज़ूल है
देना उसे चाहिए जिसे देने से उसके जीवन में
सच में कोई अच्छा बदलाव आ पाए
और ये बदलाव उसकी इच्छा का हो या उसके भले के लिए हो
अपात्र को कुछ देकर हम उसे बर्बाद करते हैं
और यह हमसे जुड़े उस इंसान के साथ अन्याय है
जिसे ज़रूरत थी पर हमने नहीं दिया
उसे देते तो शायद उसकी ज़िन्दगी में
कोई अच्छाई हो पाती कुछ सुधार हो पाता
लेकिन उसकी बजाए हमने
एक ऐसे शख्स को दे दिया जिसे
शायद उसकी उतनी ज़रूरत भी नहीं थी,
जो हमारे प्रति उतना कृतज्ञ भी नही होगा
और यह आखिर में हमारी वेदना का कारण बनेगा
जब तक सामने वाले की मर्ज़ी नहीं है,
जब तक सामने वाले को ज़रूरत नहीं है
जब तक ये स्पष्ट न हो जाये कि उसे ये चाहिए
जब तक मैं देने का और वो लेने का पात्र न सिद्ध हो जाये
तब तक किसी को भी कुछ मत दो
ये सही है कि कई बार इंसान
अपना सम्मान बचाने के लिए मांग नहीं पाता
उसकी जरूरत महसूस हो तो बेशक़ बिन मांगे दे दो
और जब दे दो तो फिर सोचना भी मत
कि कोई धन्यवाद या कृतज्ञता ज्ञापित करेगा
सब अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार चलते हैं,
अपनी आवश्यकताओं और उन्हें पूरा करने का तरीका जानते हैं,
उन्हें उनके जीवन के साथ स्वतंत्र छोड़ दो
करो उसके लिए जो याद रखे बस !!
@मन्यु आत्रेय
Bilkul sahi sir👍👍💐💐💐
ReplyDeleteधन्यवाद प्राची
DeleteRight 🙏
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteश्री मान जी शुभ प्रभात, आपके विचार से सहमत हैं क्योंकि सबसे सस्ती और सबसे महंगी सुझाव या ज्ञान को कहा गया है अपने से दो तो मूल्यहीन और मागने पर दो महत्वपूर्ण/मूल्यवान होता है।
ReplyDeleteVery true sir ji..🙏🙏💐💐
ReplyDeleteBahut sahin
ReplyDelete