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Thursday, 21 January 2021

जीत हार को पचाना सीख लो

नव कल्प
आज के दिन मुझे 
हार- जीत को पचाना सीखना है
वैसे हर दिन कई कई बार मेरी जीत होती है 
और कई कई बार मैं हारता हूँ 
बातों में, कामों में, तर्कों में, प्रतिस्पर्धा में
जब मैं भारी पड़ता हूँ मैं जीतता हूँ
जब कोई मुझ पर भारी पड़ता है मैं हारता हूँ 
हालांकि कई जीत हार ज़्यादा महसूस नही होती
क्योंकि उनसे अहम बहुत ज़्यादा जुड़ा नहीं होता 
जिस बात में भी अहम तृप्त हो, वह जीत लगती है
जिसमे अहम चोटिल हो वह हार लगती है
और वही जीत हार ज़्यादा प्रभावित भी करती है
बिना अहम के जीत और हार सिर्फ एक स्थिति ही तो है 
अपने आप को इस स्थिति में लाना है 
जब जीत अहम को बढ़ाने न पाए
और हार अहम को घायल न कर पाए
और ऐसा कब होगा ? 
जब मैं स्वयं श्रेय लेने की बजाय 
जीत के पीछे की परिस्थितियों और 
मुझे प्राप्त सहयोग के प्रति कृतज्ञ होऊंगा
मेरी असली जीत उस समय होगी 
जब मैं हारने वाले को सम्मान दूंगा, 
मैं अपनी हार में अपनी कमियाँ खामियाँ,
अपनी चूकें, गलतियाँ खोजूंगा
उन परिस्थितियों की पहचान करूंगा 
जिनमे मैं कमज़ोर पड़ता हूँ और उनमें सुधार करूंगा
अपनी हार का दोष दूसरों के सर नहीं डालूँगा
मैं हार को एक शिक्षा एक सबक के रूप में लूंगा
मुझे ये कभी नहीं भूलना है कि 
जीवन मे शांति हार से बचने या जीत हासिल करने से नहीं आएगी
बल्कि शांति तब आएगी जब मैं जीत हार को पचाना सीख पाऊंगा 
और हर जीत हार से ऊपर उठने की कोशिश करूंगा 
क्योंकि कोई भी जीत कोई हार 
हमेशा के लिए नहीं होती!!

@मन्यु आत्रेय

6 comments:

  1. Absolutely perfect sir👌👌💐💐💐bahut sundar likha hai aaine👍aur picture 👍

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  2. 🙏🌺🙏श्री मान जी शुभ प्रभात

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  3. A great lesson for lifetime, to be successful 🙏🏻👌💐💐

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  4. हार जीत में एक रहना ही असल चुनौती है
    बहुत ख़ूब लिखा है

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  5. Bilkul sahi kaha aap ne 🙏🙏

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