नव कल्प
आज के दिन मुझे यह समझ लेना है
कि लोग मुझे कई बार स्वीकार करेंगे
तो कई बार अस्वीकार भी करेंगे
जिसने मुझे आज स्वीकारा वो कल ठुकरा भी सकता है
जिसने आज ठुकराया वो कल स्वीकार भी कर सकता है
ठुकराया जाना कोई बहुत खराब बात नहीं है
ठुकराए जाने से इतना न डर जाना कि
अपनी बात रखना ही बन्द कर दो
लोग ठुकराते कब हैं, जब हमारी बात
उनके मन के अनुसार नहीं होती,
या जब वो हमें समझ नहीं पाते
इसका मतलब यह नही है कि हर बार हममें कोई दोष हो,
हो सकता है सामने वाला ऐसी मनः स्थिति में हो
कि वो हमें समझ नहीं पाए
हो सकता है उसकी ही समझ सीमित हो
शायद वो हमारी बात के योग्य ही न हो
शायद नियति में ऐसा कुछ लिखा ही न हो,
ठुकरा दिए जाने से दुनिया खत्म नहीं हो जाती,
ध्रुव को पिता ने ठुकरा दिया था तो उन्हें भगवान विष्णु की गोद मिली
ठुकरा दिए जाने से विषाद ग्रस्त मत होना
बल्कि अपने आप को इस क़ाबिल बनाना कि
अपने आप को और बेहतर बना सको,
खुद को और बेहतर तरीके से अभिव्यक्त कर सको
ज़्यादा बेहतर समय पर अपनी बात रख सको
ये दुनिया बदल जाने वाले लोगों से भरी पड़ी है
सामने वाला न बदला तो भी हालात तो बदलेंगे ही
आपकी शख्सियत किसी एक अस्वीकृति से
टूटनी नहीं चाहिए,
ज़िन्दगी चलती रहेगी, उसे चलते रहना है
बेहतर बनो,लोग झक मार के आएंगे
नहीं आये तो भी दिल छोटा मत करो
अपनी कीमत अपनी कदर समझो!
@ मन्यु आत्रेय
Reality of daily life💐💐💐💐
ReplyDelete🙏🌹🌺🌹🙏, श्री मान जी शुभ प्रभात, हिन्दी में अहम - संस्कृत का मैं - संस्कृत में मैं हिन्दी का अहम । मनुष्य ऐसे ही हैं अपने जरूरत के अनुसार अर्थ निकाल लेते हैं । इस बिच मैं (अहम) शब्द बदनाम हैं । (श्री मान जी आपका विचार से हम सहमत हैं ।)
ReplyDelete🌺🌹🙏, श्री मान जी शुभ प्रभात, हिन्दी में मैं - संस्कृत का अहम - संस्कृत में अहम हिन्दी का मैं । मनुष्य ऐसे ही हैं अपने जरूरत के अनुसार अर्थ निकाल लेते हैं । इस बिच मैं (अहम) शब्द बदनाम हैं । (श्री मान जी आपका विचार से हम सहमत हैं ।)
ReplyDeleteWah sir ..bahut khoob...ye samajhna bahut bahut jaruri hai👍👍👍💐💐💐
ReplyDeleteBilkul sahi baat hai sir, very motivating🙏👌👍🙏💐
ReplyDeleteBehtareen
ReplyDeleteSahi kaha hai aapne
ReplyDeleteसत्य है जीवन का
ReplyDeleteबहुत ही सुंदरता से आपने प्रस्तुत किया।
लाजवाब