नव कल्प
मुझे यह बात हमेशा याद रखनी है
कि बड़े संकल्पों को पूरा करने के लिए
अधिक समय, अधिक मेहनत, अधिक अनुशासन,
अधिक संसाधन, अधिक समर्पण
और अधिक दुआओं की ज़रूरत पडती है
और वह भी सिर्फ एक दो बार या एक छोटे समय के लिए नहीं
बल्कि लगातार, हमेशा, और तब तक जब तक लक्ष्य पूरा न हो जाये
दुनिया के हर काम की एक प्रक्रिया होती है जिसे पूरा करना पड़ता है,
कुँए में डाली गई बाल्टी को तब तक खींचना पड़ता है
जब तक वो पानी लेकर बाहर न निकल आये
सूरज को तब तक पानी को भाप बनाना पड़ता है
जब तक वो भाप घने बादल न बन जाएं
ज्ञान को बार बार ग्रहण और स्मरण करना पड़ता है
ताकि वह अच्छी तरह से याद हो जाये समझ जाए
कोई भी अभ्यास निपुण होते तक लगातार करना पड़ता है
युद्ध तब तक लड़ना पड़ता है जब तक जीत न हो जाये
वार तब तक करना होता है जब तक दुश्मन परास्त न हो जाये
पौधे की रक्षा तब तक करनी ही पड़ती है
जब तक वह एक मोटे तने का पेड़ न बन जाये
मनचाही रक़म जमा करने लगातार बचत करनी पड़ती है
मनचाहा शरीर बनाने लगातार कसरत करनी पड़ती है
एक किलोमीटर की दौड़ एक किलोमीटर दौड़ कर ही पूरी होगी
उससे पहले छोड़ दिया तो सारी मेहनत बेकार हो जाएगी
इसलिए जब तक काम पूरा न हो जाये जुटे रहो
बाधाएं स्वाभाविक है, लेकिन उनसे हार न मानना असाधारण है
जब तमाम मुश्किलों के बावजूद आप कुछ निरंतर करते हैं
तो उसके प्रति आपकी गंभीरता और संकल्प की मजबूती प्रकट होती है
जब किसी बात को आप इतनी शिद्दत से करते हैं
कि वो रोज़मर्रा का काम नहीं बल्कि एक व्रत बन जाये
तो उसे पूरा होने से कोई भी नहीं रोक सकता,
इसलिए जो भी करें लगातार करें, रुकना नहीं।
@ मन्यु आत्रेय
Bahut sahi sandesh sir👍👍👌👌💐💐
ReplyDeleteVery motivational sir ji🙏👌💐👍
ReplyDeleteAlways Outstanding Bhaya
ReplyDeletevery nice,, consistency is must ।।।
ReplyDeleteSahi hai Manish bhai
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