नव कल्प
मुझे इस बात को समझना है
कि जीवन भर कोई न कोई
मेरा दिल दुखाता ही रहेगा
किसी की कोई बात
तो किसी का व्यवहार मन को व्यथित कर देगा, किसी की आदत, किसी का किरदार दिल दुखायेगा
कोई स्वार्थ सिद्ध करेगा, कोई विश्वासघात करेगा,
कोई इस्तेमाल करेगा, कोई वक़्त पर साथ नहीं देगा
कोई झूठ बोलेगा कोई भ्रम पैदा करेगा
लोग हर वो तरीका जानते हैं जिनसे मुझे पीड़ा हो,
जिससे मुझे विचलित किया जा सके
जिनसे मैं सबसे अधिक अपेक्षा रखूंगा
उनमें ही मुझे सबसे अधिक दुख देने की क्षमता होगी
जहां रिश्ते सबसे घनिष्ठ होंगे वहीं सबसे ज़्यादा वेदना मिलेगी
मुझे हमेशा सहते रहने की ज़रूरत नहीं है
मुझे हर संबंध में सहन करने की एक सीमा तय करनी होगी मुझे अपने अंदर यह तय करना होगा कि इस व्यक्ति को कब तक माफ किया जा सकता है,
सामने वाले पर मुझे अपनी असहमति, अपनी आपत्ति और अपनी प्रतिक्रिया धीरे धीरे बढाते हुए प्रकट करनी होगी
क्योंकि अगर मैंने ऐतराज़ नहीं किया तो
वे मुझे कष्ट पहुंचाने को एक सामान्य बात
या अपना विशेषाधिकार समझ लेंगे
ऐसे रिश्ते निरर्थक हैं जिनमे सिर्फ मुझे ही सहन करना पड़े
मुझे लोगों को उनकी वो हद समझानी पड़ेगी
जिसके भीतर उन्हें रहना होगा वरना रिश्ता नहीं रहेगा
रिश्ता बचाने सहते रहना कोई हल नहीं है,
खुद को धोखा देने से बड़ा कोई छल नहीं है
क्योंकि अंत मे सिर्फ दुख ही मिलता है
ये बात समझनी ज़रूरी है
@मन्यु आत्रेय
This is so perfect sir👌👍👌👍💐💐💐
ReplyDeleteAwesome
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