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Wednesday, 10 February 2021

खुशमिज़ाज बनिये विदूषक नहीं!

हर आदमी का एक इनर सर्किल होता है 
जिसमे वह खूब हंसता हंसाता है 
पर ये हमेशा याद रखना चाहिए कि
सब को खुश करने या हंसाने का ज़िम्मा 
भगवान ने आपको नहीं दिया है 
अक्सर कुछ लोग दूसरों को हंसाना चाहते हैं
उन्हें खुश करना चाहते हैं 
क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे दूसरे लोगों में वे लोकप्रिय होंगे 
उनकी स्वीकार्यता बढ़ेगी, माहौल हल्का होगा
इसके लिए लोग चुटकुला सुनाते हैं, मज़ाक़ करते हैं, रंग रंग की बातें करते है
माहौल को हल्का करने के चक्कर में कई बार 
हम हल्की बात कर जाते हैं, या ऐसा कुछ कर जाते हैं 
जो भले ही उस समय हास्यास्पद और मज़ेदाए लगे, 
लेकिन असल मे उससे लोग हमें हल्के में लेने लग जाते हैं 
फिर वो हमें फन ऑब्जेक्ट यानी मज़े की चीज़ समझने लगते हैं 
और बाद में बिना हमारे मूड की चिंता किये हमसे 
अपेक्षा करते हैं कि हम कुछ मजेदार सुनाएं 
बहुत बार दूसरों को खुश करने या हंसाने की कोशिश व्यर्थ जाती है तो अच्छा नहीं लगता
हर आदमी की समझ और मानसिकता अलग होती है 
हर आदमी हमे अलग अलग स्तरों और सीमा में जानता है
आदमी हर समय अलग अलग मनोदशाओं में होता है 
हो सकता है सामने वाला इस समय उदासियों के काले धूसर कम्बल तले सिसकना ही चाहता हो
या गहरा मंथन कर रहा हो मन में, उसमें  व्यवधान पैदा मत कीजिये
उससे संबंध खराब हो सकते हैं 
हमारी छवि खराब होते एक मिनट भी नहीं लगता, 
कई बार अपमानित भी होना पड़ सकता है 
इसलिए मत सोचिए कि सभी को आप खुश करें
सभी को हंसाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए
आप एक खुशमिज़ाज व्यक्ति बनिये, 
अपने व्यक्तित्व की सकारात्मकता बांटिए
लोगों को खुश करने के चक्कर में भांड या विदुषक मत बन जाइये
हर समय प्रलाप करना ज़रूरी नहीं है
खुशमिज़ाज बनेंगे तो सम्मान बचा रहेगा
विदूषक बनेंगे तो हल्के में लिया जाएगा
यदि विदूषक ही बनना है तो स्टैंड अप कॉमेडियन बन जाइये

@मन्यु आत्रेय

3 comments:

  1. Great tips to improve personality improvement 💐

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  2. 😊😊sahi kaha sir 💐💐💐💐

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  3. श्री मान जी शुभ प्रभात 🙏🌹🌺🌹🙏

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