व्यक्तित्व और चरित्र दो अलग अलग बातें हैं
एक आकर्षक व्यक्तित्व का आदमी
खराब चरित्र वाला भी हो सकता है
और एक साधारण से व्यक्तित्व का इंसान
चरित्र से बहुत अच्छा और मज़बूत हो सकता है
व्यक्तित्व एक जटिल चीज़ है जिसमे
एक व्यक्ति के जन्म से प्राप्त मानसिक गुण, व्यवहार और शारीरिक बातें जैसे कद काठी आदि आते हैं
व्यक्तित्व वो है जो दुनिया के सामने आता है,जैसे आकर्षक, अनाकर्षक, अंतर्मुखी,बहिर्मुखी, निडर-डरपोक आदि
लेकिन चरित्र इंसान का सीखा हुआ और ग्रहण किया हुआ होता है
चरित्र अंदर की बात है, ये एक लंबी यात्रा है,
इस यात्रा में जो कुछ आपने अर्जित किया
वो अपने व्यक्तित्व के अनुसार किया है
व्यक्तित्व फूल है और चरित्र उसमें छुपी हुई खुशबू
आपको धोखा तब होता है जब आप किसी के
व्यक्तित्व का सही आकलन नहीं कर पाते
क्योंकि आप उसके असली चरित्र का आकलन नहीं कर पाते
आप सामने वाले के व्यवहार को ही उसका चरित्र मान लेते हैं
जो आपको अपने झांसे में फांसना चाहता है
अधिकांश रिश्ते इसीलिए दरक जाते हैं
क्योंकि आदमी होता कुछ है और हम समझते कुछ और हैं
व्यक्तित्व और चरित्र में बदलाव आता है, अनाकर्षक व्यक्ति आकर्षक बन सकता है
चरित्रवान व्यक्ति दुश्चरित्र बन सकता है
इसीलिए बात चाहे व्यक्तित्व की हो या चरित्र की
किसी पर भी अत्यधिक निर्भरता नहीं रखना चाहिए
व्यक्तित्व और चरित्र दोनों की थाह ली जा सकती है
आपको सिर्फ जल्दीबाजी से बचना होगा
हालात ही व्यक्तित्व और चरित्र की सच्ची परीक्षा करते हैं
आप अलग अलग परिस्थितियों में किसी के व्यक्तित्व
और उसकी क्रिया प्रतिक्रिया का मूल्यांकन कीजिये
उसका असली चरित्र और असली व्यक्तित्व आपको समझ आ जायेगा
कई लोगों का व्यक्तित्व मायावी और चरित्र दोहरा होता है
ऐसे नाटकबाज लोगों से सतर्क रहना बेहद ज़रूरी है !!
उम्र के साथ तजुर्बा बढ़ने पर हम इसकी थोड़ी समझ हासिल करते हैं
पर कम उम्र मे, यदि पर्याप्त सतर्क और समझदार हम नही हैं
तो गच्चा खा सकते हैं, खाते ही हैं इससे बचना चाहिए
सामने वाले के व्यक्तित्व और चरित्र दोनो को टटोलो तब भरोसा करो।
@मन्यु आत्रेय
Very useful..bahut sahi sir👍👍💐💐
ReplyDeleteवाह्ह भैया काफी दिनों से ये सवाल का जवाब मै भी खोजती थी 🙏🏻🌹👌
ReplyDeleteVery nice 👌👌,nice observation as always💐
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