*नव कल्प*
मुझे यह कभी नहीं भूलना है कि
इस दुनिया मे मुझ जैसे 6.5 अरब लोग हैं
मैं जो हूँ वो हूँ लेकिन मुझसे बेहतर लाखो लोग हैं
शायद मेरे आस पास, शायद मेरे दायरे में भी,
शायद हर कोई मुझसे किसी न किसी मामले में
किसी न किसी बात में, किसी न किसी हुनर में
मुझसे बेहतर होगा,
कोई मुझसे अच्छा कवि, लेखक, गायक होगा
मुझसे बेहतर सपने देखता होगा,
मुझसे बेहतर कल्पनाएं करता होगा
जिसकी भाव बुद्धि का स्तर मुझसे ऊंचा होगा
कोई मुझसे ज़्यादा सहनशील होगा,
कोई व्यक्तित्व में, कोई देह से, कोई स्वास्थ्य से,
कोई व्यवहार से कोई संसाधन से, कोई बुद्धि से,
कोई भाग्य से कोई प्रभाव से मेरी तुलना में
बेहतर होगा अधिक क्षमतावान होगा
किसी की उपलब्धियाँ मुझसे श्रेष्ठ होंगी,
किसी का हार न मानते हुए जुटने का हौसला
मुझसे बेहतर होगा,
कोई मुझसे ज़्यादा अच्छा प्रेमी होगा,
मुझसे ज़्यादा अच्छा पति, पिता, पुत्र, भाई और
दूसरे तमाम रिश्तों को मुझसे अच्छा निभाने वाला होगा,
कोई मुझसे अच्छा सीखने वाला होगा,
मुझसे बेहतर प्रेरणाएं देता होगा,
कोई ऐसी चीजें जानता समझता होगा जो मैं नहीं जानता समझता,
कोई मुझसे ज़्यादा होशियार, कर्तव्यपरायण, ईमानदार, निष्ठावान और अच्छे चरित्र वाला होगा
सिर्फ कोई नहीं कई लोग मुझसे बेहतर होंगे
हज़ारो लोग मुझसे बेहतर या बराबर नहीं भी होंगे
शायद मुझसे कहीं निचले पायदान पर होंगे
पर ये दुनिया हम सबकी है,
ये दुनिया मेरी भी उतनी ही है जितनी मुझसे श्रेष्ठ और बेहतर की,
और उतनी ही उनकी भी जो कमतर हैं कमज़ोर हैं
अपने से श्रेष्ठों को देखकर हीन भावना नहीं पालनी है
और अपने से कमजोरों को देखकर अहंकार नहीं पालना है
अपने आप को जीवन की अपनी परिस्थितियों के अनुसार अच्छे से अच्छा बनाना है,
क्योंकि हर व्यक्ति अपनी अपनी परिस्थितियों के बीच बेहतर या कमतर हुआ है,
जब हम पैदा हुए थे तो हम अनंत संभावना थे
और जैसे जैसे उम्र बढ़ती गयी,
संभावनाएं धूमिल होके गायब होने लगी
जितना जीवन शेष है उसमें बेहतर से बेहतर होने की
कोशिश करनी है ताकि जीवन के अंतिम क्षण में
यह सुकून रहे कि मै एक बेहतर इंसान बन सका!
@मन्यु आत्रेय
Absolutely right sir 💐💐💐 be humble is the mantra 👍👍bahut khoob
ReplyDeleteश्री मान जी शुभ प्रभात, आपका लेख अतुल्य है। 🙏🌺🌹🙏 मनुष्य यह जानता और समझता कि संसार शुन्य है पर भी अंनत संभावनाओं को पालता है बडे-बडे लोग (बुद्धिमान, कर्तव्यपराण, ईमानदार, व्यवहार कुशल) इस संसार में जन्म लेकर आये और चले भी गये लेकिन केवल कुछ लोगों को ही दुनिया जानता है और मानता है और वह भी अपने - अपने आवश्यकता के अनुसार यही इस संसार का नियम है।
ReplyDeletebahut hi prerak vichar hai sir🙏💐👍
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