नव कल्प
ये बात ध्यान में रखनी है कि
लोग कई कई समस्याओं से जूझ रहे होते हैं
कई मुश्किल और जटिल स्थितियों में होते हैं, संघर्ष कर रहे होते हैं
कभी कभी हम ज़बरदस्ती लोगों के जीवन में हस्तक्षेप कर देते हैं जिससे हमारा कोई लेना देना नहीं होता
शायद हम सोचते हैं कि हम ज़्यादा होशियार हैं, या हमें लगता है हमारे बिना ये निपटेगा नहीं या सामने वाला वैसा नहीं कर रहा है जैसा हमारे अनुसार उसे करना चाहिए था,
अगर हम कमीने हुए तो मज़ा लेने या फिर
परिस्थितियों को और जटिल करने के लिए
बीच मे टपक पड़ेंगे,
कई बार कोई हमसे मदद मांगता है
और हम कूद जाते हैं उसकी मदद करने
चाहे हमें उसकी मदद नहीं भी करनी चाहिए थी
या उसका हमसे मदद की अपेक्षा रखना वाजिब नहीं था
कई बार हमें कुछ भी पता नहीं होता और हम पहुंच जाते हैं हीरो बनने
जब आदमी को बिच्छू का मंत्र भी न आता हो
तो सांप के बिल में हाथ डालना नही चाहिए
जिस प्रकार के मामले को डील करना
हमे अच्छे से नहीं आता हो उसमें कूद कर
हम सामने वाले की मेहनत को बर्बाद भी कर सकते हैं,अपमानित भी हो सकते हैं
कई बार सामने वाला मदद सिर्फ इसलिए मांगता है
क्योंकि उसे जुए में जोतने के लिए एक बैल चाहिए होता है
और आपको वो एक तरह से शिकार बना लेता है
वो फुर्र हो जाता है और आप फंस जाते हैं
जब आपकी क्षमता, साहस, और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का हुनर कम हो और खासकर तब जब वो आपका कर्तव्य न हो, जब आप सिर्फ एक विकल्प हों किसी के लिए,
तो आप भरसक ये कोशिश कीजिये कि किसी लफड़े में न पड़ें
असल मे परिस्थितियां कितनी जटिल हैं
पूरा मामला असलियत मे क्या है
जिसके पक्ष में आप खड़े हो रहे हैं उसकी असली भूमिका क्या है,
जिसके विपक्ष में आप खड़े हो रहे हैं उसकी प्रतिक्रिया को आप झेल पाएंगे या नहीं,
इस सबका विचार करके ही किसी के फटे में टांग अड़ाना है
लाखो प्रतिभाशाली लोग बस इतनी सी गलती के कारण बर्बाद हो चुके हैं
आपको अपने आस पास ऐसे लोग मिल जाएंगे
जब कर्तव्य हो, मानवता के लिए अनिवार्य हो
और जिसके परिणाम झेलने की हिम्मत आपमें हो
तो ज़रूर दूसरों के फटे में टांग अडाइये
पर यह भी याद रखिये कि यह बेशक़ीमती जीवन किसी के चक्कर मे खराब करने के लिए नहीं है !!
@मन्यु आत्रेय
This one is truly amazing 💐
ReplyDeletebilkul sahi baat hai sir🙏💐👍
ReplyDeleteश्री मान जी शुभ प्रभात, मनुष्यों में यह प्रवृत्ति पायीं जाती हैं कि वे उत्सुकतावश वश किसी के बहकावे में आ कर बिना सोचे समझे अपनी अधिकार से ऊपर उठ कर कार्य कर बैठता है और वह उस कार्य के लिए जिम्मेदार भी होता है। इसी कारण से वह परेशानीओ पालता/सहन करता है लेकिन जब मनुष्य को यह ज्ञान हो जाता है कि वह न ही उसका कर्तव्य, न हीं अधिकार है वह ज्ञालिन होकर पछतावा करता है और अपने आप को अपने अधिकार /कर्तव्य जोड़ लेता है ताकि पूर्व की भूल दोहराया न जाये। और यह अनुभव करने की कोशिश करता है कि मेरे द्वारा किया गया कार्य कहा-तक सही या गलत है।
ReplyDeleteBahut sahi kaha sir👍👍👍👍💐💐💐 awesome
ReplyDeleteसही कहा सर् जी
ReplyDeleteNice one
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