नव कल्प
संबंध असल मे प्रभावों का एक ताना बाना है दो लोगों का एक दूसरे पर जो प्रभाव होता है वह उन दोनों के संबंध को निर्धारित करता है
जब किसी व्यक्ति पर किसी दूसरे इंसान का प्रभाव हद से ज्यादा बढ़ जाता है तो दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता जाती रहती है
और वह प्रभावित करने वाले के इशारों पर चलने वाली कठपुतली बन जाता है
हममें से अधिकांश लोग कभी न कभी किसी न किसी की कठपुतली रहते हैं
इसी तरह कभी न कभी किसी ना किसी को
हम अपनी कठपुतली की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं
जिस इंसान में अधिकार भावना या पजेसिवनेस ज्यादा होती है
वह अक्सर दूसरों को अपनी कठपुतली की तरह इस्तेमाल करता है
प्रभावित होने वाला व्यक्ति समझ नहीं पाता कि वह कठपुतली बन गया है
और दूसरे के इशारों पर चलने लगता है
बहुत बाद में जब उसका कोई बड़ा नुकसान हो जाता है
या वह किसी बड़ी समस्या में फंस जाता है
तब उसे यह समझ में आता है कि उसका इस्तेमाल किया गया है
हमें कठपुतली की तरह अपने इशारों पर नचाने वाले लोग
हमारा भावनात्मक शोषण करते हैं, हमारे विश्वास हमारे समर्पण हमारी उपलब्धता के साथ खिलवाड़ करते हैं
हमारे साथ दिमागी खेल खेलते हैं
हमारी भावनाओं से खेलते हैं और हमें अपने कब्जे में रखना चाहते हैं
जब उनका मकसद पूरा हो जाता है जब हम उनके किसी काम के नहीं होते तो वह हमें फेंक देते हैं
अपने आप से आज सवाल कीजिये
मैं अपनी मर्ज़ी से जीता हूँ या किसी की अनुमति चाहिए होती है?
क्या मेरे जीवन मे मैं किसी दूसरे के निर्णयों को मानने के लिए मजबूर हूँ?
क्या मुझे अपनी किसी बात को किसी के सामने गलत मानना पड़ता है भले ही मैं सही रहूं?
क्या कुछ भी करने या सोचने से पहले मुझे
किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में सोचना पड़ता है?
क्या हर बार त्याग और समझदारी दिखाना मेरे हिस्से में ही आता है?
क्या अपनी मर्ज़ी से कुछ करते या कोई फैसला लेते हुए एक अपराध बोध मुझमें आता है?
यदि इन सवालों का जवाब "हाँ" है
तो आप उस व्यक्ति की कठपुतली बन चुके हैं
आपको उसके नियंत्रण से बाहर निकलने पर विचार करना चाहिए।
@मन्यु आत्रेय
Wah sir...super perfect hai ye to ...very much needed advice👌👍💐💐
ReplyDeleteThis picture is too right 👍
ReplyDeletevery true sir ji👍👌🙏💐
ReplyDeleteबिल्कुल सच लिखा है आपने
ReplyDeleteIts true sir ji
ReplyDeleteबहुत सुंदर सारगर्भित आलेख... ⭐ 🌹
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