नव कल्प
दूसरों की उपलब्धियों को स्वीकार करना है
चाहे मैं खुद उसके लिए संघर्ष कर रहा हूं
किसी ने कोई परीक्षा उत्तीर्ण की हो
या घर गाड़ी ऐशो आराम हासिल किया हो
कोई सम्मान पुरस्कार प्राप्त किया हो
या मनचाहा इंसान उसे मिल गया हो
चाहे कोई भी उपलब्धि उसे हुई हो
चाहे वो मुझे पसंद हो या न हो
वो मेरी प्राथमिकता और इच्छा हो या न हो
किसी की उपलब्धि को कम करके नहीं आंकना है
क्योंकि जो मेरे लिए एक साधारण बात हो
हो सकता है उसके लिए वही बात बहुत कठिन चुनौती हो
हर उपलब्धि की अपनी कीमत होती है
अपने लक्ष्य अपने सपने को पूरा करने के लिए
जी जान से मेहनत करनी पड़ती है
बहुत सारा समय लगाना पड़ता है
अपने संसाधन लगाने पड़ते हैं
अपने मन की कई इच्छाओं को मारना पड़ता है
अपनी प्राथमिकताओं पर अडिग रहना पड़ता है
दिन रात जुटना पड़ता है तब उपलब्धि हासिल होती है
जिस उपलब्धि के लिए जितनी प्रतिस्पर्धा हो
और जितनी कठिन डगर हो वो उतनी बड़ी होती है
आखिर सामने वाले की अपनी प्रतिभा है
उसके प्रयास हैं होशियारी है, प्रबंधन है
अपना भाग्य भी है अपने हालात हैं
जो उसके अनुकूल रहे
मुझे दूसरों की उपलब्धि को स्वीकार करना है
चिढ़ना नहीं है, हताश परेशान नहीं होना है,
ये नहीं सोचना है कि इसने भी पा लिया मुझे कब मिलेगा
जब मैं उस उपलब्धि की कीमत चुका सकूंगा
जब मेरे प्रयास और मेरी परिस्थितियां परस्पर अनुकूल हो जाएंगी
मुझे भी वह उपलब्धि मिल सकती है
अगर सामने वाले को मिली तो मुझे भी मिल सकती है
मुझे दूसरों की उपलब्धि से उनकी सफलता से
कुछ न कुछ सीखना है,
समझना है और अमल में लाना है
उपलब्धि से पहले उनको मिली असफलता से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है
यदि किसी ने गलत तरीके से गलत साधनों का इस्तेमाल करके भी कोई उपलब्धि पायी है
तो उसकी सराहना नहीं करनी है सम्मान नहीं करना है
वरना समाज मे गलत प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलेगा
हालांकि आज दुनिया सिर्फ उपलब्धि देखती है
आपने सही गलत किन साधनों से उसे पाया वह नहीं देखती
इसके बावजूद मुझे सही तरीकों से ही हर उपलब्धि पानी है
क्योंकि इसी से मन शांत होगा और उपलब्धि सार्थक होगी
@मन्यु आत्रेय
बहुत ही प्रेरणादायक विचार हैं सर...💐💐💐🙏🙏
ReplyDeleteBahut sahi kaha sir 👍👍👍💐💐💐
ReplyDeleteबहुत सुंदर विचार
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