आप अपने आसपास नज़र दौड़ाइये और देखिए
कि आपकी कौन कौन सी चीजें, सही तरीके से काम कर रही हैं और कौन सी ठीक नहीं हैं ।
आपको महत्वपूर्ण कागज़ पर दस्तखत करने हैं पर आपकी पेन में स्याही नहीं है।
आपको एक पार्टी में जाना है पर जूते मैले पड़े हैं और कपड़े इस्त्री नहीं हैं।
आपको तुरंत कहीं जाना है लेकिन आपकी बाइक बिगड़ी पड़ी है।
आपको दाढ़ी बनानी है पर आपके शेविंग किट में ब्लेड ही नहीं है।
आपको घर पर ताला लगाना है पर चाबी कहाँ है आपको नहीं मालूम।
रात को बिजली गुल होती है पर आपको टॉर्च और मोमबत्ती नहीं मिलते।
कुछ व्यवधान इसलिए हमारी ज़िंदगी में पैदा हो जाते हैं
क्योंकि हम तैयार नहीं रखते खुद को।
रोज़मर्रा के जीवन में इससे कोई बड़ा नुकसान हो न हो
हमारी दिनचर्या में खलल तो पड़ ही जाता है,
और हमारे मन में कहीं न कहीं कसैलापन आ जाता है।
जो आदमी चीजों की आवश्यकता और उनका महत्व समझता है
वो उन्हें हमेशा सलीके से रखता है, वो उन्हें उस स्थिति में रखता है
ताकि उनका तुरंत इस्तेमाल किया जा सके
हमेशा तैयार रहने का मतलब है अपनी मानसिकता, अपने शरीर और
अपने संसाधनों को ऐसी अवस्था में रखना ताकि
किसी भी भावी अनिश्चितता पर ठीक से प्रतिक्रिया दी जा सके।
तैयार रहने के पीछे दूरदर्शिता होती है और थोड़ा प्रबंधन होता है।
शरीर और मन की तैयारी अपेक्षाकृत जटिल है
लेकिन आप अपने संसाधनों को हमेशा तैयार हालत में रख सकते हैं
जब आपके साधन संसाधन तैयार हालत में होते हैं
तो आप बेहतर तरीके से परिस्थिति का सामना कर पाते हैं
आपका मनोबल बढ़ा हुआ रहता है आपको भरोसा रहता है कि
ये साधन बिल्कुल तैयार है जो मेरे काम आ जायेगा।
और ज़्यादा कुछ करना नहीं पड़ता अपने आप को तैयार रखने
अपनी चीजों को बीच बीच में चालू करके देखिए, उन्हें इस्तेमाल करते रहिए
उनके जो भी छोटे मोटे नुख्स हैं उन्हें सुधरवा के रखिये
उन्हें बिल्कुल नियत और सही जगह पर रखिये,
अपने साधनों के मैकेनिज्म को समझिए ये बड़े काम आता है
याद रखिये आपके पास की कोई भी चीज़ कितनी कीमती है
यह उतना मायने नहीं रखता जितना यह कि वो वक़्त पर काम आ जाये।
हर चीज़ एक उपकरण है एक साधन है
आपको कब किसकी ज़रूरत पड़ जाएगी आप नहीं जानते
पर आप अपनी अनुमान शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं
भावी आवश्यकता, परिस्थिति और सुरक्षात्मक ज़रूरत का पूर्वानुमान करें।
बच्चे को बुखार आ रहा हो तो पैरासिटेमोल घर में रख लेना चाहिए।
बिजली जाती हो तो प्रकाश की वैकल्पिक व्यवस्था कर के रखना चाहिए।
बरसात आने वाली हो तो टपकने वाली छत को पहले ही बना लेना चाहिए।
तैयार रखना प्रयास मांगता है सहज बुद्धि मांगता है इसे समझ लें।
जो जब जहां जिस स्थिति में होना चाहिए उसे तब वहाँ उस स्थिति में रखना ही
तैयार रहने का मूल मंत्र है।
हमेशा तैयार रहने में बड़े फायदे हैं चूकिए मत।
@ मन्यु आत्रेय
Fact👌👌👌
ReplyDeleteVery nice and motivating...👌🙏💐
ReplyDeleteRight sirji 👍👍👍💐💐💐
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