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Sunday, 21 March 2021

सिर्फ अच्छा होने से काम नहीं चलता

आपने यह बात कभी न कभी जरूर सुनी होगी 
कि यदि आप अच्छे हैं तो जग भी अच्छा है 
यह अपने आप को कहा गया एक बहुत बड़ा झूठ है 
क्योंकि सिर्फ आपके अच्छा होने से काम नहीं चलता 
यह दुनिया दुर्जन दुष्ट स्वार्थी ईर्ष्यालु और शत्रुता पूर्ण लोगों से भरी हुई भी है 
जो एक अच्छे व्यक्ति को लूट लेने, उसका दमन करने, उसका फायदा उठा लेने 
और उसे नष्ट कर देने से चूकती नहीं है 
इसलिए इस मामले में आदर्शवाद को छोड़ कर 
वास्तविकता से भरा दृष्टिकोण अपनाना ज्यादा अच्छा होगा 
आप किसे अच्छा कहेंगे और किसे बुरा कहेंगे?  आप कह सकते हैं कि अच्छा आदमी वह है जो कभी किसी का बुरा नहीं करता 
कभी किसी के बारे में बुरा नहीं कहता 
कभी किसी के बारे में बुरा नहीं सोचता 
हमेशा सब की मदद करता है, सुख दुख में काम आता है,
इससे क्या लोग उसके बारे में बुरा बोलना उसके बारे में बुरा सोचना 
उसके बारे में बुरा करना बंद कर देते हैं? 
सिर्फ एक बार लोगों की अपेक्षा पूरी करना भूल जाएं 
तो लोग पिछले सारे अहसान भूल जाते हैं 
एक गलती पिछली सारी अच्छाइयों को मिटा देती है 
कोई भी व्यक्ति चाहे अच्छा हो या बुरा हो 
अगर दूसरे लोगों के सपनों, इच्छाओं, 
प्राथमिकताओं, महत्वाकांक्षाओं उनके इरादों और उनके रास्ते में बाधा बनता है 
तो लोग निर्दयतापूर्वक उस व्यक्ति को अपने रास्ते से हटाने में जुट जाते हैं 
आपस में गठजोड़ करके षड्यंत्र करने लगते हैं 
और उस व्यक्ति को मिटा कर ही दम लेते हैं 
आप चाहे लाख अच्छे हो लेकिन किसी न किसी के लिए आप एक बाधा होते ही हैं
आप जिसके लिए भी बाधा बनते हैं वह आप को तोड़ने में जुड़ जाता है
वैसे भी एक अच्छा आदमी होने की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है 
ओढ़ी गयी अच्छाई बहुत महंगी पड़ती है
सच्चाई ये है कि सिर्फ अच्छा होने से काम नहीं चलता 
अच्छा होने के साथ-साथ आप को होशियार, 
सारी दुनियावी बातों को समझने वाला और ताकतवर होना भी जरूरी है 
एक अच्छा आदमी अगर कमजोर है तो लोग उसे कुचल कर रख देते हैं 
एक अच्छा आदमी यदि होशियार नहीं है तो वह अपने हितों की रक्षा नहीं कर पाता 
एक अच्छा आदमी समझदार नहीं है तो वह भावनात्मक शोषण से खुद को बचा नहीं पाता 
एक अच्छा आदमी अगर यह मानकर चलता है कि सारी दुनिया उसकी तरह अच्छी है 
तो वह असल में अपने आप को अंधे कुएं में ढकेल रहा होता है
इसलिए सिर्फ अच्छा होना काफी नहीं है 
अच्छे आदमी को अपनी आंखों पर से अच्छेपन के आदर्शवादी चश्मे को 
उतार कर दुनिया और लोगों को ठीक वैसा देखना चाहिए जैसे वे हैं। 
आदमी सबके लिए अच्छा हो भी नहीं सकता, 
अपनी अच्छाई को महिमा मंडित रखने के लिए अपने करीबी और निर्भर लोगों के 
हितों की अनदेखी करना या उसकी बलि दे देना उनकी नज़र में बुरा बना ही देगा। 
अच्छे आदमी पर लोग अपनी अपेक्षाओं का सारा भार लाद देते हैं 
अच्छा आदमी गधे की तरह दूसरों के सपनों, दूसरों की प्राथमिकताओं, 
दूसरों की ज़रूरतों और मनोदशा के अनुसार अपने जीवन को ढालता रहता है
और अंत मे अपयश का भागी भी वही बनता है 
अच्छा आदमी कई लोगों के लिए सिर्फ एक बलि का बकरा होता है
इसमे कोई शक नहीं कि आदमी को अच्छा होना चाहिए, 
लेकिन उसे अच्छा होने के साथ साथ होशियार, सतर्क, समझदार और ताकतवर भी होना चाहिए,

@मन्यु आत्रेय

4 comments:

  1. बहुत ही सुंदर लेख सर् जी🙏💐💐💐

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  2. Bilkul sahi... perfect sir..bahut khoob 👍👍👌👌💐💐

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