body {-webkit-user-select:none; -html-user-select:none; -moz-user-select:none; -ms-user-select:none; user-select:none;}

Wednesday, 24 March 2021

अपने प्रति ईमानदार कैसे रहें?

आप दुनिया में सभी के प्रति ईमानदार नहीं रह सकते
क्योंकि आपके करीबी लोगों के हित अहित आपस में टकराते हैं 
ऐसे में किसी एक के प्रति ईमानदार होना आपको दूसरे के प्रति ईमानदार नहीं रखता।
पर आप इतना ज़रूर कर सकते हैं कि चाहे जो भी स्थिति हो आप अपने प्रति ईमानदार रहें। 
अपने प्रति ईमानदार रहने का मतलब है खुद को किसी भी धोखे में न रखना
किसी ऐसी बात पर विश्वास नहीं करना जिस पर विश्वास करने का पर्याप्त आधार नहीं हो,
किसी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा नहीं करना जिसके प्रति आशंका हो कि ये भरोसा तोड़ देगा। 
अपने प्रति ईमानदार होने का मतलब है खुद से ढोंग नहीं करना, 
कम करके ज़्यादा नहीं दर्शाना, बेवजह के बहाव में नहीं उलझना। 
अपने प्रति ईमानदार होने का मतलब है जितनी आपकी क्षमता है उतना पूरा प्रयास करना।
किसी प्रकार के अंतर्द्वंद्व में रहने वाला आदमी अपने प्रति ईमानदार नहीं रहता। 
अपने प्रति ईमानदार रहने के लिए आपको उस विश्वास को छोड़ना होगा
जो आपको बिना किसी तार्किक संभाव्यता के किसी पर निर्भर करे। 
अपने प्रति ईमानदार होने के लिए आपको अपने शरीर, अपने मन और अपनी आत्मा तीनो से उठने वाले बारीक संवेदनों पर 
गहरी दृष्टि रखनी होगी और उनके प्रति जागरूक रहना होगा, अनदेखी बन्द करनी होगी। 
अपने प्रति ईमानदार आदमी अपने दुख को सुख के दिखावे की पोशाक नहीं पहनाता। 
जो जैसा है उसे वैसा ही देखना अपने प्रति ईमानदार होने की शर्त है। 
जब आप अपने प्रति ईमानदार रहते हैं तो दूसरों के प्रति भी ईमानदार रह पाते हैं 
एक ईमानदार आदमी अपने रिश्तों को पूरा सम्मान दे पाता है। 
अपने काम को अपने शौक को अपने से जुड़ी हर चीज़ को गम्भीरता से लेता है। 
एक छोटी सी बात समझने वाली यह है कि 
कई बार हम जिसे स्वयं के प्रति ईमानदार होना समझते हैं 
वह असल में स्वार्थी होना होता है। 
जब आप अपने हित को भी ध्यान में रखते हैं तो आप अपने प्रति ईमानदार होते हैं
और जब आप सिर्फ अपने हित का ध्यान रखते हैं दूसरों का चाहे अहित हो जाये, 
तो आप स्वार्थी हो रहे हैं, आपको अपने प्रति ईमानदार होना है न कि स्वार्थी। 
कई बार लोग उस व्यक्ति को गलत समझते हैं जो अपने प्रति ईमानदार हो रहा होता है। 
उसे अहंकारी,स्वार्थी,लालची, अकडू न जाने क्या क्या कह सकते हैं 
परंतु असल में अधिकांश लोग ऐसे ही होते हैं कुछ लोग परमार्थ का मुखौटा पहने होते हैं। 
जब आप अपने प्रति ईमानदार होते हैं तो आप अपने आप को अनावश्यक वंचित नहीं रखते,
आत्म वंचना से पीड़ित नहीं होते। 
कभी कभी अपने आप को केंद्र में रखकर कुछ लोग अपराध बोध से ग्रस्त हो जाते हैं 
परंतु यह अपराध बोध गलत होता है, और कहीं न कहीं अपने प्रति 
ईमानदार नहीं होने का संकेत करता है। 
जब सारी दुनिया स्वार्थ के पथ पर चल रही हो तो अपने प्रति ईमानदार होना ज़रा भी गलत नहीं। 
अपने प्रति ईमानदार होना, व्यर्थ के झमेलों में फंसने से बचा लेता है, 
नुकसान में पड़ने से रोक लेता है, दुर्जन लोगों की पहचान करा देता है, 
अपने प्रति ईमानदार होना तटस्थ होने का अवसर देता है। 
अपने प्रति ईमानदार आदमी खुद से झूठे बहाने नहीं बनाता
वह अपनी समीक्षा पूरी ईमानदारी से करता है,
उसे अपनी खासियत भी दिखती है और खामियां भी। 
वह अपने अतीत को भी स्वीकार करता है,वर्तमान को भी और भविष्य को भी। 
अपने प्रति ईमानदार होना उन्नति की सबसे ज़रूरी चाबी है। 
इसे संभाल कर रखिये। 

@मन्यु आत्रेय

4 comments:

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा   आज मैं एक संकल्प के साथ उठता हूँ— मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा।  कल की स्मृतियाँ और कल की चिंताएँ द...