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Monday, 8 March 2021

साधनों की कमी का रोना ना रोओ!

कुछ लोग हमेशा साधनों का रोना रोते रहते हैं।
किसी काम को पूरा करने के लिए कुछ साधन निश्चित तौर पर ज़रूरी 
और अनिवार्य होते हैं और उनके बिना काम नहीं होता। 
परंतु अक्सर हमारे पास उस की कमी को भरने के लिए विकल्प होते हैं, 
हमारी नज़र में वो नहीं आते क्योंकि हमारी सोच वहां तक जा नहीं पाती। 
जब हमारा दिमाग 'नहीं है' पर केंद्रित होता है 
तो हम अभाव उन्मुखी हो जाते हैं परन्तु जब हम 
उस अभाव को दूर करने के वैकल्पिक रास्ते तलाश करते हैं 
तो हम समाधान की ओर आगे बढ़ते हैं। 
जिसमे प्रतिभा होती है जिसमें जुनून होता है, 
वो कोई न कोई रास्ता ज़रूर निकाल लेता है। 
जो अनिवार्य होता है आदमी उसे किसी न किसी तरीके से कर ही लेता है। 
आपने जेम्स बांड की फिल्मों में देखा होगा कि 
किस प्रकार वो दुश्मन के ठिकाने पर मौजूद 
साधारण सी रोज़मर्रा की चीजों से घातक बम  बना लेता है। 
हमारे पास जो कुछ भी उपलब्ध है उसके सबसे बेहतर उपयोग से 
हम अपनी बहुत सी कमियों को जीत सकते हैं।
जो नहीं है उन्हें किसी से उधार मांगकर जुटाया जा सकता है। 
पेंसिल के पैसे नहीं होने से कोयले से लिख कर भी अभ्यास किया गया है। 
घर पर लाइट नहीं होने पर स्ट्रीट लैंप के नीचे लोगों ने अपनी पढ़ाई पूरी की है। 
आवागमन का साधन नहीं होने से मीलों का सफर पैदल तय किया है। 
एक महान फुटबॉलर ने पैसों के अभाव में कपड़ों की चिन्दियों की फुटबॉल से खेलना शुरू कर दिया था।
जिनमें कर दिखाने का जुनून हो वो साधनों का रोना नहीं रोते। 
लोग साधारण सी गैंती फावड़े से पहाड़ काट कर रास्ता बना लेते हैं
अपने आस पास के साधनहीन लोगों को देखिए। 
वो लोग किस तरह से मैनेज कर रहे हैं
साधनों पर बहुत ज़्यादा निर्भरता अच्छी नहीं,
लाठी पास होना अच्छा है पर शरीर की ताकत को विकसित करना ज़्यादा बेहतर है।
जब आप अभावों को दूर करने के नए तरीके और नई व्यवस्थाएं खोजते हैं 
तो असल में आप आविष्कार कर रहे होते हैं
दुनिया में कुछ भी पहले से इस स्वरूप में नहीं था जैसा आज है
पहले हवा थी पर पंखे,कूलर, एसी नहीं थे
पहले सफर था पर साइकिल, गाड़ी,ट्रेन, हवाई जहाज़ नहीं थे
ये सब कुछ अभावों को दूर करने के उपाय खोजने के कारण प्रकट हुआ है। 
आपके जीवन में जो साधन नहीं हैं उनकी कमी को खुद पर हावी मत होने दीजिए
अपना मनोबल और उत्साह ठंडा मत पड़ने दीजिए
याद रखिये एक योद्धा एक ब्लेड को भी घातक हथियार बना लेता है 
और एक नौसिखिया ए के 47 को भी लाठी जैसे इस्तेमाल करता है। 
जो नहीं है उसके रास्ते निकालो, जो है उसका सबसे बेहतर इस्तेमाल करो
तो दुनिया में कुछ ऐसा नहीं जो आपको रोक सके।

@मन्यु आत्रेय

4 comments:

  1. सच है, जहां चाह वहाँ राह👌👌👌💐💐

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  2. 🙏🌷🌸🌺🌹🙏श्री मान जी,

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  3. Very true sir👍super liked this article 👌👌💐💐

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