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Tuesday, 6 April 2021

अतृप्ति को स्वीकार कीजिये।

हममें से अधिकांश लोग किसी न किसी बात को लेकर नाखुश रह जाते हैं 
ऊपर से खुश लेकिन गहरे में अतृप्त। 
आज ज़रा इस बात पर विचार कीजिये कि आप अपनी ज़िंदगी में 
किस किस मामले में तृप्त हैं और किस किस मामले में अतृप्त हैं? 
आपका जिस जिस बात से मन नहीं भरता उस उस बात में आप अतृप्त हैं। 
आमतौर पर आप संतोष करके चल रहे होते हैं 
संतोष का अर्थ है जो है, जैसा है, जितना है
उसी में समाधान समझना, उसी में खुश रहना। 
आपके पास दो रोटियाॅं हैं और आप उतने में ही खुश हो जायें 
तो आप संतोष करके रह गये हैं, 
परंतु आपके शरीर और मन को 5 रोटियों की भूख है तो 
पांचवी रोटी खा लेने के बाद जो अनुभव आपको होगा उसे कहते हैं तृप्ति। 
तृप्ति ऐसा अनुभव है जिसे बताया नहीं जा सकता, न मात्रा में, न दिशा में। 
तृप्ति तब मिलती है जब आपके शरीर और मन के लिये आवश्यक मात्रा आपको मिल जाती है।
संतृप्ति वह चरम बिन्दु है जिसके आगे उससे आपको कुछ और नहीं मिल पाता है। 
कई बार हम तृप्ति पाने के पीछे अंधाधुंध भागते रहते हैं पर तृप्ति मिलती नहीं। 
तृप्ति बहुत सारी शर्तों के पूरा होने पर ही मिलती है 
और हर बार वांछित शर्तें पूरी हों ये ज़रूरी नहीं।
तृप्ति पर्वत का वो शिखर है जिसके दोनों ओर ढलान ही होता है। 
तृप्ति हमेशा के लिये नहीं होती, थोड़े समय बाद यही तृप्ति अतृप्ति को जन्म देती है 
क्योंकि तृप्त होने का अनुभव धीरे धीरे गायब होता जाता है 
और उसकी जगह अतृप्ति लेती जाती है। 
अतृप्ति बेचैन करती है, असंतोष खिन्न करता है। 
चूंकि पहले तृप्ति का अनुभव हो चुका होता है 
तो उसकी अनुपस्थिति हमें गहरे में अतृप्त होने का अहसास कराती है। 
यह अतृप्ति हमें मानसिक रूप से परेशान और शारीरिक रूप से विव्हल रख सकती है। 
देह और मन की प्रवृत्ति अधिकाधिक पाने की होती है परंतु बहुत कम लोगों को 
मनचाही चीज़, मनचाहे समय पर मनचाही मात्रा में मिल पाती है। 
इसलिये हममें से अधिकांश लोगों के मन में कहीं न कहीं गहरे में 
एक अतृप्ति बसी हुई होती है। 
परंतु कभी कभी यह अतृप्ति हमें नया सृजित करने, कुछ नई खोज करने के लिये, 
कभी कुछ और संघर्ष करने के लिये प्रेरित करती है। 
तृप्ति क्षणिक है, अतृप्ति दीर्घस्थायी है, इसलिये इसे अपनी प्रेरक शक्ति बनाया जा सकता है।
अतृप्ति बताती है कि आपके जीवन में अभी रस लेने, आनंद उठाने की संभावना शेष है। 
अभी कुछ और खुश हुआ जा सकता है। 
अतृप्ति एक आस बंधाती है तृप्त होने का। 
अतृप्ति आपके भीतर स्वाद लेने की कला विकसित करती है। 
आपको बेहतर ढंग से आस्वादन सिखाती है आपको नये विकल्प सुझाती है। 
आपको उसकी क़द्र सिखाती है जो कुछ आपके पास है। 
अतृप्ति आपकी उन्नति के प्रवेश द्वार की चाबी बन सकती है 
 बशर्ते आप तृप्ति से बंधना बन्द कर दीजिये।

@ मन्यु आत्रेय

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