हस्तक्षेप और दख़लंदाज़ी से जुड़ी कुछ बातें
@ मन्यु आत्रेय
जब कोई आपके कामों में या जीवन में गै़र ज़रूरी अनाधिकृत दख़लंदाज़ी करता है तो आपको यह महसूस होता है-
- उस व्यक्ति की उपस्थिति आपको असहज और बेचैन कर देती है।
- आप उसके सामने बंधे हुए और मजबूर महसूस करने लगते हैं।
- आपके मन में अचानक तनाव आ जाता है। घबराहट होने लगती है।
- आपके अंदर भावनाओं का नकारात्मक द्वंद्व पैदा हो जाता है।
- आप जल्दी से जल्दी उस व्यक्ति और माहौल से दूर हो जाना चाहते हैं।
कैसे जानें कि कोई दखल दे रहा है ?
कई बार लोग अप्रत्यक्ष रूप से भी आपके मामलों में दख़ल दिये होते हैं और आप पहचान नहीं पाते। तो आप कैसे पहचानेंगे कि कोई आपके मामले में दख़ल या हस्तक्षेप कर रहा है?
- कोई हमें बिना मांगे सलाह देने लगता है उसका स्वर आदेश जैसा होता है।
- वो हमारे दायरे का उल्लंघन करने वाले सवाल, काफ़ी सवाल पूछता है।
- कुछ लोग हम पर अवांछित अधिकार जमाते हैं। जितना उनका हक़ या पात्रता बनती है उससे ज़्यादा वे हक़ दिखाते हैं।
- जब कोई हमारे फै़सलों में गै़र ज़रूरी रूप से शामिल होने की कोशिश करता है या हमें उसके हिसाब से निर्णय लेने के लिये प्रेरित करता है।
- कभी कभी कोई व्यक्ति अपनी आशा, अपेक्षा, इच्छा या इंसानियत की दुहाई देकर हमसे अपनी मनमर्जी का व्यवहार करवाना चाहता है।
- ऐसे लोग हममें अपराध बोध, क्रोध या आत्म दया पैदा करके हमें अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास करते हैं।
- कोई क्रोध में, तैश में या हमें नीचा दिखाते हुए सारी कमान अपने हाथ में लेने की कोशिश करता है जबकि वो काम हमें करना चाहिये था।
- कुछ लोग यह दर्शाते हुए कि हम कम जानते हैं और वे ज़्यादा जानते हैं, हावी होने की कोशिश करते हैं। उनके शब्दों और गतिविधि से समझा जा सकता है।
- जो लगातार केवल नकारात्मक बातों, कमियों, चूकों को लेकर आलोचना के स्वर में बातें करता है वो भी दखलंदाज़ी कर रहा होता है।
- जो हमारे विकल्प के सामने अनावश्यक रूप से कई कई विकल्प प्रस्तुत करने की कोशिश करता है, वह अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करता है।
- कभी कभी कोई व्यक्ति हम पर हद से ज़्यादा निर्भरता जताने लगता है।
- कुछ लोग हमारे बारे में अफ़वाहें फैलाते रहते हैं, गॉसिप करते हैं और हमारे मामले का तमाशा बनाने की कोशिश करते रहते हैं, कई बार हमें ये पता नहीं होता कि कौन ऐसा कर रहा है।
- कुछ लोग ड्रैकुला की तरह हमसे हमारा आशावाद, सकारात्मकता और उत्साह चूस लेते हैं और हमें किसी ड्रामा में उलझा देते हैं।
- जिस समय आपका कुछ महत्वपूर्ण काम हो उसी समय वे कुछ ध्यान बंटाने वाली गतिविधि कर देते हैं या फिर तमाशा खड़ा कर देते हैं।
- कुछ लोग सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नकारात्मकता फैलाते रहते हैं, कभी व्यंग्य करके, कभी टीका टिप्पणी करके वे हमें प्रभावित करते हैं।
- लोग दख़लंदाज़ी क्यों करते हैं?
- हर व्यक्ति के दखल देने के अलग अलग कारण हो सकते हैं, कभी यह स्वभाव का भाग हो सकता है तो कभी किसी मक़सद से हो सकता है, कभी कभी व्यक्ति को समझ नहीं आता कि वह दूसरे के मामले में दख़ल दे रहा है। \
इन कारणों से लोगों का दख़ल हो जाता है-
- जब कोई स्वयं को आपका हितैषी मानता है, आपसे जुड़ा हुआ महसूस करता है तो वो आपके मामले में दख़ल देने का अधिकार समझने लगता है।
- ऐसा व्यक्ति आपको कोई ग़लती या चूक करने से रोकने के लिये, आपको कथित रूप से किसी नुक़सान से बचाने के लिये हस्तक्षेप करता है।
- कुछ लोग आपके मामले में हस्तक्षेप करके अपना महत्व दिखाना चाहते हैं। अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं, नियंत्रण करना चाहते हैं।
- वे अपने किसी लाभ या फ़ायदे या हित के चलते हस्तक्षेप करते हैं। जैसे कई बार लोग अपने आर्थिक लाभ के लिये दख़लंदाज़ी करते हैं।
- कोई दूसरों के ध्यान का केंद्र बिन्दु बनने के लिये ऐसा कुछ करता है जो किसी के मामले में दख़ल बन जाता है।
- कभी कभी कुछ लोग अपना आत्मविश्वास, अपना मान सम्मान बढ़ाने अपनी अल्प प्रतिष्ठा को बचाने के लिये भी दख़ल देते हैं।
- कोई कभी कभी लोगों के समूह में खुद को शामिल रखने के लिये बीच बीच में कूदने लगता है ताकि वो भी उस समूह का हिस्सा बन जाये।
- कुछ लोग बहुत ज़्यादा अहंमन्य होते हैं जो पूरा नियंत्रण, सारी प्रशंसा, सारा श्रेय, सारी उपलब्धियों पर अपना ही दावा ठोकना चाहते हैं।
- कुछ लोग भावनात्मक रूप से कमज़ोर पड़ने, व्याकुलता, तनाव या अन्य भावनात्मक चुनौतियों में खु़द को समायोजित करने के लिये दूसरों के मामले में टांग अड़ाने लगते हैं।
- किसी किसी ने अतीत में जो मानसिक झटका खाया होता है, जिस अवसाद से वो गुज़रा होता है उससे खुद को उबारने के लिये वो दूसरों के जीवन में अपना दखल बढ़ा देता है।
- व्यक्ति किस आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक पृष्ठभूमि से आता है इसका भी प्रभाव पड़ता है। पश्चिमी देशों में लोग अपने काम से काम रखते हैं, और हमारे समाज में लोग अपना काम छोड़कर अन्य सभी के काम से काम रखते हैं।
- कुछ लोग दूसरों के जैसे दोस्तों, परिवार, समाज आदि के दबाव में होते हैं और स्वयं को एक अच्छा दोस्त, परिजन या शुभचिंतक सिद्ध करने के लिये ऐसे मामले में हस्तक्षेप करते हैं जिसकी कोई आवश्यकता नहीं थी।
- कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें निजी दायरे की समझ नहीं होती, वे किसी के भी जीवन में घुसते चले जाते हैं।
- कुछ लोग बहुत ही जिज्ञासु होते हैं, अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिये वे दूसरों के मामले में टांग अड़ाने लगते हैं।
- किसी किसी को ये समझ ही नहीं आता कि जो व्यवहार उसके हिसाब से अच्छा है वो दूसरे के हिसाब से बहुत हस्तक्षेप करने वाला हो सकता है।
- कोई आदमी बोर होने के कारण या निरूद्देश्य सा ही दख़ल देने लग जाता है, जिस बात से उसका कोई वास्ता ही नहीं होता। वो अपने जीवन का अर्थ तलाश करने के लिये दूसरों को उंगली करने लगता है।
- कुछ लोगों को दूसरों के मामले में टांग अड़ाने, हस्तक्षेप करने दख़लंदाज़ी करने की आदत पड़ जाती है।
- कई बार किसी व्यक्ति के हस्तक्षेप करने के पीछे इनमें से एक से अधिक कारण भी हो सकते हैं।
- कभी कभी हम सोचते हैं कि हम इस मामले को निपटा सकते हैं, या हम स्वयं को विशेषज्ञ या सक्षम मानकर हस्तक्षेप करते हैं। कभी किसी बात का समर्थन करके, कभी किसी बात का विरोध करके हम अक्सर दख़लंदाज़ी करते ही रहते हैं।
- जो व्यक्ति आपका जितना क़रीबी होगा, जिससे आपका जितना अधिक वास्ता होगा उसके मामले में आप उतनी जल्दी और उतना अधिक दख़ल देंगे।
दखल देने वालों का क्या करें?
लोगों के व्यवहार को देखिए, समझिये। ऊपर जो तरीके बताए गए हैं दखल करने के उनको खोजिए कि कौन ऐसा कर रहा है। उन कारणों को जानने की कोशिश कीजिये । लोगों के स्वार्थ के छुपे हुए दांत पहचानने की कला सीखिए। लोगों के हस्तक्षेप का मक़सद जानिए। सोचिए कि इस व्यक्ति के हस्तक्षेप से मामला किस दिशा में जा सकता है?
दखल देने वाले से आपके संबंध, प्रभाव और स्थिति से तय होता है कि आप उसका कितना प्रतिरोध कर पाएंगे। जहां हम सीधा प्रतिरोध नहीं कर सकते वहां विषयांतर करना एक अच्छी रणनीति होती है।
लोगों के लिए सीमा निर्धारित कीजिये। बिना हिचक लोगों को विनम्रता से सीधे या संकेतों में बोल दीजिए कि अपने काम से काम रखें। कुछ लोगों का दखल अक्सर आपकी मदद करने होता है, जैसे शिक्षक, माता पिता भाई बहन दोस्त, जो आपको सही दिशा में ले जाना चाहते हैं और गलती, चूक, नुकसान से बचाना चाहते हैं।
आपको जीवन भर दूसरों के दख़ल का सामना करना पड़ेगा और दूसरों के जीवन में दख़ल देना पड़ेगा, बस इसकी कम से कम क़ीमत आपको चुकानी पड़े वो तरीक़ा खोजने की ज़रूरत होगी।

Well said
ReplyDelete