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Monday, 30 November 2020

मैं स्वयं खुशी बन जाऊं

*नव कल्प*


आज के दिन 
मुझे खुश होना है, 
उदास होने परेशान होने के 
तमाम कारणों को दरकिनार करके 
मुझे खुश होना है 
आज की सुबह को महसूस करके 
मुझे खुश होना है 
अपने प्रिय लोगों को देख कर 
दिल से खुश होना है 
जिनसे मिल कर मुझे अच्छा लगता है 
आज उनसे मिलना है 
जिनसे मिल न पाऊँ उन्हें कॉल करना है 
आज अपनी पसंद का गीत सुनना है, 
अपने सबसे आरामदेह कपड़े पहनना है 
जीवन की खुशनुमा बातों को याद करना है
और मुस्कुराना है 
आज के एक एक लम्हे में छुपे
खुशी के अनंत मौकों को खोजना है 
मुझे खुशी बांटना है, 
मन को खिन्न करने वाली हर बात को
मुझे आज खुद से दूर रखना है 
आज के दिन मुझे खुशी बन जाना है 

@मन्यु आत्रेय

Sunday, 29 November 2020

खिलता कंवल हो जाऊं

*नव कल्प*

आज के दिन 
मुझे यह बात याद रखनी है 
कि मैं अपने जीवन की 
किसी भी बात से ज़्यादा महत्वपूर्ण हूँ 
कोई भी तर्क, कोई भी बात, कोई भी व्यक्ति, 
कोई भी स्थिति, कोई भी संबंध 
जो मुझ पर थोंपा जाए, वह
मुझसे ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं है 
जो मुझे स्वीकार नहीं है
कोई भी बात 
मेरा मन खट्टा नहीं कर सकती,
कोई भी बात मुझे 
पूरी तरह से निराश नहीं कर सकती 
तनावपूर्ण स्थिति में भी मुझे 
अपने अस्तित्व का संतुलन बनाये रखना है
मुझे वही करना है जो सही और ज़रूरी है 
वही जो मेरी जीवन यात्रा को समृद्ध करे, 
न कि वह जो मुझे बांधे 
मैं अपने आस पास हो रही 
किसी भी घटना से अलग हूँ
मैं कीचड़ में खिला कमल हूँ 
जो उससे हमेशा पृथक और सुंदर है!! 

@मन्यु आत्रेय

Saturday, 28 November 2020

मुझे आज जागना है

*नव कल्प*

आज मुझे खुद को बोध से भरना है
आज मुझे स्वयं के प्रति जागना है
अपनी देह के मौन संवाद समझने हैं 
अपने मन की घाटी में गूंजते नाद सुनने हैं
अपनी आत्मा की पुकार सुननी है
आज मुझे वो करना है जो मुझे करना है
मुझे आज वो नहीं करना, जो नहीं करना है
आज के दिन मेरा हर कदम जागृत हो
अपनी धड़कनों के प्रति जागूँ
श्वास को आज ज़्यादा गहराई से समझूं
आज स्वाद में ज़्यादा ज़ायका ले पाऊँ
आज स्पर्श को ज़्यादा जज़्ब करूँ
आज गंध को अधिक महसूस करूँ 
आज रंगों को उनकी पूरी छटा में देखूँ
आज अपनी अनुभूतियों के बंधन खोल दूं 
आज अपने वजूद के कण कण से, 
रोम रोम से, कोने कोने से जागूँ
बस जाग ही जाऊं !!!

@मन्यु आत्रेय

Friday, 27 November 2020

हृदय से कृतज्ञ हूँ


*नव कल्प*

आज के दिन 
जो कुछ भी मेरे जीवन में अच्छा है 
उसके लिये हृदय से आभार है
वो और बेहतर और अच्छा हो जाये,
कृतज्ञ हूँ उन नेमतों के लिए 
जो मुझे मिली हैं, निरंतर बढ़ती जाए,
उन लोगों के प्रति कृतज्ञ हूँ 
जो हमेशा मेरे साथ खड़े रहते हैं
मैं खुद उनका साथ कभी न छोड़ूँ
उन घटनाओं का धन्यवाद, 
जिन्होंने मुझे मज़बूत बनने दिया,
हर अप्रिय बात से ऊपर उठने की कला सिखाई,
उन चीजों और उन जगहों का धन्यवाद, 
जिन्होंने मेरे जीवन मे सुविधा, सम्मान
और सुरक्षा का अहसास भरा,
मेरे अस्तित्व के सभी आयामों 
देह, बुद्धि, मन और आत्मा  
सभी को निर्मल करने वाले इष्ट के लिए
मेरी गहरी कृतज्ञता !

@मन्यु आत्रेय

Thursday, 26 November 2020

इच्छाएं प्रार्थनाएं बन जाएं

*नव कल्प*

आज के दिन 

मुझे सीखना है कि 
अपनी इच्छाओं को *संकल्प*
और संकल्प को *प्रार्थना* कैसे बनाते हैं
मुझे अपनी इच्छाओं को 
बिल्कुल *स्पष्ट* करना होगा 
स्पष्ट इच्छाएं, जिनके पीछे 
कोई *किन्तु परंतु न हो*
जिसमे कोई *भ्रम न हो*
वो हर इच्छा जो *पूरी शिद्दत से*
मेरी *आत्मा से* निकलेगी
प्रकृति उसे मेरे *जीवन में घटित* कर देगी
*क्योंकि मेरी इच्छा मेरी प्रार्थना बन जाएगी*
मुझे वो *सब कुछ* मिलेगा 
जो कुछ भी मुझे चाहिए
चाहे उसकी प्रचुरता हो या कमी
मुझे हर वो *राह* मिलेगी 
जिस पर मुझे चलना है 
मुझे हर वो *चीज़* मिलेगी जो चाहिए
मुझे हर वो *मुकाम* हासिल होगा
जीवन मे सब कुछ मेरा मनचाहा घटित होगा
जिसकी इच्छा मेरे मन में है
*मेरा मन इच्छा नहीं सिर्फ प्रार्थना करेगा*
और मेरी हर इच्छा पूरी हॉगी !!

*@मन्यु आत्रेय*

Wednesday, 25 November 2020

मुझे स्पष्ट होना है

*नव कल्प*

आज के दिन 
मुझे अपने आप मे स्पष्ट होना है, 
अपनी आज की प्राथमिकता को 
ठीक से समझना है 
आज अपने विचारों में 
और स्पष्टता लानी है। 
स्पष्टता के बिना जीवन पथ पर चलना 
वैसा ही है जैसे 
धुंध भरी सड़क पर गाड़ी चलाना। 
मुझे अपनी मंज़िल और अपने रास्ते 
दोनो को साफ साफ देखना है। 
मन की आंखों से, आत्मा की आंखों से, 
विवेक की आंखों से। 
मुझमें स्पष्टता तब ही आएगी
जब भीतर द्वंद्व नहीं होगा
मुझे आज अपने भीतर के द्वंद्व को 
शांत करना है 
मुझे निर्द्वन्द्व और स्पष्ट होना है। 

@मन्यु आत्रेय

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा   आज मैं एक संकल्प के साथ उठता हूँ— मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा।  कल की स्मृतियाँ और कल की चिंताएँ द...