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Thursday, 26 November 2020

इच्छाएं प्रार्थनाएं बन जाएं

*नव कल्प*

आज के दिन 

मुझे सीखना है कि 
अपनी इच्छाओं को *संकल्प*
और संकल्प को *प्रार्थना* कैसे बनाते हैं
मुझे अपनी इच्छाओं को 
बिल्कुल *स्पष्ट* करना होगा 
स्पष्ट इच्छाएं, जिनके पीछे 
कोई *किन्तु परंतु न हो*
जिसमे कोई *भ्रम न हो*
वो हर इच्छा जो *पूरी शिद्दत से*
मेरी *आत्मा से* निकलेगी
प्रकृति उसे मेरे *जीवन में घटित* कर देगी
*क्योंकि मेरी इच्छा मेरी प्रार्थना बन जाएगी*
मुझे वो *सब कुछ* मिलेगा 
जो कुछ भी मुझे चाहिए
चाहे उसकी प्रचुरता हो या कमी
मुझे हर वो *राह* मिलेगी 
जिस पर मुझे चलना है 
मुझे हर वो *चीज़* मिलेगी जो चाहिए
मुझे हर वो *मुकाम* हासिल होगा
जीवन मे सब कुछ मेरा मनचाहा घटित होगा
जिसकी इच्छा मेरे मन में है
*मेरा मन इच्छा नहीं सिर्फ प्रार्थना करेगा*
और मेरी हर इच्छा पूरी हॉगी !!

*@मन्यु आत्रेय*

1 comment:

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