आज के दिन
मुझे यह स्वीकार करना है कि
सब कि अपनी अपनी सीमा होती है
दूसरों के जीवन मे मेरा दखल
और मेरे जीवन मे दूसरों का दखल
जितना बर्दाश्त किया जाएगा
वही हमारी एक दूसरे के लिए सीमा होगी
जो मुझे जितना ज्यादा स्वीकार करेगा
वो मेरे लिए अपनी सीमाएं तंग नही रखेगा
वो मुझे अपने करीब आने देगा
मुझे भी तो हर किसी को अलग तरह से
स्वीकार या अस्वीकार करना पड़ता है
दो लोगों के आपसी संबंध तय करते हैं
कि दोनों की सीमाएं क्या होंगी
कुछ लोग सीमाएं तो नहीं रखते लेकिन
उनकी मजबूरियां ऐसी हो जाती हैं
मुझे लोगों की सीमाओं, मजबूरियों,
प्राथमिकता और निजी दायरे के साथ
उन्हें स्वीकार करना है
मेरा ध्यान सीमाएं बढ़ाने पर नहीं
संबंध बढ़ाने पर होना चाहिए
सीमा वो बाहरी और भीतरी हद होती है
जिस दायरे में दो लोगों का
आपसी रिश्ता होता है
इसका सम्मान करना होगा
दो लोगों की आपसी सीमाओं का संतुलन
हमेशा एक समान नहीं होता
दो लोग हमेशा एक दूसरे को एक बराबर
स्वीकार नहीं करते, कुछ फर्क रहता ही है
मुझे उस फर्क का सम्मान करना है
मुझे लोगों की सीमाओं की कद्र करनी है
और खुद को इस योग्य रखना है कि
हमारा रिश्ता सीमाओं से पार जा सके।
@मन्यु आत्रेय
Bahut sahi sir..bahut khoob 💐💐💐🙏🏻🙏🏻
ReplyDeleteबढ़िया लिखा
ReplyDeleteYo
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