*नव कल्प*
आज के दिन
मुझे स्वीकार करना सीखना है
क्या कब कहाँ कैसे और क्यों स्वीकार करना है
यह जानना है
जो कुछ बदलना संभव नहीं
जिस पर मेरा नियंत्रण नहीं
जो मेरे दायरे से बाहर है
जो घटित हो चुका या फिर
जिसका घटना अनिवार्य है
उसे स्वीकार करना होगा,
जो कुछ अप्रिय मुझे स्वीकार करना पड़े
उसके पीछे की अच्छाई खोजनी है
कुछ तो अच्छा ज़रूर होगा
न हो तो भी उसे अच्छा बनाएंगे
स्वीकार और अस्वीकार के बीच
ज़्यादा लंबी रस्साकशी नहीं रखनी है
असमंजस और अंतर्द्वंद्व में नहीं पड़ना है
जिसे कल स्वीकार करना ही पड़े
उसे आज ही स्वीकार करके मुझे
अपनी ऊर्जा बचानी है और
प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाना है
मानसिक रूप से तैयार होना है,
ताकि कल जो मुझे स्वीकार न हो,
उसे बदल सकूं
ज़िन्दगी एक सतत चलने वाली जंग है
एक छोटी मोटी लड़ाई हार जाने से
पूरी जंग नहीं हार जाते
यह मुझे स्वीकार करना है
तत त्वम असि
ReplyDeleteWah..Superb sir 💐💐💐🙏🏻🙏🏻
ReplyDeleteउत्तम सकारात्मक विचार और आज की आश्यकता भी 👍
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