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Wednesday, 13 January 2021

जीवन अपने आप में उत्सव है !


नव कल्प
आज के दिन मुझे उत्सव मनाना है 
जीवन के अधिकतर दिन उत्सव बन सकते हैं 
उत्स का अर्थ होता है स्रोत 
यानी जहाँ से कुछ उत्पन्न हो 
अगर देखने सोचने समझने का नज़रिया 
ऊर्जा से भरा हुआ और सकारात्मक हो
जो भीतर और बाहर से आनंद पाने तैयार हो 
तो जीवन का एक छोटा सा क्षण भी उत्सव है
जीवन के दुखों, तकलीफों, चुनौतियों और संघर्ष के बीच 
उत्सव एक अवसर देते हैं शांत होने का 
अपनी बिखरती हुई ऊर्जा, शक्ति 
और दृष्टिकोण को सही रास्ते में लाने का 
उत्सव का प्रयोजन क्या है, रीति रिवाज क्या हैं 
मौक़ा क्या है, तरीका क्या है 
ये सब ऊपरी बातें हैं, एक सामान्य व्यवस्था है 
असली उत्सव है आपके भीतर, आपके मन में,
जिसके मन मे उत्सव का आल्हाद हो, 
उसके शरीर में अच्छी ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है 
उत्सव सिर्फ शोरगुल, दिखावा या तमाशा करना नहीं है वह ढोंग है
उत्सव उदासी से प्रसन्नता की ओर यात्रा है
उत्सव नैराश्य के बीच आशा दीप जलाना है 
उत्सव खुशियों को साझा करना और सहयोग करना है 
खुद को आत्मिक, शारीरिक और मानसिक रूप से 
सकारात्मक परिवर्तन के लिए तैयार करना 
उत्सव है
उत्सव मनाने से समस्याएं, चुनौतियां, तकलीफें
समाप्त नहीं हो जाती लेकिन उत्सव
उनसे लड़ने की नई ताक़त ज़रूर देते हैं
उत्सव अच्छी यादों का निर्माण करते हैं 
जिसका जीवन जितने अधिक उत्सवों से भरा हो, 
उसकी जीवन यात्रा उतनी आनंदपूर्ण होगी
इसलिए उत्सव मनाने की औपचारिकता न करो
बल्कि अपनी आत्मा से अपने पूरे अस्तित्व से 
उस उत्सव के प्रवाह में बहो, 
अपनी आत्मा से उस आनंद में रहो
और धीरे धीरे इसे अपनी प्रकृति बना पाओ 
तो तुम्हारे जीवन का एक एक पल उत्सव हो जाए।

@ मन्यु आत्रेय

6 comments:

  1. Atyant atyant sundar vichar sir ...bahut khubsurat likha hai aapne sir bahut sahi bhi👌👌👌💐💐💐

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  2. Inspirational thought bounded with beautiful words💐💐

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  3. This comment has been removed by the author.

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  4. 👌👌👌 बहुत ही अच्छा लेख सर् जी

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  5. बहुत ही अच्छा वर्णन है सर 🙏💐💐💐

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