नव कल्प
आज के दिन मुझे
हर अनावश्यक बोझ से मुक्त होना है
जो कुछ भी ज़रूरत से ज़्यादा होता है
वो आज नहीं तो कल बोझ बन जाता है
चाहे वह सामान हो, चाहे इंसान
चाहे विचार हों या रिश्ते
चाहे इच्छा हो चाहे सपना
चाहे भावना हो चाहे कल्पना
जिज्ञासा हो चाहे ज्ञान हो चाहे रहस्य
चाहे भविष्य की फिक्र हो या गुज़रा हुआ अतीत
बोझ हमेशा तब बनता है
जब न रखने वाली चीजों को रख लिया जाए
इन परिस्थितियों से बचने की कोशिश करनी है
मुझे न अपने दिल पर कोई बोझ रखना है
और न अपने मन पर न अपने दिमाग़ पर
न अपनी देह पर और न अपनी आत्मा पर !
क्योंकि बोझ थका देता है निचोड़ लेता है
जो सामान ज़रूरत से ज़्यादा हो
और अव्यवस्था फैलाये उसे छोड़ देना है
जो इंसान रिश्तों के नाम पर मुझे दबाए,
सिर्फ मेरा इस्तेमाल करे उससे निजात पानी है
ज़्यादा विचारों में से सिर्फ वास्तविक और काम के विचार ही रखने हैं बाकी को तिलांजलि देनी है
जो इच्छाएं जो सपने जो कल्पनाएं
कल को फांस की तरह गड जाएं,
शूल की तरह चुभें, नश्तर की तरह चलें,
अथक प्रयासों पर भी जो पूरी नहीं होने वाली
उनके लिए अपने मोह को छोड़ देना है,
अपने दिमाग़ को गैर ज़रूरी ज्ञान से मुक्त रखना है
बार बार गुप्त सुप्त रहस्यों को झिंझोड़ के जगाना नहीं है उन्हें स्मृति की ज़मीन में गाड़ देना है
भविष्य की अनावश्यक फ़िक्र और अतीत के प्रभाव को धीरे से छोड़ते जाना है
ये जीवन बार बार मिलने वाली नेमत नहीं है
जीवन को सुख से जीने के लिए
हर बोझ से मुक्त होना सबसे अहम है !!
@मन्यु आत्रेय
Ekdam sahi kaha hai sir 👌👌👌👌💐💐satya hai...
ReplyDeleteThank you prachi
DeletePicture perfect 👍
ReplyDeleteबहुत सहीं विचार
ReplyDeleteधन्यवाद आपका
DeleteVery nice sir👍🙏💐
ReplyDeleteThank you so much
Deleteसूंदर लेख सर् जी
ReplyDeleteआभार
ReplyDeleteसही कहा आज हम आवश्यक बोझों को धोएं जा रहे हैं।
ReplyDeleteजैसे ऊपर का कमेंट मुझसे गलत हो गया क्योंकि मैं अनावश्यक विचारों को ढोये जा रहा था
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