body {-webkit-user-select:none; -html-user-select:none; -moz-user-select:none; -ms-user-select:none; user-select:none;}

Saturday, 30 January 2021

किसी का गुस्सा किसी और पर न निकालो

नव कल्प
मुझे यह ध्यान में रखना है कि गुस्सा आना स्वाभाविक है
जब कुछ मन के अनुकूल नहीं होता
जब कुछ ऐसा होता है जिससे हमें कष्ट होता है 
और तीखी प्रतिक्रिया देने से स्वयं को रोक नहीं पाते,
तो गुस्सा पहली प्रतिक्रिया होता है
लेकिन कहीं का गुस्सा कहीं और निकालने से बचना है
अक्सर जब कहीं का गुस्सा कहीं और निकाला जाता है 
तो कोई न कोई निर्दोष ही उसकी चपेट में आता है 
जिस पर गुस्सा निकाला जाता है उसे ठेस लगती है, 
अपमानित महसूस होता है,उसकी आत्मा दुखती है, 
वो भले जवाबी प्रतिक्रिया न कर पाए 
लेकिन बहुत बुरा लगता है जब कोई 
हमारा दोष नहीं होने पर भी हम पर गुस्सा निकाले
किसी का गुस्सा किसी और पर निकालना ये बताता है 
कि मैं नहीं जानता कि कष्ट का मूल कारण कौन है
या फिर मैं उस व्यक्ति का कुछ बिगाड़ नहीं सकता
या उन परिस्थितियों को बदलने की क्षमता मुझमें नहीं है 
या मेरा देखने का नज़रिया सही नहीं है 
यह सिद्ध करता है कि मैं एक तुनकमिजाज इंसान हूँ जिसे
अपनी खीझ निकालने के लिए एक आसान शिकार चाहिए था
जो जितना कमज़ोर होता है वह उतना ज्यादा
कहीं का गुस्सा कहीं और निकालता है
इससे बचने का एक सरल तरीका है 
जब किसी बात, व्यक्ति और हालात पर गुस्सा आये 
तो तुरंत गुस्से की प्रतिक्रिया नहीं देनी है 
तुरंत हमला नहीं करना है, 
खौलते हुए दिमाग़ का तेज़ाब तुरंत नहीं फेंकना है किसी पर
बल्कि उस क्रोध के क्षण को बीतने देना है
जब भीतर की खीझ थोड़ी शांत होगी 
तो समझ आ जायेगा कि जिस पर हम गुस्सा होने जा रहे थे 
क्या वो वाक़ई गुस्सा किये जाने  का पात्र था! 
इससे कई मासूम दिलों को ठेस लगने से बचाया जा सकता है,
कुछ अच्छे रिश्तों को दरकने से बचाया जा सकता है
अपने आप को एक संतुलित व्यक्तित्व बनाया जा सकता है 

@ मन्यु आत्रेय

13 comments:

  1. Perfect 👍🏼👍🏼.. behtareeen salah sir💐💐👌👌

    ReplyDelete
  2. "Never do anything when you are in a temper, for you will do everything wrong."

    ReplyDelete
  3. भाई पर उस क्षण को कैसे नियंत्रित किया जाय जब हमारा क्रोध अपने चरम पर हो, समस्या तो यही है न कि न तब मन शांत होता है न वाणी,

    ReplyDelete
  4. They say, never take decisions when you are too happy,sad or angry.

    ReplyDelete
  5. Very nice


    लेकिन कभी कभी ऐसा भी होता है
    गुस्सा करने वाला व्यक्ति सिर्फ अपनी ही बातों को तव्वजों देता है

    अपनी बातों को वो कभी गुस्सा शांत होने पर भी गलत नहीं मानता

    बल्कि मौन धारण करने वाले को जिम्मेदारइस कदर समझता है कि
    जो कुछ हो रहा है सिर्फ उसी के कारण हो रहा है

    ReplyDelete
  6. Bilkul sahi sandesh hai sir🙏👍👌💐

    ReplyDelete
  7. Gussa hmesha apne se kamjor par hi nikala jata h.

    ReplyDelete
  8. मुझे आपके लेख से सीखने की ज़रूरत है भैया। मुझे भी बहुत तेज़ गुस्सा आता है और उस पलों में जो प्रतिक्रिया मेरे द्वारा होती है उसके कारण हर बार बाद में पछतावा होता है।

    ReplyDelete

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा   आज मैं एक संकल्प के साथ उठता हूँ— मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा।  कल की स्मृतियाँ और कल की चिंताएँ द...