body {-webkit-user-select:none; -html-user-select:none; -moz-user-select:none; -ms-user-select:none; user-select:none;}

Saturday, 13 February 2021

कुछ बातें प्यार की कर लें!!

प्रेम है भी कि नहीं !
अव्वल तो यह समझ लो कि जिसे तुम प्रेम समझ रहे हो वह प्रेम है भी कि नहीं, कहीं वह आकर्षक लगना, कुछ गुणों या किसी बात से प्रभावित होना, दैहिक रूप से पा लेने की लालसा या कोई ऐसा लगाव तो नहीं जो किसी आवश्यकता को पूरा करता है 
अगर इसे प्रेम समझ रहे हो तो भ्रम में हो जितना गहरा डूबेंगे उतना बड़ा धोखा खाओगे आकर्षण घट जाता है इसका केंद्र बदल जाता है गुण बदल जाते हैं रंग ढल जाते हैं देह ढल जाती है लुनाई नष्ट हो जाती हैं आवश्यकताएं और प्राथमिकताएं बदल जाती हैं यदि छांट कर प्रेम किया हो किसी से तो वह और भी बड़ा धोखा होगा इसलिए धैर्य से सोचो समझो और फिर होश में आओ 

प्रेम का तोता रटन्त न करो!
प्रेम प्रेम की रट लगाने से कोई फायदा नहीं आपके व्यक्तित्व में आपके व्यवहार में प्रेम का समावेश हो लेकिन जीवन के लिए ज्ञान शक्ति साहस हास्य पैसा आत्म समीक्षा जैसी चीजें भी चाहिए सिर्फ प्रेम से कुछ खास होता नहीं प्रेम से पेट की आग नहीं बुझती बीमार की दवा नहीं आती प्रेम अगर आपकी गाइडिंग फोर्स बने तो बाकी चीजें आसान भले हो सकती हैं लेकिन सिर्फ प्रेम प्रेम की रेट लगाना काफी नहीं प्रेम करते रहना काफी नहीं बहुत कुछ और भी करना पड़ता है जिंदगी जीने के लिए इसलिए अपनी अकर्मण्यता को प्रेम में डूबे होने का नाम मत दो 

प्रेम को ऊंचाई दो!
यह अच्छे से याद रखना कि प्रेम की पराकाष्ठा देह अर्पित करने में नहीं है बल्कि देह की आसक्ति से बाहर निकल जाने में है सुंदर-असुंदर दुर्बल मांसल प्राप्त अप्राप्त लब्ध अलब्ध का भेद जब दिमाग में नहीं आएगा तो समझो कि प्रेम सही दिशा में बढ़ रहा है परंतु देह ईंट गारा है चाहो तो दीवारें खड़ी करके कोठरी बना लो या वैतरणी पार करने पुल बना लो 

प्रेम को मिट्टी रहने दो!
प्रेम को मिट्टी की तरह रहने दो सोंधा हुआ सा महकता धूप में पांव कम जलेंगे बारिश में उर्वरता बढ़ेगी ठंड में चोट नहीं लगेगी मिट्टी बाधा नहीं बनेगी प्रेम को सीमेंट जैसा ठोस ना बनाओ उसे स्थाई बनाने की कोशिश मत करो अन्यथा तुम उसे या तो अपने लिए कैदखाना बना लोगे या फिर अपना रास्ता रोकने वाली दीवार। प्रेम का सौंदर्य इस के बिखर जाने में है जहां जहां बिखरता है वहां वहां अंकुर फूट सकते हैं वहां वहां संभावना पैदा होती है प्रेम को मिट्टी ही रहने दो आखिर मुझको और तुम्हें मिट्टी में ही मिलना है मिट्टी ही तो हैं हम तो मिट्टी से मिट्टी मिल जाए बस वही पूर्णता।

4 comments:

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा   आज मैं एक संकल्प के साथ उठता हूँ— मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा।  कल की स्मृतियाँ और कल की चिंताएँ द...