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Sunday, 21 February 2021

अपना लहजा संभालो !!

आप क्या बोलते हैं यह अहम है 
लेकिन आप कैसे बोलते हैं यह उससे भी ज़्यादा अहम है
आपके बोलने का लहजा यह तय करता है 
कि आपकी बात को कैसे लिया जाएगा
शब्दों पर तब तक भरोसा नहीं होता 
जब तक वे अनुकूल भाव से नहीं कहे जाते
उनका लहजा सही होना चाहिये
यानी प्रेम का प्रदर्शन कोमलता के साथ और
क्रोध का प्रदर्शन उग्रता के साथ करना पड़ता है
हर बात को कहने का आपका लहजा अलग होता है
आप किससे किस लहजे में बात करते हैं, 
हर किसी से एक ही लहजे में बात नहीं कर सकते 
एक ही समय में आपको अलग अलग लोगों से अलग अलग परिस्थितियों में 
अलग अलग लहजे में बात करनी पड़ती है 
उनसे आपके चल रहे मुद्दे, और संबंधों की स्थिति अलग अलग होती है, 
आपको अपने लहजे को तुरंत स्विच करना पड़ता है 
जब आप ऐसा नहीं कर पाते तो लोगों से आपके संबंध बिगड़ जाते हैं 
एक के प्रति आप जिस लहजे में बात कर रहे हैं 
उसका प्रभाव दूसरे व्यक्ति पर भी पड़ता है
आपका लहजा आपकी शख्सियत का विज्ञापन है
बहुत बार हम अपने लहजे पर नियंत्रण नहीं रख पाते, 
और बात बिगड़ जाती है, क्योंकि हमारे लहजे को देखकर 
सामने वाला भी अपना लहजा बदल सकता है
और इससे एक अनचाहा विवाद छिड़ सकता है
लहजा बिल्कुल मसाले की तरह होना चाहिए
उसकी मात्रा और टाइमिंग एकदम सटीक होनी चाहिए
तब ही हमारी अभिव्यक्ति प्रभावशाली बनेगी
आपका लहजा बताता है कि आप प्यादे हैं या बादशाह! 
आपका लहजा आपके संस्कार बताता है, 
एक कमज़ोर आदमी का लहजा दमदार नहीं होता
और हमेशा दबंगई से बात करने वाला अपना प्रभाव खो देता है
क्योंकि लोग उसके उस लहजे के आदी हो जाते हैं
सामने वाले की मंशा को समझने के लिए
उसके लहजे पर ध्यान देना चाहिए,
इससे काफी संकेत मिल जाते हैं 
सामने वाले के अनुसार अपने लहजे में बदलाव लाने वाला एक अच्छा संप्रेषक बन सकता है
और वांछित कामयाबी पा सकता है 
इसलिए अपने लहजे पर नियंत्रण कीजिये। 

@मन्यु आत्रेय

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