भगवान शिव हमें ज़िंदगी के कई नियम सिखाते हैं। ऐसी कई बातें हैं जो हम सिर्फ़ और सिर्फ़ भगवान शिव से सीख सकते हैं। भगवान शिव स्वयंभू हैं यानी उन्हें किसी ने नहीं बनाया। आदमी को स्वयं अपना निर्माण करना चाहिये। भगवान शिव में अपरिमित शक्ति है परंतु वे उसका कभी अनावश्यक प्रदर्शन नहीं करते हैं। हमें अपनी क्षमताओं, अपने गुणों और अपनी शक्तियों का कभी अनावश्यक प्रदर्शन नहीं करना चाहिये।
भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाने के कारण आशुतोष कहलाते हैं, आदमी को थोड़े में खुश हो जाना चाहिये। शिव निरंतर आत्म लीन रहते हैं। व्यक्ति को शिखर पर पहुंचकर अपने आप को नहीं भूलना चाहिये। शिव का क्रोध कल्याणकारी है और अपने क्रोध से उत्पन्न परिणाम को बदलने की भी उनकी क्षमता है। आदमी का क्रोध रचनात्मक और सार्थक होना चाहिये, किसी का भला करने वाला होना चाहिये। शिव अभयदान देने वाले हैं। शरणागत वत्सल हैं। अपने प्रिय भक्तों की रक्षा के लिये वे यमराज तक से लड़ सकते हैं। इंसान को किसी के लिये पूरी सच्चाई और अपनी पूरी क्षमता से प्रयास करने चाहिये।
शिव निष्ठावान हैं। शिव का चरित्र अत्यंत उज्ज्वल है। साक्षात कामदेव और रति भी उनके मन को विचलित नहीं कर पाये। आदमी को अपने चरित्र पर दृढ़ रहना चाहिये, सांसारिक आकर्षणों में घिर कर अपनी साधना, अपने संकल्प को भंग नहीं करना चाहिये, फ़िसलना नहीं चाहिये।
शिव ने अत्यंत वेगवती गंगा को अपनी जटाओं में और चंद्रमा को अपने शीश पर स्थान दिया है, इंसान को सभी को यथोचित सम्मान और स्थान देना चाहिये। शिव ने बैल को अपना वाहन बनाया है, भूत प्रेत उनके अनुचर हैं, विषधर सर्प को अपने गले में धारण रखते हैं, समाज के वंचित, शोषित और उपेक्षित लोगों को अपने साथ लीजिये। आलोचना करने वालों को भी अपने गले लगाईये क्योंकि वे आपको शक्ति पाने के लिये तैयार करते हैं।
शिव श्मशान में रहते हैं और चिता की राख को अपनी देह में लपेटे रहते हैं। इंसान को यह मानना चाहिये कि सारी दुनिया मृत्यु शैया है, हम सब क्षण क्षण में मरते जा रहे हैं, इसलिये हर एक क्षण को आनंद में जीना चाहिये, मृत्यु से डरना नहीं चाहिये तभी अपने अमर स्वरूप को जाना जा सकता है।
शिव मितभाषी हैं, उनकी वाणी गंभीर और प्रभावोत्पादक है। आदमी को कम बोलना चाहिये परंतु सार्थक और प्रभावशाली बोलना चाहिये। समुद्र मंथन में निकले हलाहल को जब कोई और ग्रहण नहीं कर पाया तो भगवान शिव ने उसे स्वयं अपने कंठ में स्थान दिया और नीलकंठ महादेव बन गये। जीवन में कई बार आपको परिस्थितियों का विष झेलना पड़ेगा। उसे उगलना नहीं है उसे निगलना नहीं है, तभी वही आपकी महानता का प्रमाण और गंभीरता का स्रोत बनेगा। शिव वैद्यनाथ हैं वे हर एक जड़ी बूटी की क्षमताओं से परिचित हैं, इंसान को पता होना चाहिये कि उसके परितः जो कुछ भी है वह किसी न किसी काम का है।
शिव तांडव नृत्य जानते हैं और डमरू भी बजाते हैं, आदमी को कलाओं में भी प्रवीण होना चाहिए।
सारे संसार के स्वामी भगवान शिव परिवार को बहुत महत्व देते हैं। आदमी को अपने परिवार को पर्याप्त समय और ध्यान देना चाहिये। सर्वश्रेष्ठ प्रेमी शिव अपनी शक्ति को अर्धांंग में धारण करते हैं। व्यक्ति को अपने जीवन साथी के साथ अनन्यता स्थापित करनी चाहिये। शिव परिवार में विरोधाभासों का बेहतरीन मेल है। व्याघ्र और बैल, मोर और चूहा, सर्प आदि परस्पर शत्रु होने के बावजूद शांतिपूर्ण सह अस्तित्व रखते हैं। अपने परिवार और कार्यस्थल में परस्पर विरोधी विचारधाराओं के बीच तालमेल और सह अस्तित्व बनाये रखने से ही शांति रहती है।शिव काली का क्रोध शांत करने उनके चरणों तले भी आ जाते हैं। शांति की स्थापना के लिए स्वयं को प्रस्तुत कर देना चाहिए।
भगवान शिव बहुत सरल हैं इसीलिये तो उन्हें भोले बाबा कहा जाता है। सरलता में ईश्वर निवास करते हैं। इंसान को ज़्यादा जटिल नहीं होना चाहिये, सरल ज़िंदगी जीना सबसे अच्छा है। इसलिये शिवं भूत्वा शिवं यजेत् को हमेशा याद रखें यानी शिव जैसे बनकर ही शिव की उपासना कीजिये।
@ मन्यु आत्रेय
Har-Har Mahadev
ReplyDelete🙏🏻ऊँ आदि योगिश्वराय नम:🙏🏻
ReplyDeleteओम नमः शिवाय 🙏
ReplyDeleteॐ नमः शिवाय
ReplyDeleteश्री मान जी शुभ प्रभात, महाशिवरात्रि की आपको सपरिवार बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें, शास्वतम शिवं अच्युतं।
ReplyDeleteबहुत ख़ूब ,,,,जय महादेव 🙏🙏
ReplyDeleteओम नमो शिवाय
ReplyDeleteजय हो....💐
ReplyDeleteजय हो...💐
ReplyDeleteSundar vivaran.. 🙏🏻🙏🏻
ReplyDelete"शिव ही सुंदर है"🌸🌸🌸🙏
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