आपकी सुविधा, सफलता और सुरक्षा काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करती है
कि आपके साथ के लोग कितने ज़िम्मेदार हैं।
ज़िम्मेदारी उठाना एक अहम बात है।
बहुत से लोग सुविधायें, सफलतायें पूरी पाना चाहते हैं
पूरी सुरक्षा में रहना चाहते हैं लेकिन उसके प्रति अपना दायित्व नहीं निभाते।
जिम्मेदार बनने का सीधा सा अर्थ है
जब जो करना चाहिये उन्हें वो करना होगा
और जब जो नहीं करना चाहिये वो उन्हें नहीं करना होगा।
हर आदमी को अपनी भूमिका को समझते हुए अपना योगदान देना चाहिये,
समय के तक़ाजे़ को समझना ज़रूरी है।
कुछ लोग आदतन लापरवाह होते हैं, या छद्म रूप से गैर ज़िम्मेदार होते हैं
कि आपके साथ के लोग कितने ज़िम्मेदार हैं।
ज़िम्मेदारी उठाना एक अहम बात है।
बहुत से लोग सुविधायें, सफलतायें पूरी पाना चाहते हैं
पूरी सुरक्षा में रहना चाहते हैं लेकिन उसके प्रति अपना दायित्व नहीं निभाते।
जिम्मेदार बनने का सीधा सा अर्थ है
जब जो करना चाहिये उन्हें वो करना होगा
और जब जो नहीं करना चाहिये वो उन्हें नहीं करना होगा।
हर आदमी को अपनी भूमिका को समझते हुए अपना योगदान देना चाहिये,
समय के तक़ाजे़ को समझना ज़रूरी है।
कुछ लोग आदतन लापरवाह होते हैं, या छद्म रूप से गैर ज़िम्मेदार होते हैं
उन्हें समय रहते पहचान लेना चाहिये
और किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिये उन पर एकदम से निर्भर नहीं होना चाहिये,
और किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिये उन पर एकदम से निर्भर नहीं होना चाहिये,
अन्यथा बड़ा धोखा हो सकता है।
नाव को दिशा देने और खेने वाली पतवार कितनी ही मज़बूत हो,
बड़ी से बड़ी नाव का एक छेद उसे डुबो देता है।
लोग तब तक जिम्मेदार नहीं होते जब तक कि कोई काम खास उन्हें ही सौंपा गया न हो।
लोगों को पहले छोटी छोटी ज़िम्मेदारी सौंपनी चाहिये,
सौंपने से पहले उन्हें अच्छे से समझा देना चाहिये कि उन्हें क्या, कब और कैसे करना है।
उन्हें उनकी भूमिका का महत्व अच्छे से समझा देना चाहिये
ताकि उनके चित्त में वह बात बनी रहे कि इस काम को ऐसे करना है।
बीच बीच में उनसे पूछना चाहिये कि काम की प्रगति कैसी है,
या फिर उन पर गुप्त रूप से निगाह रखनी चाहिये।
यदि उन्हें कोई दिक्क़त हो रही हो तो उसके समाधान में उनकी मदद करनी चाहिये,
परंतु मुख्य काम उन्हीं को करने देना चाहिये,
इससे उनकी क्षमता बढ़ेगी और उनमें ज़िम्मेदारी की भावना पैदा होगी।
लोगों को ज़िम्मेदार बनाने के लिये दंड और पुरस्कार की नीति अपनाई जा सकती है।
जब भी कोई ज़िम्मेदारी से काम करे तो उसकी सराहना कीजिये,
उसके काम में सुधार हेतु मदद और सुझाव कीजिये,
वहीं जब कोई लापरवाही कर दे तो उसे ग़लती सुधारने का मौक़ा दीजिये
और उसे समझाईये कि लापरवाही से हानि हो सकती है।
किसी दूसरे को उसकी हंसी न उड़ाने दीजिये।
बार बार ग़ैर ज़िम्मेदारी प्रदर्शित करने वाले को महत्वपूर्ण कार्य से हटा दीजिये
और उसको दूसरे कामों में ज़िम्मेदारी दीजिये जिसमें उसकी रूचि हो जिसमें वो अच्छा हो।
जब सब लोग अपनी अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं
नाव को दिशा देने और खेने वाली पतवार कितनी ही मज़बूत हो,
बड़ी से बड़ी नाव का एक छेद उसे डुबो देता है।
लोग तब तक जिम्मेदार नहीं होते जब तक कि कोई काम खास उन्हें ही सौंपा गया न हो।
लोगों को पहले छोटी छोटी ज़िम्मेदारी सौंपनी चाहिये,
सौंपने से पहले उन्हें अच्छे से समझा देना चाहिये कि उन्हें क्या, कब और कैसे करना है।
उन्हें उनकी भूमिका का महत्व अच्छे से समझा देना चाहिये
ताकि उनके चित्त में वह बात बनी रहे कि इस काम को ऐसे करना है।
बीच बीच में उनसे पूछना चाहिये कि काम की प्रगति कैसी है,
या फिर उन पर गुप्त रूप से निगाह रखनी चाहिये।
यदि उन्हें कोई दिक्क़त हो रही हो तो उसके समाधान में उनकी मदद करनी चाहिये,
परंतु मुख्य काम उन्हीं को करने देना चाहिये,
इससे उनकी क्षमता बढ़ेगी और उनमें ज़िम्मेदारी की भावना पैदा होगी।
लोगों को ज़िम्मेदार बनाने के लिये दंड और पुरस्कार की नीति अपनाई जा सकती है।
जब भी कोई ज़िम्मेदारी से काम करे तो उसकी सराहना कीजिये,
उसके काम में सुधार हेतु मदद और सुझाव कीजिये,
वहीं जब कोई लापरवाही कर दे तो उसे ग़लती सुधारने का मौक़ा दीजिये
और उसे समझाईये कि लापरवाही से हानि हो सकती है।
किसी दूसरे को उसकी हंसी न उड़ाने दीजिये।
बार बार ग़ैर ज़िम्मेदारी प्रदर्शित करने वाले को महत्वपूर्ण कार्य से हटा दीजिये
और उसको दूसरे कामों में ज़िम्मेदारी दीजिये जिसमें उसकी रूचि हो जिसमें वो अच्छा हो।
जब सब लोग अपनी अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं
तो टीम की भावना मज़बूत होती है, जिसका फ़ायदा सभी को होता है।
जब आपके लोग ज़िम्मेदार होते हैं तो आपके लिये सुविधा बढ़ती है,
आपके घर पर अव्यवस्था नहीं होती, रात को दरवाज़ा खुला नहीं छूट जाता,
गैस पर चढ़ा हुआ दूध उफनकर गिरता नहीं,
जब आपके लोग ज़िम्मेदार होते हैं तो आपके लिये सुविधा बढ़ती है,
आपके घर पर अव्यवस्था नहीं होती, रात को दरवाज़ा खुला नहीं छूट जाता,
गैस पर चढ़ा हुआ दूध उफनकर गिरता नहीं,
रसोई गैस खत्म होने से पहले ही गैस बुकिंग हो जाती है।
ऑफिस में आपके काम समय पर पूरे होते हैं, लोगों के काम में गंभीरता बढ़ती है,
चूकें कम होती हैं, माहौल अच्छा होता है और काम में गति आती है।
लोगों को ज़िम्मेदार बनाना उनकी क्षमता बढ़ाना है,
आपके लोगों की क्षमता बढ़ने का अर्थ है आपकी खुद की क्षमता बढ़ना।
ऑफिस में आपके काम समय पर पूरे होते हैं, लोगों के काम में गंभीरता बढ़ती है,
चूकें कम होती हैं, माहौल अच्छा होता है और काम में गति आती है।
लोगों को ज़िम्मेदार बनाना उनकी क्षमता बढ़ाना है,
आपके लोगों की क्षमता बढ़ने का अर्थ है आपकी खुद की क्षमता बढ़ना।
@मन्यु आत्रेय
👌👌💐💐
ReplyDeleteअनुकरणीय है सर
ReplyDelete👌👌🙏👍💐
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