किसी प्रिय, किसी अपने, किसी अहम व्यक्ति को
जीते जी खोना बहुत तकलीफ़देह होता है,
हमें जिनके बारे में यह लगता है कि इसके साथ ज़िन्दगी भर का जुड़ाव है,
वो हाथ छुड़ा जाता है दूर हो जाता है
आखिर क्यों खो देते हैं हम लोगों को?
सच तो ये है कि कोई भी एक पल में दूर नहीं जाता।
हम सामने वाले की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाते
उसे उतना प्रेम, भरोसा, सहयोग, समय और सम्मान नहीं दे पाते
जितना उसकी मानसिक और भावनात्मक ज़रूरत थी
सिर्फ ये नहीं कि हमने उसकी अपेक्षाएं पूरी नहीं की,
हमने उसे कई बार जाने अनजाने में बुरा महसूस कराया होता है
उसकी उपेक्षा की होती है, उसे लगातार ठुकराए जाने का अहसास दिया होता है
उसे वक़्त नहीं देते, देते भी हैं तो पूरे मन से उसके साथ नहीं होते,
उसकी पसंद, उसकी राय, उसकी इच्छा, उसकी जरूरत के बारे में
या तो हम सोचना ही भूल जाते हैं, या जान कर भी महत्व नहीं देते
हम सामने वाले को हल्के में ले लेते हैं
हम उसके लिए ऐसा कुछ नहीं कर पाते जो उसके व्यक्तित्व को पूरा करे, तृप्त करे।
उसकी परवाह दिखाते हुए हम बहुत ज़्यादा नियंत्रण करने लग जाते हैं
उसे अपने काबू में रखते हैं परवाह के रेशमी कपड़े में दबोच के उसे कुचल देते हैं
कभी कभी हमारे व्यवहार, व्यक्तित्व और विचारों से हम ये दर्शा बैठते हैं
कि हमें उसकी रत्ती भर परवाह नहीं है
हम दुनिया की दूसरी सभी बातों को उस पर ज़्यादा महत्व देते हैं
वो कहीं पीछे छूटा हुआ सा महसूस करते हैं
जब उन्हें यह पता चलता है कि हम उनके साथ धोखा कर रहे हैं
जब उन्हें ये समझता है कि हम तो बस उनका शोषण और इस्तेमाल कर रहे हैं
तो उन्हें धक्का लगना स्वाभाविक है
संबंध के शुरू में आपने उन्हें शिखर दिखाया होता है और फिर धीरे धीरे
धरातल पर आ जाते हैं, उसके बाद रसातल में चले जाते हैं
जितना वो मानते हैं उतना कुछ भी हमारे पास उनके लिए नहीं है
जब उपेक्षा, अपमान, वंचना और धोखा सहना उनके लिए मुश्किल हो जाता है
तो लोग हमसे दूर हो जाते हैं
हमेशा हम ही गलत होते हैं ऐसा नहीं है
कई बार सामने वाला हमसे तब दूरी बना लेता है जब उसकी दाल नहीं गलती,
उसके मनोरथ उसके स्वार्थ पूरे नहीं होते या इसे भरोसा हो जाता है कि पूरे नहीं होंगे
कुछ लोग मूडी होते हैं आपके जीवन मे आते हैं जाते हैं फिर आते हैं फिर जाते हैं
कई लोग आपसे दूर तो हो जाते हैं पर दूर जा नहीं पाते,
किसी न किसी वजह से किसी न किसी वास्ते के चलते वो आपको छोड़ते नहीं हैं
पर इतना ज़रूर होता है कि आप उनकी ज़िन्दगी में अपना स्थान खो देते हैं
आपका रिश्ता उस बंदरिया के समान हो जाता है
जो अपने मृत बच्चे को छाती से लगाए फिरती रहती है
जो लोग आपके लिए महत्वपूर्ण हैं उनकी कीमत समझिए।
शांति से सोचिए कि मैं अगर सामने वाले की जगह होता
और कोई मुझसे ठीक वैसा व्यवहार करे जैसा मैं इसके साथ कर रहा हूँ
तो मैं क्या करता!! शायद आप भी छोड़ जाते!!
तो वक़्त रहते चेत जाइये और लोगों को मत खोइए।
किसी अपने को खो देने से दुखद कुछ नहीं, उसे खो देना ही अपने आप में एक सज़ा है!!
@ मन्यु आत्रेय
Very true💐💐
ReplyDeleteVery correct reason s sir...it was long term actions like slow poison u bind in words soooooooooo rhythmic n beautifully....wow practical lines sir..
ReplyDeleteIt covers every reason of any relation.
Kabhi kabhi ham logo ki life se door ho jaate hai kyoki lagta gai ki aapki kadar nahi ho rahi...
ReplyDelete👌🙏👍💐💐
ReplyDeletevery nice ...sir ji
ReplyDeleteBilkul sach baat kahi sir👌👌👍👍👍💐💐
ReplyDeleteVery true....after reading these lines..Think again for treating any relationship
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