मुझे पूरा यकीन है कि हममें से अधिकांश लोगों के पास कोई न कोई ऐसी चीज़ ज़रूर होगी
जो बरसो पहले किसी ने उपहार में दी थी,
और आपने उसे बेहद संभालकर रखा है
उपहारों की भाषा बेहद दिलकश, मीठी और सरल होती है
जो एक अनपढ़ से लेकर उच्च शिक्षित तक
और एक बच्चे से लेकर मृत्युशैया पर लेटे बूढ़े तक
सब को आसानी से समझ में आ जाती है
उपहार किसे पसंद नहीं होते।
आपका उपहार सामने वाले के लिए आपकी ओर से एक अभिव्यक्ति होता है
वह जितनी बेहतर और सुरुचिपूर्ण हो उतना असरकारी होती है
और सामने वाला आपके उपहार के प्रति कैसा रुख रखता है,
वह उसकी आपकी अभिव्यक्ति के लिए प्रतिक्रिया होती है
कुछ उपहार दिखाई देते हैं जैसे वस्तुएं, जो खरीदे जा सकते हैं
कुछ उपहार दिखाई नहीं देते, जिन्हें खरीदा नहीं जा सकता
जैसे प्रेम, भरोसा, परवाह, समय और अपनापन।
उपहार के पीछे गहरा मनोविज्ञान छुपा है, उपहार पाने वाले में पाने का सुख
और उपहार देने वाले को देने का सुख !
उपहार आदमी को ख़ास होने का अहसास कराते हैं,
आदमी को अच्छा लगता है कि किसी ने उसके बारे में सोचा।
उपहार बताते हैं कि आपने किसी विशेष मौके को याद रखा,
आपने उपहार पसंद करने और लाने में समय खर्च किया,
कोई अवसर होने पर उपहार तो सभी देते हैं लेकिन आप किसी को बिना अवसर के उपहार देकर देखिए
बिना किसी मौके के उसे महत्वपूर्ण होने का अनुभव कराइये
सामने वाले की ज़रूरत या पसन्दगी या इच्छा के अनुसार जब आप कोई उपहार देते हैं तो वो फूला नहीं समाता,और उसके दिल में आपके लिए जगह बन जाती है
आप सामने वाले को अपने उपहार से सुखद आश्चर्य में भी डाल सकते हैं
उपहार हमेशा कोई महंगी चीज़ ही हो ऐसा ज़रूरी नहीं, बस आपकी और सामने वाले की गरिमा के अनुकूल होना चाहिए
आप दोनों के संबंधों की गहराई के अनुपात में होना चाहिए
जहाँ आत्मीयता होती है वहाँ उपहार की कीमत नहीं देखी जाती
उपहार देने वाले की भावना और उसकी लगन देखी जाती है,
कीमत कम होने पर भी कुछ उपहार बेशक़ीमती हो जाते हैं
आप अपनी निष्ठा, अपना बिना शर्त साथ, विश्वास और उम्र भर का प्रेम भी उपहार में दे सकते हैं
हो सकता है कि जिसे आप बहुत मन से बहुत भावना से उपहार दें,
परंतु वो उसकी कद्र न करे, संभाल कर न रखे,उसे इस्तेमाल न करे और कहीं कोने में पटक दे
इससे वो अपनी भावना और आपकी कीमत का संकेत कर देता है
पर ऐसा मान कर मत चलिए कि वो सारी ज़िन्दगी आपके उपहार का ही इस्तेमाल करता रहेगा
लोग एक सीमा तक ही परवाह करते हैं
और चीज़े बदल बदल कर इस्तेमाल करते हैं ये नैसर्गिक है
और जिसे आपकी परवाह होगी वो आपके उपहार की भी बहुत परवाह करेगा
इसलिए अपने लोगों को खास अनुभव कराइये, और उनसे उपहारों की भाषा में बात कीजिये!
@मन्यु आत्रेय
क्या बात है 🙏
ReplyDeleteसूंदर लेख सर् जी
ReplyDelete👌👌👌💐💐💐
ReplyDeleteSo beautifully written sir👌👌💐💐💐
ReplyDeleteAbsolutely correct👌🏼
ReplyDeleteAmazing really Sir..
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