body {-webkit-user-select:none; -html-user-select:none; -moz-user-select:none; -ms-user-select:none; user-select:none;}

Thursday, 18 March 2021

मज़ाक़ करो,हंसी न उड़ाओ !!

कई लोग हंसी उड़ाने और मज़ाक़ करने का अंतर समझ नहीं पाते
मज़ाक़ यानी विनोद करना हंसी उड़ाने यानी उपहास करने से अलग है
इसे जितनी जल्दी समझ जाएंगे उतनी जल्दी अपने संबंधों को 
खराब होने से बचा पाएंगे, मज़बूत कर पाएंगे। 
हास्य विनोद में किसी को बुरा नहीं लगता, बल्कि अच्छा ही लगता है
जबकि हंसी उड़ाने में सिर्फ हंसी उड़ाने वाले को ही अच्छा लगता है 
जिसके बारे में हंसी उड़ाई जा रही है उसे खराब लगता है 
यही एक पहलू एक मज़ाक़ को हंसी उड़ाना बना देता है। 
बहुत से लोग अपनी कमी,कमज़ोरी, गलती,चूक या खामी को लेकर 
अपने शरीर, अपने कपड़ों,अपनी सामाजिक या आर्थिक स्थिति को लेकर,
या अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी बातों को लेकर मज़ाक़ किया जाना पसंद नहीं करते
उन्हें इसमे अपमान लगता है या कष्ट पहुंचता है 
पर उसकी हंसी उड़ाने वाले लोगों को वह एक मज़ाक़ की विषय वस्तु लगता है
सामान्य सा विनोद कब व्यंग्य की तरह चुभता है 
और कब हंसी उड़ाना बन जाता है 
यह सामने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है
हर आदमी एक ही बात को हर समय एक समान तरीके से स्वीकार नहीं कर सकता 
सामने वाले की अपनी मनोदशा होती है,
उसकी अपनी मानसिक अवस्था होती है, अपनी परेशानियां होती हैं
जिस समय किसी को राहत के दो शब्दों की ज़रूरत हो और कोई उससे 
उन्हीं बातों को लेकर हंसी ठिठोली करने लगे तो वही भारी पड़ जाता है
हंसी मजाक कभी मीठी टॉफ़ी होता है तो कभी करेले का कड़वा रस। 
लोगों में दूरियां बढ़ने का एक प्रमुख कारण यह भी होता है 
कि वो एक दूसरे की मनोदशा और भावात्मक स्थिति की फिक्र किये बिना ही 
मज़ाक़ करते हैं या हंसी उड़ाते हैं
सहज हास्य जीवन को हल्का बनाता है लेकिन हंसी उड़ाना भीतर से घायल कर देता है 
हास्य मलहम है उपहास नश्तर।
हो सकता है आपकी स्थिति और आपसे संबंधों का विचार करके 
वो व्यक्ति आपको कोई कड़ा प्रत्युत्तर न दे और हंस के टाल दे, 
लेकिन उसके मन में आप के प्रति एक गांठ पड़ जाती है, 
जब जब आप उसकी हंसी उड़ाते हैं वो गांठ और कड़ी होती जाती है 
और आपके सम्बंध का गला घोंट देती है जिसका खामियाजा भुगतना पड़ता है,
दुर्योधन को अंधे का पुत्र अंधा कह कर खिल्ली उड़ाने वाली द्रोपदी को 
भरी सभा मे निर्वस्त्र होने की नौबत आ गयी थी
हंसी मज़ाक़ 'करना' अच्छा है पर 'उड़ाना' बुरा है खिल्ली उड़ाना तो और भी बुरा है
लोग हंसी मज़ाक़ करने वाले को पसंद करते हैं हंसी उड़ाने वाले को नहीं! 
अगली बार जब कभी आपका मन किसी से मज़ाक़ करने को हो तो एक बार यह विचार मन मे अवश्य ले आना
कि ऐसा ही मज़ाक़ ऐसी ही परिस्थिति में कोई मेरे साथ करेगा 
तो क्या मैं उसे सहन कर पाऊंगा?
फिर भी यदि आप मज़ाक़ करना ही चाहते हैं तो सामने वाले के चेहरे के हाव भाव, उसकी देह भाषा और उसके शब्दों को 
बारीकी से देखिए समझिए और उसके अनुसार आगे बढिये
अगर आप किसी पर कीचड़ उछालेंगे तो आप भी कीचड़ उछाला जाएगा इसके लिए तैयार रहिए। 

@ मन्यु आत्रेय

4 comments:

  1. Better thing for strong relationship 💐💐

    ReplyDelete
  2. आदमी और समय को ध्यान में रखकर ही मजाक करना चाहिए 👍👍

    ReplyDelete
  3. Sahi baat hai sir 👍👍👍🌷🌷🌷

    ReplyDelete

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा   आज मैं एक संकल्प के साथ उठता हूँ— मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा।  कल की स्मृतियाँ और कल की चिंताएँ द...