कुछ लोगों की आदत होती है किसी को हमेशा डांटते डपटते रहने की,
आते जाते कारण अकारण बस कोई न कोई चुभती हुई बात कहने की,
आपका बेटा मोबाइल देख रहा होता है और आप उसे उसके भविष्य के बर्बाद होने
और पिछड़ जाने पर भाषण पिला देते हैं
आपके जीवन साथी से कोई चूक होती है और आप बेवजह
आने वाले कई दिनों तक उसे सुनाते रहते हैं,
आपके कार्यस्थल पर आपका कोई साथी या अधीनस्थ कोई काम
आपके निर्देश या मानक के अनुसार नहीं करता और आप
उस पर चढ़े रहते हैं उलाहना देते हैं, उसकी क्षमता पर प्रश्न चिन्ह लगा देते हैं
आप मौके तलाशते रहते हैं कि कैसे किसी को सुनाया जाए।
लताड़ लगाना, अपमानित करना, नीचा दिखाना, व्यंग्य वक्रोक्ति करना, डांटना
कुछ लोगों का सबसे पसंदीदा खेल होता है
पर वो ये नहीं सोचते कि सामने वाले को इससे
कितनी ज़्यादा तकलीफ पहुंचती होगी
वो कितना दमित महसूस करता होगा?
वो कितना घुटता होगा, आपके प्रति कितना नकारात्मक हो जाता होगा!
कोई फायदा नहीं है ऐसे किसी को भी डांटने, लताड़ने में।
कोई आपकी बात तब मानता है जब आप प्रभावशाली तरीके से उसे कहें
न कि सिर्फ हड़काते हुए, या डराते धमकाते हुए, या उग्र निंदा के तरीके से ।
जब आप एक बार इस राह पर चलना चालू करते हैं तो फिर चलते ही जाते हैं
और अपने लोगों से दूर होते जाते हैं
आपकी आदत हो जाती है फिर आपके व्यक्तित्व की पहचान बन जाती है
कोई भी एक ही दिन में खडूस नहीं बन जाता, ऐसे ही धीरे धीरे लगातार ऐसी हरकतें करने से ही एक खडूस तैयार होता है
और कोई भी खडूस को पसंद नहीं करता।
आपको जब स्थिति अपने नियंत्रण से बाहर जाती दिखती है आप ऐसी प्रतिक्रिया देते हैं
या आप सामने वाले को लेकर इस हद तक चिंतित दिखना चाहते हैं
ताकि कल को कोई आप को ज़िम्मेदार न ठहरा सके
दरअसल आपने पहले उसे पर्याप्त समय ही नहीं दिया होता,
और स्थिति पर अपना नियंत्रण बचाने आप हड़बड़ा कर ऐसे दबाव बनाते हैं ।
आपका ये खेल सिर्फ तब तक ही चलेगा जब तक सामने वाला
आपको पलट के जवाब नहीं दे देता, या आपकी उपेक्षा करना चालू नहीं कर देता
दोनो ही दशाओं में आपका दिया अपमान वापस घूम कर आप तक ही पहुंचता है
और ऐसा नहीं है कि लोग आपके इस कृत्य की बहुत सराहना करेंगे
क्योंकि लोग जानते हैं कि असल में जो जितना कमज़ोर होता है
वो उतना ज्यादा नकारात्मकता फैलाता है
आपकी छवि एक नकारात्मक आदमी की बनने लगती है,
लोग आपसे दूर भागने लगते हैं, आपसे कुछ भी साझा नहीं करते,
कुछ चीजें जो बिगड़ जाती हैं तो कभी पहले जैसी सुंदर नहीं हो पाती,
लोगों को लताड़िये मत, दुत्कारिये मत।
समझाने, डांटने के दूसरे प्रभावशाली तरीके खोजिए।
@मन्यु आत्रेय
बहुत अच्छा लेख सर् जी
ReplyDeleteNecessary quality for a team leader.
ReplyDeleteश्री मान जी शुभ प्रभात बहुत ही अच्छा लेख है
ReplyDelete👌👌🙏🙏💐💐
ReplyDeleteBahut sahi...bahut khoob lekh sir👌👌👌🌷🌷🌷🙏🙏
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