संकट, विपत्ति और आपदा ऐसे शब्द हैं जिन्हें शायद ही कोई पसंद करे,
लेकिन इनका आना सभी के जीवन में अनिवार्य होता है,
चाहे छोटे रूप में चाहे बड़े रूप में।
जीवन की तल्ख सच्चाइयों से हमारा परिचय हम पर आने वाले संकट ही तो कराते हैं,
आपदाएं ही तो हमसे जुड़े लोगों की असली पहचान हमें कराती हैं
विपत्ति ही तो हमें उन लोगों का असली चेहरा दिखाती हैं
जो हमारे अच्छे समय में हमारे हितैषी होने का दम भरते थे।
संकट अक्सर गुप्त दुश्मनों की भी पहचान करा देता है
संकट हमारे हौसले को परखते हैं, विपत्तियां हमारे संघर्ष करने की क्षमता को जांचती हैं।
आपदाएं हमें तैयार रहना सिखाती हैं ।
हम घबराते सिर्फ इसलिए हैं क्योंकि हमने पहले कभी ऐसी स्थितियों का सामना नहीं किया होता,
हमें मालूम नहीं होता कि इस स्थिति से बाहर कैसे निकला जा सकता है?
जब हम इसमें फंस जाते हैं तो धीरे धीरे स्थिति परिस्थितियां हमे समझ आने लगती हैं
और अगर हम थोड़ा सा नियंत्रण अपनी भावुकता पर रख कर
अपनी तार्किक बुद्धि और अपनी अनुभूति को जोड़ कर सोचते हैं
तो हमें वैकल्पिक रास्ते सूझने लगते हैं।
दुनिया के बड़े से बड़े संकट को एक दिन बीत जाना पड़ता है
बड़े से बड़े तूफान में यदि आपने अपने पैर जमाये रखे हैं तो आप बच सकते हैं
संकट की सबसे बड़ी खासियत ये होती है कि यह आपका परिचय
आपकी ऐसी विशेषताओं से कराता है जिनके बारे में आप पहले जागरूक नहीं थे।
संकट में अगर हमारे लोग हमें छोड़ जाते हैं तो कुछ नए लोग हमारी मदद करने आते ही हैं
विपत्ति अगर हमारा कुछ छीन लेती है, और हम बच जाते हैं
तो खोया हुआ सब कुछ दोबारा हासिल करने की हिम्मत हमें मिल सकती है,
कई बार आपदाएं हमें कई ऐसे गैर ज़रूरी मामलों से बचा लेती हैं
जिसमे हम व्यर्थ का उलझे हुए थे,
हमें अपनी असली प्राथमिकताएं संकट के समय ही समझ आती हैं।
संकट आपकी जिजीविषा से आपका परिचय कराते हैं
आपको नई चीजें सिखाते हैं, नई जगहें दिखाते हैं,
अगर विपत्ति आपकी जड़ों को उखाड़ भी दे तो भी इसकी संभावना बची रहती है
कि आप किसी नई जगह पर अपनी जड़ें फिर जमा सकें।
संकट, विपत्ति या आपदा को अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए
तो वह खुद आगे बढ़ने का रास्ता बनाते हैं, आपकी नई सफलता की नींव बन सकते हैं।
जिस आदमी को लगातार छोटे छोटे संकटों, विपत्तियों का सामना करना पड़ता है
वह उस आदमी की तुलना में कहीं ज़्यादा ताकतवर हो जाता है
जिसने कभी किसी संकट, किसी विपत्ति का सामना नहीं किया
क्योंकि संकट हमारे मस्तिष्क को लड़ने की कला सिखाते हैं ।
जिस संकट को आप पहले झेल चुके होते हैं, दोबारा उसके आने पर आप उतना घबराते नहीं
क्योंकि आप जानते हैं इससे कैसे पार जाना है।
जब कभी कोई संकट आये तो धैर्य और शांति बनाए रखें।
अपनी क्षमताओं की सच्ची समीक्षा कीजिये, सहायता के हर संभव मार्ग खोजिए
कुछ न कुछ खोने की मानसिक तैयारी रखिये
और उस आपदा से भिड़ जाइये।
इस तरह से आप न सिर्फ उस संकट से उबर सकते हैं
बल्कि आपदा में छुपे हुए अवसर भी तलाश सकते हैं।
@ मन्यु आत्रेय
👌👌👍💐💐🙏
ReplyDeleteReally nice👌👌👌💐💐💐
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