body {-webkit-user-select:none; -html-user-select:none; -moz-user-select:none; -ms-user-select:none; user-select:none;}

Friday, 26 March 2021

थोड़ा डर होना अच्छा है !

हर प्राणी को कोई न कोई डर होता है। थोड़ी मात्रा में डर अच्छा है। 
जब हम किसी स्थिति और अपनी क्षमता की तुलना करते हैं 
और जब हम खुद को उस परिस्थिति का सामना करने के अक्षम पाते हैं 
तो हममें डर पैदा होता है। 
किसी को अपने पुराने कर्मों से डर लगता है किसी को नई परिस्थितियों से डर लगता है।
थोड़ा डर हमें सजग बनाता है, हमें उस स्थिति का सामना करने की 
अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है। 
थोड़ा सा डर हमें रोमांचित करता है, हमें हालात से निपटना सिखाता है। 
जब हम लोगों को खो देने से डरते हैं तो उनकी कदर और परवाह करने लगते हैं। 
जब हम बीमार पड़ने से डरते हैं तो अपनी सेहत का ध्यान रखने लगते हैं। 
जब हम किसी परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने से डरते हैं तो पढ़ने को प्रेरित होते हैं। 
जब हम गिरने से डरते हैं तो संभलकर चलना प्रारंभ कर देते हैं। 
दुर्घटना हो जाने का डर हमें संभलकर गाड़ी चलाने को प्रेरित करता है। 
काम छूट जाने का डर हमें ज़्यादा अच्छा काम करने 
तथा वैकल्पिक रास्ते खोजने के लिए प्रेरित करता है। 
बदनामी का डर हमें गलत काम करने से रोक लेता है। 
जेल जाने का डर अपराध करने से हमें रोकता है। 
डर आपको असुरक्षित परिस्थितियों में जाने से बचा लेता है। 
जिस चीज़ के प्रति भी आप में थोड़ा डर आ जाता है आप उसे और जानने की कोशिश करते हैं। 
थोड़ा सा डर नकारात्मक अभिप्रेरणा का साधन बन जाता है। 
थोड़ा डर लापरवाही को कम करता है। आप सजग होकर सब कुछ करने लगते हैं। 
कई बार हम निराधार कारणों से ही डरते रहते हैं। 
डर का मूल है सामना नहीं कर पाने की धारणा। 
आप उसी से डरते हैं जिसका सामना नहीं कर सकते। 
जैसे जैसे आप अपने डर की विषय वस्तु के बारे में जानने लगते हैं 
आपका डर कम होने लगता है। 
आपको जिससे भी डर लगे उसके बारे में अपना ज्ञान बढ़ाइए। 
उसका सामना करने की अपनी क्षमता बढ़ाइए। 
डर की ओर से आंखें मूंद लेना आदमी को दुस्साहसी बना देता है
जबकि डर के होते हुए भी हिम्मत का होना साहसी बनाता है। 
डर की उपस्थिति आपके जीवन में नमक जैसी होनी चाहिए,
थोड़ा सा ज़रूरी है जिससे जीवन मे स्वाद बढ़ता है 
परंतु उसी की अधिक मात्रा ब्लड प्रेशर बढ़ा देती है। 
आज एक काम कीजिये, अपने हर एक छोटे बड़े भय की सूची बनाइये। 
उन भयों के कारण लिखिए कि ये भय क्यों है? 
उन भयों के साकार होने की आवश्यक शर्तें और संभावना का प्रतिशत लिखिए। 
उन भयों को बढ़ाने वाले कारकों को लिखना न भूलिए। 
उनसे निपटने के लिए आवश्यक क्षमता या गुणों को भी लिखिए। 
आप अपनी स्थिति को अच्छी तरह से समझ जाएंगे 
और इससे आप अपने गैर जरूरी भय के चंगुल से निकल सकते हैं। 

@ मन्यु आत्रेय

3 comments:

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा   आज मैं एक संकल्प के साथ उठता हूँ— मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा।  कल की स्मृतियाँ और कल की चिंताएँ द...