आपमें बहुत से कौशल हैं। बहुत सी क्षमताएँ हैं। आप दौड़ने का कौशल रखते हैं पर क्या आप एक फर्राटा धावक भी हैं
आप बोलना जानते हैं लेकिन क्या आप एक अच्छे वक्ता हैं
आप कल्पना करना जानते हैं पर क्या उसे चित्रों, कविताओं नए आविष्कारों में ढाल पाते हैं
आप क्रिकेट खेलते हैं तो गली मोहल्ले तक सीमित हैं या रणजी वगैरह खेला है
गाना गाते हैं तो घरेलू बैठकों या बाथरूम सिंगर रहने तक सीमित तो नहीं हैं
आप अक्सर कई चीजों को सिर्फ सीखने भर तक सीखते हैं
लेकिन उनमें निपुणता बढ़ाने का काम नहीं करते
आप उन्हीं में निपुणता अर्जित करते हैं
जिनकी आपको किसी समय ज़रूरत होती है, जिसमें मज़ा आता है,
या जिसमे भविष्य की संभावना देखते हैं
आप जब अपने किसी कौशल पर काम करते हैं, अभ्यास करते हैं,
त्रुटियों से सीखकर खुद में सुधार करते हैं
तो आप अपने कौशल में दक्षता हासिल कर लेते हैं।
कौशल को जानना अलग है और उसमें निपुण और दक्ष हो जाना अलग है।
हम में से अधिकांश लोग बहुत सारे कौशल जानते हैं
परंतु सबकी अपनी अपनी क्षमताएँ होती हैं
और उन्हीं के दायरे में हम अपने कौशल विकसित कर पाते हैं।
अपने आप से पूछिए कि मैं कौन कौन से कौशल जानता हूँ
उनमें मेरी निपुणता और दक्षता कितनी है
यदि मैं कंप्यूटर जानता हूँ तो वह सामान्य ज्ञान है या कोडिंग प्रोग्रामिंग तक जानता हूँ
मैं बॉडी बिल्डिंग जानता हूँ तो वह फिटनेस तक सीमित है या शरीर सौष्ठव तक आगे हूँ।
ब्यूटीशियन का काम घर तक है या व्यावसायिक भी कर सकती हैं? कुकिंग क्या रोजगार के स्तर तक नहीं जा सकती?
किसी भी कौशल में औसत रह जाने से कोई लाभ नहीं
औसत की कोई पहचान नहीं बनती न कोई फायदा होता है
निपुणता और दक्षता आपकी ताक़त बन सकते हैं,
साधारण से लोगों ने अपने कौशल में दक्षता हासिल करके
असाधारण सफलता अर्जित की है
जो कुछ भी आप जानते हैं उसे माँजिये।
उसे जल्दी, बेहतर, कम मेहनत में, आसानी से
और कम खर्च में कैसे किया जा सकता है यह सीखिए
जब आप ये सीख जाएंगे तो आपकी दक्षता बढ़ जाएगी।
जब लोग हमारी श्रेष्ठता के लिए हमारी आवश्यकता महसूस करते है
तो संसार मे हम महत्वपूर्ण हो जाते हैं, बेहतर प्रतिफल हासिल कर सकते हैं
जीवन के आड़े समय में आदमी का कौशल ही कई बार
सम्मानजनक रोजगार बन जाता है
अपने अस्तित्व को अपने काम की दक्षता से पहचान दीजिए,
आज ही तय कीजिये कि मुझे अपने किन कौशलों को दक्षता में तब्दील करना है
याद रखिये
दक्षता से मिली हुई प्रतिष्ठा लंबी चलती है
आप लंबी रेस के घोड़े बनिये, फेरी वाले टट्टू तो लाखों हैं।
@ मन्यु आत्रेय
श्री मान जी शुभ प्रभात, आपका विचार बहुत ही सुंदर और अनुभव से भरा हैं ।
ReplyDeleteDhanyawad
Delete👌👌
ReplyDeleteबहुत सुंदर लेख सर् जी
ReplyDeleteसामान्य से श्रेष्ठ होने का सफ़र कठिन तो है, किंतु श्रेष्ठता का आनंद अद्वितीय है। 👌👌👌💐💐
ReplyDeleteHaan
DeletePrem
शानदार सर
ReplyDeleteThank you satyarth
Deleteशानदार भैया
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteVery motivational sir👌💐🙏
ReplyDeleteThank you
DeleteBahut khoob sir..very positive n motivating 👌👌👌👍👍👍💐💐💐
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