इसलिये जरूरी है कि ताकि ठगे जाने, धोखा खाने, मुश्किलों में पड़ने
और परेशान होने से आप बच सकें।
जो आदमी हिसाब किताब नहीं रखता वो अक्सर अपना नुक़सान करा बैठता है।
वैसे तो प्रकृति ने ही इंसान को हिसाब किताब की क्षमता दी है
जब कभी आप कुछ मापते हैं या तुलना करते हैं या गिनते हैं
या तौलते हैं तो आप हिसाब किताब ही कर रहे होते हैं।
जब आप अपने बच्चे को पढ़ाई नहीं करने के लिये डांटते हैं
तो आप अदृश्य रूप से ये हिसाब लगा चुके होते हैं
कि यह पढ़ाई नहीं करने पर फेल हो जायेगा।
जब आप आप अपने पति को उनकी खान पान
और देर रात तक जागने की आदत को लेकर बार बार टोकती हैं
तो आप ये हिसाब लगा चुकी होती हैं कि इसका उनकी सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
जब आप किसी व्यक्ति से झगड़ा करते हैं कि वो आजकल आपकी ओर ध्यान ही नहीं देता,
तो आप दोनों के बीच बढ़ रही दूरी का हिसाब लगाकर उसे खो देने से डरे हुए होते हैं।
हिसाब किताब करना ज़रूरी है
क्योंकि हिसाब किताब रखने वाला आदमी
सतर्क और जागरूक माना जाता है।
पत्नी जब पति की दिनचर्या का हिसाब किताब रखती है
तो पति इधर उधर भटकने से डरता है।
एक पिता जब अपने बच्चे के गिरते स्वास्थ्य का हिसाब रखता है
तो बच्चे की बुरी आदतें सामने आ जाती हैं।
जब आप अपनी गाड़ी में पेट्रोल भराने और चली गई दूरी का हिसाब करते हैं
तो आपकी गाड़ी में होने वाली पेट्रोल की चोरी सामने आ जाती है।
जब एक प्रेमिका अपने प्रेमी की उपलब्धता का हिसाब किताब रखती है
तो वो समझ जाती है कि वह डबल गेम खेल रहा है।
हर चीज़ का हिसाब रखिये,
खासकर उन बातों का जिनको हम मात्रा या आंकड़ों में तौल नहीं सकते
जिन्हें केवल महसूस करके समझा जा सकता है, क्योंकि असली धोखा यहीं से होता है।
अपने घर परिवार में खर्चों और आमदनी का हिसाब रखने के अलावा
अपने रिश्ते में आपके और सामने वाले के योगदान का हिसाब किताब भी रखिये।
जरा हिसाब लगाईये कि कौन अपनी चिकनी चुपड़ी बातों से
आपसे मनचाहा काम करवा लेता है,
कौन है जो हमेशा आपके साधनों का इस्तेमाल करता है
लेकिन आपके वक्त पर कभी भी वो उपलब्ध नहीं होता?
वो कौन है जो चीजें उधार ले जाकर कभी वापस ही नहीं करता?
वो कौन है जिसे आपकी योजनायें पता चलने के बाद उनमें व्यवधान आना शुरू हो जाता है?
वो कौन है जो आपसे लेता तो भरपूर है परंतु देता बहुत कम है।
आपकी पूरी ज़िंदगी, आपके संसाधन, आपका समय, आपकी भावनायें
ये सब निवेश की तरह है, वहीं लगाईये जहाॅं से सबसे ज़्यादा रिटर्न मिले,
अन्यथा आपका मुद्दल डूबना तय है।
और ये सिर्फ तब संभव होगा जब आप हिसाब किताब रखेंगे।
इस निर्मम दुनिया में बहुतेरे लोग आपको निचोड़ने
और आम की चूसी हुई गुठली की तरह चूस कर दूर फेंकने से परहेज़ नहीं करेंगे,
खुद को बचाने के लिये आपको फंसाने से ज़रा भी नहीं हिचकेंगे,
अपने फायदे के लिये आपको हानि पहुंचाने की पूरी व्यवस्था कर रखेंगे।
ऐसे लोगों के लिये कुछ भी बेहिसाब मत रखिये,
न धन, न समय, न संसाधन, न भावनात्मक सहारा, न भरोसा।
ऐसे लोगों को पहले से ही पहचान कर उन पर दरवाज़े बंद कर देने में ही अक्लमंदी है।
इसलिये हिसाब किताब की तरफ से एकदम आंखें बंद नहीं करना है,
बल्कि सब कुछ अपने दिलो दिमाग में दर्ज करते जाना है
और यह काम एकदम चुपचाप करना है
तथा सिर्फ तभी अपना हिसाब पेश करना है
जब हिसाब मांगा जाये, या कोई बड़ा सवाल खड़ा हो जाये।
ये दुनिया ऐसे खुदगर्ज लोगों से भरी पड़ी है जो कृतघ्न हो जाते हैं,
जो आपके योगदान, आपकी भलाई, आपकी नेकी को
पलक झपकते भूल जाते हैं और पूछ बैठते है कि आपने उनके लिए किया ही क्या है?
हिसाब किताब रखना सामने वाले नहीं अपनी औकात और स्थिति को भी
सही सही बयान कर देता है, हम कहाँ कम पड़ रहे हैं, कहाँ चूक रहे हैं
ये सब हिसाब किताब से समझ आ जाता है।
इसलिए थोड़ा बहुत हिसाब किताब हर बात का रखना ही चाहिए।
@मन्यु आत्रेय
Absolutely correct sir ji...👌🙏💐
ReplyDeleteUseful for lifetime 👌
ReplyDeleteश्री मान जी शुभ प्रभात, आपकी बात हमेशा कुछ न कुछ सिख दे जाता है और आगे की मार्ग प्रसक्त करने की प्रेरणा देता है। प्रत्येक मनुष्य को समय की अनुकूलता का प्रतिक्षा कर अपना कार्य को संपादन करते रहना चाहिए।
ReplyDeleteBahut sundar likha hai sir👌👌👌💐💐
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