एटीट्यूड दिखाने वालों का क्या किया जाये?
@ मन्यु आत्रेय
एटीट्यूड दिखाने वाले लोग अक्सर किसी को पसंद नहीं आते, पता नहीं अजीब सी चिढ़ सी लगती है ऐसे लोगों को देखकर। हम सभी ने कभी न कभी ऐसे लोगों का सामना ज़रूर किया होगा। शायद हम भी किसी की नज़रों में एटीट्यूड दिखाने वाले हो सकते हैं। कभी कभी हम सामने वाले के व्यक्तित्व और व्यवहार को समझ नहीं पाते और उन्हें एटीट्यूड दिखाने वाला समझ कर उनसे कट जाते हैं या उनके बारे में नकारात्मक धारणायें बना लेते हैं।
बचपन में मेरी मित्र मंडली में दो तीन ऐसे दोस्त थे जो आपस मे ज़्यादा कम्फ़र्टेबल थे और हमसे थोड़ी दूरी सी ही बना के रखते थे। हम लोग उनको अकडू मानते थे, वो लोग थोड़ी अच्छी आर्थिक स्थिति वाले थे, वो अच्छे कपड़े पहनते थे, अच्छे खिलौनों से खेलते थे, साफ सुथरे तो हमसे ज्यादा ही रहते थे, और उन पर उनके घर वालों का बड़ा प्रभाव था। आंख के एक इशारे पर हमसे तुरंत दूर हो जाते थे। शायद उनके घरवालों ने उन्हें ये कहा होगा कि दूसरे बच्चों के साथ बहुत घुल मिल कर नहीं खेलना है, थोड़ा दूरी बना के रखना है। बरसो बाद धीरे धीरे ये समझ आया कि वो लोग एटीट्यूड दिखाते थे।
एटीट्यूड दिखाने को कैसे पहचानें?
सरल हृदय लोगों को अक्सर समझ नहीं आता कि सामने वाला एटीट्यूड दिखा रहा है। पहले मैं सोचा करता था कि लोग ऐसे ही होते हैं, जैसा वे व्यवहार करते हैं। मैं लोगेां के एटीट्यूड दिखाने को समझ नहीं पाता था, बाद में जीवन में कई लोगों के व्यवहार को देखकर यह महसूस हुआ कि सामने वाला तो एटीट्यूड दिखा रहा है। एटीट्यूड दिखाना वैसे एक नकारात्मक, अपमानजनक और असहयोगी व्यवहार प्रदर्शित करने को कहते हैं।
हम लोगों के शब्दों, उनकी देह भाषा, उनके हाव भाव से समझ सकते हैं कि कौन एटीट्यूड दिखा रहा है।
इसे कुछ लक्षणों से हम समझ सकते हैं-
1. व्यंग्यात्मक लहज़ा, मज़ाक उड़ाना या तिरस्कारपूर्ण लहज़ा इस्तेमाल करना।
2. अपमानजनक भाषा, गाली-गलौज, अपमान करना
3. टकराव पैदा करने वाली बात या टिप्पणी करना।
4. हाथ बांध कर, कमर पर हाथ रखकर आक्रामक मुद्रा बनाना, तैश दिखाना।
5. आँखें घुमाना या मुँह फेर लेना, मुंह बनाना।
6. भौंहें सिकोड़ना या भौंहें ऊपर उठाना।
7. अतिरिक्त मात्रा में ज़हरीली हंसी हंसना,
8. डायरेक्ट आई कॉन्टैक्ट से बचना या फिर आक्रामक तरीके से देखना।
9. हाथों की चीजा़ें को जोर देकर रखना।
10. देख कर भी नहीं देखना।
11. अनादर करना, दूसरों की राय या भावनाओं को नज़रअंदाज़ या खारिज करना।
12. दूसरों से नीचा दिखाना या ज़बर्दस्ती संरक्षण देने की कोशिश करना।
13. दूसरों पर जिम्मेदारी या दोष मढ़ना
14. दूसरों को उनकी धारणाओं या विवेक पर संदेह करने के लिए प्रेरित करना।
15. आक्रामक या अपमानजनक टिप्पणियॉं या संदेश करना।
क्या सच में वो एटीट्यूड दिखा रहे हैं?
कई बार हम ग़लत समझ जाते हैं। एक व्यक्ति पर हम एटीट्यूड दिखा रहा है का लेबल लगा तो देते हैं जबकि ऐसा होता नहीं है।
1. दरअसल लोगों में सभी के बातचीत की शैली बहुत अलग होती है। अलग अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों की कम्यूनिकेशन स्टाईल अलग अलग होती है। हो सकता है कि हम उनकी शैली को ठीक से समझ नहीं पाये हों।
2. अलग अलग संस्कृतियों में आंखों से देखने के अंदाज़, शारीरिक स्पर्श या कुछ प्रकार के हाव भाव को अनादर करने वाला समझा जा सकता है या फिर मैत्रीपूर्ण। इससे भी धोखा हो सकता है।
3. लोगों के संेस ऑफ़ ह्यूमर यानी हास्य बोध में काफी़ अंतर हो सकता है। इसके चलते ग़लतफ़हमियॉं पैदा हो सकती है। आप उसके सरकाज्म को नहीं समझ पाये तो आप उसे ग़लत समझ सकते हैं।
4. कभी कभी किसी व्यक्ति का एटीट्यूड किसी परिस्थिति का परिणाम होता है जैसे चिंता, संकट या बड़ी चुनौती या समस्या का सामना कर रहे व्यक्ति का व्यवहार थोड़ा बदल जाता है, वो दूसरों से दूरी बना सकता है।
5. डिप्रेशन का शिकार आदमी भी अपने व्यवहार के चलते गलतफहमी का शिकार हो सकता है।
6. जिनका इमोशनल कोशेंट कम होता है वे लोग भी दूसरों को सही तरीके़ से नहीं समझ पाते हैं।
7. कई बार लोगों के पास समय कम होता है, या स्थितियॉं संवेदनशील होती है तो वे सही तरीके से व्यवहार नहीं रख पाते और हमें लगता है कि वो एटीट्यूड दिखा रहा है।
8. हो सकता है कि माहौल ऐसा हो कि हम सामने वाले व्यक्ति के व्यवहार को ठीक से आंक न सकें।
9. कई बार हमारे खुद के कुछ पूर्वाग्रह होते हैं, हमारी धारणा होती है, हम मान कर चलते हैं कि ये तो बड़ा एटीट्यूड दिखाता है, दिखा रहा है या दिखायेगा।
लोग एटीट्यूड क्यों दिखाते हैं?
ज़्यादा एटीट्यूड दिखाने वाले किसी को पसंद नहीं आते। वैसे अधिकांश लोग कभी न कभी किसी न किसी के सामने एटीट्यूड दिखाते ही हैं। एटीट्यूड दिखाने के कई कारण होते हैं। कुछ लोग अपनी असुरक्षा और हीन भावना को छुपाने के लिए इसे अपने बचाव तंत्र के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
कुछ लोगों के लिये यह डर, चिंता या तनाव से निपटने के लिए एक उपाय बन जाता है। वहीं अनसुलझी या दबी हुई भावनाओं को व्यक्त करने के तरीके के रूप में एटीट्यूड सामने आता है। वहीं कभी कभी आदमी डिप्रेशन में या बाइपोलर डिसऑर्डर के कारण ऐसा व्यवहार करता है।
कुछ परिवारों में एटीट्यूड दिखाना खून में ही होता है। लोग अपने परिवार से ही सीखते है। मैं बहुत ही धनाढ्य लोगों की एक पार्टी में गया था, मुझे लगा कि सुपर रिच लोगों की संस्कृति में ही एटीट्यूड दिखाना शामिल हो जाता है। सुरक्षा संबंधी ड्यूटी के दौरान एक अधिकारी अपने आप मे बहुत खो गया था और उसके व्यवहार से लग रहा था कि वो एटीट्यूड दिखा रहा है, उसका कारण शायद उसकी ड्यूटी का तनाव रहा होगा।
कभी कभी पीयर प्रेशर यानी साथियों के दबाव के कारण एटीट्यूड दिखाना पड़ता है। हमारा व्यवहार असल मे स्वयं को अभिव्यक्त करने का तरीका होता है। जिन लोगों का कम्युनिकेशन स्किल अच्छा नहीं होता, वे खुद को अच्छे से अभिव्यक्त नहीं कर पाते। मेरे एक गायक मित्र किसी भी महफ़िल में लोगों से ज़्यादा बात नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि मैं बात करूंगा तो लोग मेरे गाने की कमी बेशी न गिनाने लगें। यह उनकी रक्षा युक्ति है।
मेरे एक अकडू परिचित ने बातों बातों में ये जता दिया कि वो हमेशा अपनी अड़ी में यानी एटीट्यूड में इसलिए रहता है ताकि वो संबंधों में अपर हैंड स्थिति में रहे। यानी कुछ लोग नियंत्रण बनाये रखने के लिए भी एटीट्यूड दिखाते हैं।
मेरा एक दोस्त जो बहुत ही जॉली नेचर का था वो अपने ब्रेक अप के बाद डिप्रेशन में चला गया और उससे उबरने के बाद बहुत खडूस हो गया और बड़ा एटीट्यूड दिखाने लगा। शायद कुछ लोग अपने पुराने बुरे अनुभव और अनसुलझे मामलों को झेलने के बाद थोड़े बदल जाते हैं और उनका एटीट्यूड बदला हुआ दिखता है।
बहुत सारे लोग ये कभी नहीं समझ पाते कि उनके व्यवहार को दूसरे लोग एटीट्यूड दिखाना मानते है। उनमे खुद के प्रति जागरूकता की कमी होती है। वो समझ नहीं पाते कि उनके रवैये के दूसरों पर कैसा प्रभाव पड़ रहा है। लंबे समय तक अगर उन्हें इस के बारे में चेताया नहीं जाए तो फिर वो व्यवहार जड़ जमा लेता है और आदत बन जाता है।
कुछ लोग सिर्फ दूसरों की नक़ल करते हुए कूल बनने के लिए एटीट्यूड दिखाते हैं। एक आंटी जो एक बीमारी से जूझ रही थीं उनके व्यवहार में एक चिड़चिड़ापन और हताशा थी, सीधे मुंह जवाब नहीं देती थी। जो लोग निरंतर कष्ट भोगते हैं उनमें से कई लोगों का व्यवहार थोड़ा रूखा हो जाता है।
क्या किया जाये एटीट्यूड दिखाने वालों के साथ?
एटीट्यूड दिखाने वाला यदि हमारा बहुत क़रीबी है, बहुत काम का है तो हमें शायद उसके एटीट्यूड को सहन करना पड़ेगा। यदि वो हमारा कोई खास नहीं है, हमें उससे अधिक वास्ता नहीं है तो फिर हम उसकी उपेक्षा कर सकते हैं। परंतु यदि कोई ऐसा है जो हमारे रोज़मर्रा के जीवन से किसी न किसी महत्वपूर्ण रूप से जुड़ा है तो हमें उसके प्रति एक रणनीति के साथ काम करना होगा, अन्यथा रोज़ हमारा ही खून जलेगा।
इसलिये सबसे पहले हमें ये सुनिश्चित करना चाहिये कि सामने वाला सच में एटीट्यूड दिखा रहा है या फिर उसका स्वभाव, व्यवहार और व्यक्तित्व ही ऐसा है। अगर यह स्पष्ट हो जाये कि ये एटीट्यूड दिखा रहा है तो हमारे पास तीन रास्ते होते हैं, पहला-उसकी उपेक्षा करके आगे बढ़ जाना, दूसरा उससे लड़ने भिड़ जाना और तीसरा, उसे उसके व्यवहार को स्पष्ट करने के लिये कहना ताकि हम समझ पायें और वो भी जान पाये कि उसके व्यवहार का हम पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
हमें एक्टिव लिसनिंग यानी सक्रिय रूप से सुनना चाहिये, उसके शब्दों, उसके हाव भाव, उसकी देह भाषा को समझना चाहिये। उस पृष्ठभूमि को समझना चाहिये जिसमें वे बातें हो रही हैं। उसकी जो भी बातें आपको ठीक न लगे, या समझ न आयें तो उससे स्पष्टीकरण वाले प्रश्न कीजिये ताकि वो अपनी स्थिति को स्पष्ट कर सके। यदि वो ऐसा नहीं कर पाता तो बचे हुए दो विकल्प आपके पास हैं ही।
आप सोचिये कि इसके इस एटीट्यूड वाले व्यवहार को और किस एंगल से देखा जा सकता है? ये भी सोचिये कि इस आदमी का धर्म, जाति, संप्रदाय, क्षेत्र, संस्कृति आदि सामाजिक कारकों के अनुरूप तो इसका व्यवहार नहीं है? सामने वाले व्यक्ति के बारे में धारणायें बनाने या किसी निष्कर्ष पर कूदने से बचना चाहिये।
हम अक्सर दूसरों को ग़लत समझ लेते हैं। अगर वो एटीट्यूड दिखा रहे हों तो भी और नहीं दिखा रहे हों तो भी, हमें अपना एटीट्यूड सही रखना होता है। वो चाहे जैसे भी हैं, हम कैसे हैं ये हमें पता है और यही हमें अपने व्यवहार से प्रकट भी करना होता है।
एटीट्यूड वाले व्यक्ति अपना नुक़सान खु़द करते हैं। उनसे संघर्ष करने की बहुत ज़रूरत नहीं होती है। अतः ऐसे व्यक्ति के व्यवहार को पहले ध्यान से देखिये, समझिये, तय कीजिये कि मुझे क्या करना चाहिये और फिर उसके अनुरूप काम कीजिये। याद रखिये कि मन की शांति से बड़ी संपत्ति और कोई नहीं होती और किसी व्यक्ति के एटीट्यूड वाले व्यवहार पर इसे बर्बाद नहीं किया जा सकता।
Behtareen lekh sir 🙏 👌👌and very helpful too
ReplyDeleteThank you
DeleteBahut khoob likha hai aapne.Jyadatar hum isliye logon ko galat aur attitude wala samajhte hai ki wo hamare mann mutabik vyvahar nahi karta.jab ki har ek insan ki soch sanskar swabhav alag hota hai .Paristhiti alag hoti hai
ReplyDeleteDhanywad aapka
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