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Wednesday, 27 November 2024

असली अच्छे और ढोंगी अच्छे लोगों को कैसे पहचानें?


                                                            @ मन्यु आत्रेय 

            अगर आपने हिंदू वांग्मय को पढ़ा है तो आप जानते होंगे कि रावण ने ब्राम्हण साधु बनकर सीता माता का हरण किया था। पूतना कान्हा को दूध पिलाकर मार देना चाहती थी। ऐसे ही आपके जीवन में भी कई ऐसे लोग आते हैं जो अच्छे होते तो नहीं है लेकिन अच्छे आदमी होने का दिखावा करते हैं। इनका मक़सद आपको किसी न किसी प्रकार का धोख़ा देना होता है, फिर चाहे उससे आपको कोई नुक़सान ही क्यों न हो जाये। 

            लोग नहीं चाहते कि आप जानें कि वो असल में कैसे हैं? हर व्यक्ति के कुछ ऐसे पहलू होते हैं जो वो किसी की जानकारी में नहीं आने देना चाहता। जब लोग किसी व्यक्ति की नकारात्मक असलियत को जान जान जाते हैं तो उससे दूरी बना लेते हैं, सतर्क हो जाते हैं, आत्म रक्षा के रास्ते खोजने लगते हैं, इससे उनका काम बिगड़ जाता है इसीलिये भेड़िया भेड़ की खा़ल पहन कर आता है। 

वाक़ई अच्छे व्यक्ति कैसे होते हैं? 

            अगर आप एक संवेदनशील व्यक्ति हैं और दूसरों को महसूस कर सकते हैं तो आपको अनुभव हुआ होगा कि जो इंसान वाक़ई अच्छा होता है उससे अलग ही तरंगें उठती हैं। 
            अच्छे व्यक्ति के शब्दों और उसके आचरण में कोई अंतर नहीं दिखता यानी मुंह में राम बग़ल में छुरी वाली स्थिति नहीं होती। अच्छे लोग इस बात से वास्ता रखते हैं कि दूसरे क्या महसूस कर रहे हैं क्या सोच रहे हैं। वे सच्ची परवाह करते हैं। अच्छे लोग आपकी बातों को गंभीरता से सुनते समझते हैं, ज़रूरत पड़ने पर आपसे वे स्थिति को स्पष्ट करने को भी कह सकते हैं। 
            अच्छे लोग आमतौर पर अपनी उपलब्धियों के अहंकार से किसी को नीचा दिखाने की कोशिश नहीं करते। वे आपसे झूठ नहीं बोलते। विनम्र बने रहते हैं। वे अपने शब्दों, अपने कामों की पूरी ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हैं और ग़लत हो जाने पर माफ़ी भी मांग लेते हैं। वे किसी की हैसियत, आर्थिक-सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं करते और सभी को यथोचित सम्मान देते हैं। 
            अच्छे लोग जो हैं वो ही बने रहते हैं, जो वे नहीं हैं वो बनने का ढोंग नहीं करते। अच्छे लोग अपने छुपे हुए मक़सद के लिये किसी को नुक़सान पहुंचाने का प्रयास नहीं करते। अच्छे लोग अच्छा बनने की कोशिश नहीं करते वे होते ही अच्छे हैं। अच्छा होने का मतलब हर परिस्थिति में सभी के प्रति अच्छा होना होता है, परिस्थिति के थोड़ा विपरीत होते ही उनकी अच्छाई खो नहीं जाती। 

अच्छा होने का ढोंग करने वालों को कैसे पहचानें? 

            अच्छा होने का ढोंग करने वाले लोगों की पहचान करने का सबसे सरल तरीक़ा है उन पर ध्यान रखना, उनके शब्दों, उनके आचरण, उनके व्यवहार और आदतों पर लगातार ध्यान रखने से हमें समझ आ सकता है कि ये व्यक्ति जो बोलता है वैसा करता नहीं है। इसके शब्दों और आचरण में एक बड़ा अनुत्तरित सा अंतर है। 
            अच्छा होने का ढोंग करने वाले लोग अधिक समय तक उस अभिनय को जारी नहीं रख सकते। वे लोग अपना व्यवहार लगातार बदलते रहते हैं। अपने मक़सद को पूरा करने के लिये वे लोग चिकनी चुपड़ी बातें करने, अत्यधिक प्रशंसा करने, झूठी तारीफ़ करने से बाज़ नहीं आते। वे दिमाग़ी खेल खेलते दिखते हैं। 
            वे अपनी अच्छाई का हर जगह विज्ञापन करते नज़र आ सकते हैं। वे दूसरों का ध्यान खींचने और अपने कामों, व्यवहार और व्यक्तित्व की प्रशंसा अनुशंसा पाने का प्रयास करते रहते हैं, यानी उन्हें हमेशा एक अच्छा आदमी होने का प्रमाणपत्र चाहिये होता है। 
            उनमें दूसरों के दुख दर्द, वेदना, कष्ट, असुविधा, परेशानियों, समस्याओं के प्रति सच्ची संवेदना नहीं होती और वे दुख प्रदर्शित करने के अगले ही क्षण मुस्कुरा भी सकते हैं। वे दूसरों से कभी भी पूरी तरह से जुड़ते नहीं हैं। वे संकट, परेशानी या चुनौती के समय अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेते हैं, कोई चूक या ग़लती हो जाने पर उसका दोष किसी न किसी दूसरे व्यक्ति पर मढ़ने का प्रयास करते हैं और शुरू से इसकी पृष्ठभूमि तैयार करते रहते हैं। अपनी कमियों को छुपाकर दूसरों की कमियों को उजागर करने की कोशिश करते हैं। वे जो नहीं हैं वैसा दिखने की कोशिश करते हैं। वे अपराध बोध, क्रोध, आत्म दया, विक्टिम कार्ड जैसी युक्तियों से दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। वे हमेशा बदले में कुछ ना कुछ हासिल करने की कोशिश करते दिख सकते हैं. 

कब सतर्क हो जाना चाहिये? 

            ऐसे फ़र्जी़ अच्छे लोगों से तो हमेशा ही सतर्क रहना चाहिये, लेकिन कभी कभी कुछ लोग अपने जीवन की बहुत सारी बातें दूसरों से साझा नहीं करना चाहते, इसके पीछे उनका मक़सद सिर्फ़ अपनी निजता की रक्षा करना होता है और कुछ नहीं। परंतु अक्सर अच्छा बनने का नाटक करने वाले लोगों के कुछ गुप्त उद्देश्य होते हैं। वे तब तक अच्छे बने रहते हैं जब तक कि उनका उद्देश्य पूरा न हो जाये, या फिर उस उद्देश्य के पूरा होने की संभावना ही समाप्त न हो जाये। ऐसे अच्छे लोगों को पहचाना जा सकता है। 
            कोई भी ‘अच्छा’ व्यक्ति आपकी ज़रूरत के समय तो नदारद हो जाये लेकिन जब जब उसे ज़रूरत हो वो बिना हिचक आपके पास आ जाये। जब कोई व्यक्ति बहुत जल्दी जल्दी अपने मनोभावों को बदलता हुआ दिख रहा हो, खासकर जब उसके किसी भी एक मनोभाव का संबंध आप से हो, उदाहरण के लिये आप दुखी हैं और वो भी दुखी दिख रहा है लेकिन अगले ही क्षण किसी और से मिलने पर वो उसके साथ हंस हंस कर बातें कर रहा हो तो समझ लें कि उसकी संवेदना उतनी सच्ची नहीं थी। 
            अगर वो अच्छा आदमी दूसरो के बारे में अफ़वाहें फैलाते, झूठ बोलते, व्यंग्यात्मक बातें कहता हुआ दिखे तो सतर्क हो जाईये क्योंकि वो आपकी पीठ पीछे भी यही आपके लिये करेगा। 
            यदि कोई अच्छा आदमी आपसे आपके जीवन के बारे में, आपके किसी खा़स काम के बारे में खोद खोद कर जानकारी लेने की कोशिश करे, आपको बार बार भरोसा दिलाये कि आप उस पर निर्भर हो सकते हैं, तो उससे भी सतर्क रहिये। ऐसा ‘अच्छा’ व्यक्ति यदि आपको अनावश्यक रूप से ज़्यादा समय दे, सहायता का हाथ बढ़ाये तो समझिये कि उसके कुछ उद्देश्य हो सकते हैं। हो सकता है वे उद्देश्य आपके लिये नुक़सानदेह न भी हों या हो भी सकते हैं।
            ‘अच्छा’ व्यक्ति आपसे क्रमशः बढ़ती हुई रक़म उधार ले रहा हो, यानी पहले 1000 लिया और वापस कर दिया, फ़िर 5000 रू. मांगे और वापस कर दे, फिर 10000 रू. मांगे और वापस कर दे तो सतर्क हो जाईये शायद वो अगली बार 1 लाख रूपये मांगे और कभी भी वापस न करे। 

ऐसे ‘अच्छे’ लोगों से कैसे निपटें? 

ऐसे ‘अच्छे’ लोगों से निपटा जा सकता है हालांकि उनकी असलियत की पहचान करना उतना आसान काम नहीं है लेकिन अगर आप कुछ रणनीतियों पर काम करते हैं तो उन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है और समुचित क़दम उठाया जा सकता है। 
1. उनके व्यवहार, शब्दों, हाव भाव और कामों में अंतर खोजिये। 
2. ये समझने की कोशिश कीजिये कि वे अच्छा बनने का नाटक क्यों कर रहे हैं? 
3. उनके बारे में जानकारी जुटाईये, उनके ग्रे एरिया को प्रकाश में लाईये। 
4. उन्हें समझा दीजिये कि उनसे आपकी अपेक्षा क्या है और आपकी सीमा क्या है? 
5. उन्हें यह संकेत भी किया जा सकता है कि अच्छा बने रहने का ढोंग करने के क्या परिणाम हो सकते हैं? 
6. किसी भी भावनात्मक खेल में उलझिये मत, भावुक प्रतिक्रियायें मत दीजिये। 
7. स्वयं को प्राथमिकता पर रखिये, अपने भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले नकारात्मक लोगों को स्वयं से दूर कीजिये। 
8. अपनी बातों में स्पष्टता और दृढ़ता रखिये, यदि वो सोच रहा है कि आपको बेवकूफ बना लेगा तो उसे धक्का लगेगा और वो औक़ात में रहेगा।
9. उसकी बातों पर यदि आपको कुछ जिज्ञासा, शंका, अस्पष्टता लगे तो उससे प्रश्न करके स्पष्ट हो जाना चाहिये कि उसकी दाल नहीं गलेगी। 
10. ऐसे ‘अच्छे’ आदमी की किन्हीं अस्पष्ट बातों को स्पष्ट  करवा लेने की आदत डालिये। 
11. लोगों से एक सुरक्षित दूरी बना कर ही चलना चाहिये। उन पर बहुत अधिक भावनात्मक निर्भरता नहीं रखनी चाहिये और न ही बहकना चाहिये।
12. जिन पर भी आपको ढोंगी होने का शक़ हो उनसे धीरे धीरे दूरी बना लीजिये और जो लोग आपको सच्चे और साफ़ सुथरे लगते हों उनसे संपर्क रखिये। 
13. ऐसे अच्छे व्यक्ति पर शंका होने पर ठोस और आत्मविश्वास से भरा हुआ व्यवहार रखिये, ताकि उन्हें आपको ठगना आसान न लगे। 
14. अपने भरोसे के लोगों, परिवार वालों, दोस्तों से इस बारे में बात कर सकते हैं। 
15. ध्यान से अवलोकन, धैर्य, सही समय पर सही प्रतिक्रिया देना सीखिये। 

अच्छा होने का ढोंग करने वाले लोगों के चक्कर में कई बार हम सच में अच्छे लोगों की उपेक्षा कर देते हैं, उनसे दूर हो जाते हैं, इससे हमारा दोहरा नुक़सान हो जाता है, इसलिये ढोंगी अच्छे लोगों को अपने जीवन में सीमित स्थान दीजिये।

8 comments:

  1. Bilkul satik baat kahi aapne achhai ko prman ki aavshkata nahi hoti👌👌🙏💐

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  2. To be live without getting deceived in any relation or field or to be live happily in today's scenario to get peace of mind with your decision s,I extremely believe thought's of Shri Manyu Aatreya...
    They're very practical and if in present lifestyle we don't hv time for reading Granth , Puran etc we may get benefitted by following Shri Manyu Aatreya who had already gone through all max.. of these...
    They provide us the pure AMRIT type understanding which are directly related to our daily life concern/needs ...
    Thank you GURUDEV

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  3. बहुत वृहद सटीक विश्लेषण ,,, लेकिन जिंदगीभर मे ऐसे लोग बहुतायत मे मिलते है लेकिन हमेशा व्यक्ति जिनसे सामान्य औपचारिक मिलना जुलना होता है,व्यक्ति उसे इतनी गहराई से नही लेता है,लेकिन विशेषकर जिससे अँतरँग सँबँध होते है वही व्यक्ति को इस कसौटियों की आवश्यकता होती है लेकिन रिश्ते तो ज्यादातर बन चुके होते है ,,,इसीलिए व्यक्ति को बस देखकर इसके अनुसार सँजीदगी से व्यवहार करना चाहिए। ।
    इस आलेख हेतु हार्दिक♡बधाई* और भविष्य हेतु भमँगलकामनाएँ💐 !!

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    1. अनेक अनेक धन्यवाद् सर आशीर्वाद बना रहे

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  4. Sach kaha aapne hamare aas pass bahut se ase log hote hai per kabhi kabhi apne hi log dhong kare to kya kare.

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