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Tuesday, 3 December 2024

लोगों को उनके हाल पर छोड़ दो !!

@मन्यु आत्रेय
कभी कभी लोगों को उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए। आमतौर पर हमें अपने करीबी लोगों की परवाह होती है और हम उनके लिए कुछ करने, उनकी बातें सुनने, उन्हें भावनात्मक सहारा देने, उनकी समस्या दूर करने के लिए कुछ करना चाहते हैं, लेकिन ऐसे कई मौके होते हैं जब हमें लोगों को उनके हाल पर छोड़ देना पड़ता है। 
लोगों को उनके हाल पर छोड़ देना एक बहुत ही मुश्किल और संवेदनशील निर्णय है, लेकिन कुछ परिस्थितियाँ हैं जहाँ आपको लोगों को उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए।

लोगों को उनके हाल पर छोड़ दीजिए
1) यदि किसी का व्यवहार लगातार विषाक्त, अपमानजनक या आपके लिए हानिकारक है,
2) यदि कोई आपकी भावनाओं का शोषण कर रहा है, आपको दोषी महसूस करा रहा है, या आपको नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है
3) यदि कोई व्यक्ति आपकी आर्थिक, भावनात्मक या व्यावहारिक सहायता पर निर्भर है, किंतु स्वयं को सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है 
4) कोई व्यक्ति यदि आपको जन्म भर के लिए आपको बैसाखी बना के चल रहा है परंतु आपकी कद्र या सम्मान नहीं करता और आपको हल्के में लेता है
5) यदि आपको पता चल जाये कि वो पीठ पीछे आपके विरुद्ध बातें, या काम, या षड्यंत्र करता है, आपकी हंसी उड़ाता है, आपके प्रति अपमानजनक बातें करता है,
6) यदि किसी व्यक्ति की आपके जीवन में मौजूदगी आपके आगे बढ़ने, मजबूत बनने, प्रगति करने में बाधा बन रही है 
7) यदि कोई व्यक्ति आपके जीवन में नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, आपको नकारात्मक विचारों और आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है,
8) यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार आपको शारीरिक या भावनात्मक नुकसान पहुँचा रहा है, 
9) यदि किसी व्यक्ति का वातावरण कुंठा से भरा हुआ है, और आप उस वातावरण से नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहे हैं, 
10) वो आपके सामने आपकी बातों को स्वीकार करता है लेकिन पीठ पीछे उपेक्षा करता है, 
11) आपके उपलब्ध होने को अपनी बपौती या अधिकार मानता है, अपना अहंकार, ज़िद, गलत दृष्टिकोण, धारणाएं नहीं छोड़ता
12) आपकी सही बातों को समझता नहीं, उल्टा प्रतिवाद करता है, अनावश्यक विवाद खड़ा करता है या आपके शब्दों को पकड़ कर विक्टिम कार्ड खेलता है और आपमे अपराध बोध पैदा कर देता है। 

किसी अपने को उनके हाल पर छोड़ना एक कठिन और दुखदायक निर्णय हो सकता है। अपने निर्णय के पीछे के कारणों को समझ कर अपने आप को प्राथमिकता देकर आप अपनी सुरक्षा और सम्मान को बनाये रखते हैं तो इसमे कुछ भी गलत नहीं है। 
हो सकता है आप उसके अकेले विकल्प नहीं हों और आप ज़बरदस्ती भावुक होकर सोच रहे हों। हो सकता है आपके छोड़ देने के बाद उसे आपकी कदर, कीमत और ज़रूरत समझे। हो सकता है आपका सहारा छूटने पर वो वैसा आत्म निर्भर हो पाए जैसा आप चाहते थे। कभी कभी किसी की भलाई के लिए भी उससे दूर हो जाना पड़ता है।

कब नहीं छोड़ना चाहिए? 
हां कुछ ऐसी परिस्थितियां होती है। जिनमे किसी को छोड़ देना गलत हो जाता है- 
1) यदि वो जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहा है
2) गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है
3) वो किसी भावनात्मक संकट में जैसे कि अवसाद, चिंता, या आत्महत्या के विचार में है
4) यदि उसे किसी गंभीर स्थिति जैसे मृत्यु, तलाक़, दुर्घटना से अवसाद आदि के कारण भावनात्मक सहारे की आवश्यकता  है 
5) उसका साथ देना आपका नैतिक या कानूनी कर्तव्य है
6) उसको उसके हाल पर छोड़ देना, आगे चलकर आप को अपराध बोध से इतना भर दे कि जीना हराम हो जाये। 
7) खुद को सुरक्षित रखते हुए आप यदि उसकी कोई सहायता कर सकते हैं तो मानवता के नाते ज़रूर करनी चाहिए। 
8) यदि उसके जीवन की ऐसी दशा में कहीं न कहीं आपकी भूमिका है तो उसका साथ नहीं छोड़ना चाहिए। 

हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि हर व्यक्ति का मामला हमारे लिए अलग हो सकता है, वो हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है, उसके पास और विकल्प क्या हैं, हमारा दायित्व बोध उसके प्रति क्या है हम कितने ज़िम्मेदार हैं उसके प्रति, इन बातों को ध्यान में रखकर हमें तय करना चाहिए कि इस व्यक्ति का साथ देना है या नहीं, कब तक देना है और कब उसके हाल पर छोड़ देना है। क्योंकि दुनिया मे ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो कलेजा काट के दे देने पर भी आपको नहीं समझेंगे। 

Monday, 2 December 2024

आपका कांधा कौन इस्तेमाल कर रहा है?




@मन्यु आत्रेय 

                धूर्त लोग हमेशा अपने महत्वपूर्ण और संवेदनशील काम करवाने के लिये किसी ऐसे आदमी का कांधा तलाश करते हैं जिस पर रखकर अपनी बंदूक चलवाई जाये, ताकि उसके पीछे वे स्वयं छुपे रहें।  कई साल पहले क़यामत से क़यामत तक फ़िल्म देखने के लिये अपने एक कजिन के उकसावे पर मैने पिताजी से पैसे मांगे और डांट खाई। मेरा कज़िन चेहरे पर मासूमियत लिये खड़ा रहा, उल्टे मुझे पढ़ाई लिखाई के नाम पर कड़वे उपदेश सुनने पड़े। 

                नई दिल्ली में एनसीसी के रिपब्लिक डे कैंप के दौरान मेरे एक साथी ने मुझसे मेरी हैंड रायटिंग में एक खूबसूरत लव लेटर लिखवाया था और मैने दोस्ती यारी में लिख भी दिया। कैंप ख़त्म होने के बाद हमारी एक बैचमेट ने वो ही लेटर मुझे वापस देकर कहा था कि यदि वो ये लेटर कैंप एड्जुटेंट को दे देती तो मुझे कैंप से निकाल दिया जाता। वो जानती थी कि लेटर भले ही मेरे साथी ने दिया था लेकिन वो हैंड रायटिंग मेरी थी। 

                कुछ साल पहले मेरे एक सहकर्मी के शिकायत करने पर मैं उसकी टीम के कर्मचारियों को लेक्चर पिला देता था कि उन्हें कैसे अच्छे से काम करना चाहिए। ज़ाहिर सी बात है इसमें मेरे सहकर्मी का तो कुछ नहीं बिगड़ता था उल्टे मेरी ही छवि खराब हो जाती थी। हमारे एक बॉस जिनकी गुड बुक में मैं था, उनसे कोई अनुमति लेने के लिये मेरी टीम के लोग मुझे ही इस्तेमाल करते थे और इसके लिये मुझे चने के झाड़ पर चढ़ाया जाता था।  

                जब हमें लगता है कि हमारे प्रयास से कोई काम नही होगा, या हम खुद सामने नहीं आना चाहते तो किसी और की मदद लेते हैं। यह स्वाभाविक है, लेकिन जब लोग अपने असली मंतव्य को छुपा कर हमें भ्रमित करके अपने मकसद में इस्तेमाल करते हैं तो वह उनके लिए फायदेमंद भले हो, अक्सर हमारे लिए नुकसानदेह होता है। 

लोग दूसरों के काँधे से बंदूक कैसे चलाते हैं?

                एक व्यक्ति आपके पास आता है। अपने प्रयोजन की पृष्ठभूमि आपके सामने तैयार करता है। वह अपने विचार को आपके दिमाग मे भरता है। आपको समझाता है कि कैसे यह करना आपके लिए अच्छा होगा। वो आपको प्रेरित करता है, आपको कुछ संभावित तरीके सुझाता है, आपकी सहायता करता है और आपके प्रयासों के लिए आपकी सराहना करके आपमे हवा भरता है। जब आप उसके सुझाये अनुसार करते है, तो वो बिल्कुल तटस्थ बना रहता है, ऐसे दिखाता है जैसे इससे उसका कुछ भी लेना देना नहीं है। 

                आपको कमज़ोर पड़ता देख या राह से भटकते देख वो आपको फिर प्रेरित करता है ताकि आप उसी लाइन पर ही बने रहें। सफल हो जाने पर उसका स्वार्थ सध जाता है। वह सिर्फ लाभ, यश, और अच्छे में भागीदार बनता है, हानि बदनामी और बुराई में वो सीधा कन्नी काट लेता है। उल्टा आप मे अपराध बोध भरने का प्रयास करता है कि आपने गलत किया, आपके चक्कर मे वो स्वयं फंस गया है। 

आपका कांधा क्यों चुना जाता है?

                आपका कांधा इसलिये चुना जाता है क्योंकि वे लोग उस प्रयास या काम के परिणामों को स्वयं नहीं झेलना चाहते, यानी उन्हें ये लगता है कि यदि कुछ ग़लत हो गया तो उसका परिणाम नहीं भोगना है, इसलिये वे आपको बलि का बकरा बनाना चाहते हैं। या उन्हें लगता है कि आपके पास उस काम को करवाने की क्षमता, पहुंच, साधन-संसाधन हैं। या वो आपको भरोसा करने वाला और बेवकूफ़ सा मानते हैं। हो सकता है वो आपको कहीं फंसाना चाहता हो। हर एक के अपने कारण हो सकते हैं। अधिकांश बार केवल भावी परिणाम से खुद को बचाने के लिये लोग आपके कांधे पर रखकर बंदूक चलाते हैं। 

                जेठानी देवरानी का इस्तेमाल करके सास को दस बात सुना देती है। सास अपने बेटे के माध्यम से अपनी बहू को प्रताड़ित करती है। सहकर्मी अपने बॉस के किसी खास कर्मचारी के माध्यम से किसी बात की अनुमति पाने की कोशिश करते हैं। भाई बहनों में जो पापा के करीब होता है उसके माध्यम से कोई छूट मांगी जाती है। ये छोटी मोटी बातें हैं जिनका कोई बड़ा नुक़सान नहीं होता। परंतु आपसी लड़ाई करवाने कुछ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। राजनेता मौक़ा तलाशते रहते हैं कि किसी का कांधा मिले तो अपनी राजनीतिक बंदूक चलाई जाये। 

कैसे पहचानें कि कोई आपके कांधे से बंदूक चला रहा है?

  1. जब कोई व्यक्ति किसी काम को करने के लिये आपको प्रेरित करता है, जो वो भी कर सकता था, तो सोचिये कि इसके पीछे इसका उद्देश्य क्या है और इसका संभावित परिणाम क्या हो सकता है? 
  2. जब कोई तभी आपसे संपर्क करे जब उसे आपसे कुछ चाहिये, अन्यथा वो आपके संपर्क में रहने या आपके जीवन में रूचि नहीं दिखाता। स्वार्थी आदमी हमेशा इस्तेमाल करना चाहता है। 
  3. कोई व्यक्ति आपकी भावनाओं, ज़रूरतों, प्राथमिकताओं को किनारे करने के लिये आपको प्रेरित कर रहा हो और किसी दूसरी दिशा में ले जा रहा हो तो समझो वो आपका कांधा तैयार कर रहा है। 
  4. आवश्यकता से अधिक प्रशंसा या चापलूसी करना ऐसे लोगों की रणनीति होती है, जैसे जिसे आपसे पैसे चाहिये वो आपकी उदारता की प्रशंसा करेगा कि आप कैसे सभी की मदद करते हैं। 
  5. कोई आप पर ही पूरा दायित्व डाल रहा है, आपको दोषी या बाध्य महसूस करवा रहा है और इससे मुक्ति सिर्फ़ तभी हो सकती है जब आप उसके अनुसार काम करें तो समझिये कि वो आपका इस्तेमाल करना चाहता है। 
  6. जब भी कोई व्यक्ति आपको बदले में कुछ भी न दे या फिर बहुत कम दे तो समझिये कि वो आप का इस्तेमाल कर रहा था। यह बदला कुछ भी हो सकता है।
  7. किसी से बात करने के बाद आपकी ऊर्जा बहुत कम हो जाती है, आप विवश, नाराज़ या निराश महसूस करते हैं, तो समझिये कि आपका कांधा तैयार किया जा रहा था। 
  8. जो व्यक्ति किसी काम के पीछे के उद्देश्यों पर खुलकर बात नहीं कर रहा है, उसके भावी नकारात्मक प्रभावों को छिपाना चाहता है या बहुत हल्के में दर्शा रहा है। 
  9. जो आपको असावधानी या लापरवाही में रखना चाह रहा है, बहुत ही साधारण बात बनाकर पेश कर रहा है, तो हो सकता है कि वो आपका इस्तेमाल करना चाहता है। 
  10. जो हमेशा अपनी प्राथमिकताओं पर काम करे और आपको स्वयं की प्राथमिकताओं की बजाय उसकी प्राथमिकताओं की तरफ़ ले जाये तो वो आपका इस्तेमाल करना चाहता है। 

कैसे बचें ऐसे लोगों से?

  1. जो आपके बहुत खा़स हैं, बेहद क़रीबी हैं, जो आपके लिये बहुत कुछ करते हैं, उनके लिये कुछ भी करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन सिर्फ़ एकतरफ़ा इस्तेमाल करने वालों से सतर्क रहना सीखना जरूरी है। 
  2. जो भी कोई काम बताये उसके मक़सद, तरीक़े, लाभ हानि के बारे में अच्छे से विचार कीजिये और अगर इस बात का कोई ठोस कारण नहीं दिखता कि वो स्वयं इसे क्यों नहीं कर रहा है, आप भी मत कीजिये। 
  3. अपनी छठी इंद्री पर भरोसा कीजिये, आपकी अंतरात्मा आपको ऐसे लोगों के प्रति चौकस करती है, आपको कहीं न कहीं अंदर से महसूस होता है कि कुछ तो गड़बड़ है। 
  4. जो भी आपके भीतर अपराध बोध भरकर कोई खा़स काम आपसे करवाना चाहता है तो उससे सतर्क हो जाईये। 
  5. जो भी उस काम के भावी परिणामों से स्वयं को अलग थलग रखने की कोशिश में हो, या उस काम के प्रति एकदम अनजान या अबोध बनने की कोशिश कर रहा हो, वो आपको आगे करके खुद बचना चाहता है। 
  6. लोगों की सीमा तय कीजिये। लोगों के काम करवाने की अपनी सीमा भी पहचानिये। 


लोगों से उपयुक्त व्यवहार कैसे करें?

@मन्यु आत्रेय 

                 आपने अक्सर वो वाक्य पढ़ा होगा-‘‘जो व्यवहार तुम स्वयं के साथ नहीं चाहते वैसा व्यवहार दूसरों के साथ मत करो।’’ ये वाक्य किसी हद तक सही है, लेकिन कई बार हमारे अच्छा व्यवहार करने के बावजूद कुछ लोग हमसे बदतमीज़ी या असभ्यता से पेश आते हैं, हमारे हानिरहित होने के बावजूद हमें नुक़सान पहुंचाते हैं। हमसे झूठ बोलते हैं, हमसे छल करते हैं, हमारे रास्ते में रोड़े अटकाते हैं, हमें संकटों में फंसाकर आगे बढ़ने रोकते हैं। 

                    कहा जाता है कि सांप को कितना ही दूध पिला लो, उसका ज़हर अमृत नहीं बन जायेगा। धूर्त, लालची, अहंकारी, प्रतिशोध की भावना से भरे हुए व्यक्ति के साथ कितना भी अच्छा व्यवहार कर लो, वो आपको हानि पहुंचाने का अवसर शायद ही छोड़ेगा, इसलिये ऐसे लोगों के साथ बहुत ही सावधानी से व्यवहार करना चाहिये। 

                        हमारी सुरक्षा, सुविधा, सम्मान और सफलता बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि हम किसके साथ कैसा व्यवहार करते हैं। ये जितना सामने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है उससे कहीं ज़्यादा हम पर निर्भर करता है। हममें लोक व्यवहार की जितनी ज़्यादा समझ होगी, हम दूसरों से उतना उपयुक्त व्यवहार कर पायेंगे। सामने वाले व्यक्ति के स्वभाव, स्थिति परिस्थिति, प्रभाव, गतिविधियों, अपने प्रति व्यवहार, और उद्देश्य को ध्यान में रखकर उससे व्यवहार करने में समझदारी है लेकिन यह समझना बहुत ही जटिल है कि किसके साथ कैसा व्यवहार करना उचित होगा क्योंकि यह भी सामने वाले व्यक्ति पर ही निर्भर होता है जैसे क्रोधी के क्रोध को आपका शांत व्यवहार ठंडा भी कर सकता है और भड़का भी सकता है।  

 किस माथे पर कैसा चन्दन लगायें ? 

  1. समझदार, सकारात्मक संवेदनशील, सहानुभूति रखने और परवाह करने वाले लोगों के साथ ईमानदारी, सकारात्मकता और सम्मान से व्यवहार करना चाहिये, कृतज्ञता दिखानी चाहिये 
  2. ज्ञानी, लोक व्यवहार में निपुण, तीव्र बुद्धि के लोगों से मार्गदर्शन लेकर उनकी प्रशंसा करनी चाहिये। उनसे संघर्ष के समाधान का कौशल सीखना चाहिये। 
  3. आपमें उत्साह जगाने वाले, प्रेरणा देने वाले, आपकी रचनात्मकता जगाने वाले लोगों के अच्छे विचारों को ग्रहण करना, उत्साह दिखाना, उनसे रचनात्मकता को ग्रहण करना चाहिये। 
  4. अंहकारी, आत्मकेंद्रित और सहानुभूति रहित लोगों की सीमायें तय करनी चाहिये। तटस्थ और थोड़ा सा औपचारिक व्यवहार रखें। ऐसा व्यवहार न करें कि उनका अहंकार और बढ़ जाये, इससे आपका ही नुक़सान होगा। 
  5. स्वार्थी, धूर्त, दूसरों का शोषण करने वाले लोगों से सतर्क रहें। उनसे एक स्वस्थ दूरी बनाये रखें। अपनी गोपनीय बातें, अपने स्वप्न, योजनायें साझा नहीं करें। अपनी भावनात्मक कमज़ोरी कभी भी उन पर ज़ाहिर नहीं करें। 
  6. आलोचना करने, दोष निकालने वाले, जजमेंटल और नकारात्मक लोगों के व्यवहार पर शांत रहें, स्पष्ट संचार करें, उनसे मार्गदर्शन मांगने की शैली में उनकी बातों का स्पष्टीकरण मांगें जिसमें कई बार वे विफल होंगे और उनका मक़सद समझ आ जायेगा कि ये हमारा मनोबल तोड़ना चाहता है। 
  7. भावनात्मक रूप से अस्त व्यस्त, क्रोधी, पीठ पीछे प्रतिरोध करने वाले और नुक़सान पहुंचाने वाले लोगों से सीधे कट टू कट और मुद्दों पर बात करनी चाहिये। आमने सामने बात करनी चाहिये। उनसे अपेक्षा नहीं रखें, खुलकर संवाद करें। 
  8. अपनी भावनाओं से जो स्वयं ही अनजान हैं, जो दूसरों पर उनके प्रभावों को नहीं जानते, जिनके अंदर अचानक भावनाओं का विस्फोट होता है और अचानक भयानक कोई भी निर्णय ले लेते हैं, उनसे समानांतर दूरी बना कर रखें। अगर उनकी भावनाओं को लेकर उन्हें जागरूक कर सकते हैं तो अप्रत्यक्ष रूप से कीजिये। यदि नहीं कर सकते तो जितना आपका वास्ता है उसी के अनुसार उनसे तटस्थ और संयत व्यवहार रखिये। ऐसे लोग बर्र के छत्ते की तरह होते हैं ये न भूलिये। 
  9. जो आपको मार्गदर्शन करते हैं, नेतृत्व करते हैं, रास्ता दिखाते हैं उनका सम्मान करें, उनसे सीखें, नपी तुली प्रतिक्रिया दें और उनके एवं अपने साझा लक्ष्यों पर ध्यान बनाये रखें। उनके मार्गदर्शन में आपको अपने लक्ष्यों की ओर जाना है न कि उनके उद्देश्यों की पूर्ति का साधन बनना है। 
  10. जो आपका अनुसरण करते हैं, आपके सहयोगी हैं, आपके दिशा निर्देशों का पालन करते हैं, उन्हें यथासंभव स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करें, सहायता दें, उनकी राय, अभिमत और विचारों की उपयुक्तता का सम्मान करें। 
  11. चुनौती देने वाले, ख़तरा मोल लेने वाले, अधिकारों और परंपराओं से विद्रोह करने वाले लोगों के दृष्टिकोणों को देखें समझें, खुली चर्चा करें, आप क्या सोचते हैं, दोनों में समानता और असमानता को समझिये और अपना पक्ष संभालकर रखिये। 
  12. जो लोग तटस्थ, निष्पक्ष दिखते हैं, उनकी तटस्थता का सम्मान कीजिये, उनसे भी मार्गदर्शन ले सकते हैं, वे संघर्ष का समाधान कैसे निकालते हैं इसे समझिये। 
  13. कुछ लोग मिस्टर परफेक्शनिस्ट होते हैं, उन्हें हर बात एकदम परफेक्ट चाहिये होती है, आपसे जितना बनता है उतना कीजिये। जिस प्रकार वे बारीक विवरण पर ध्यान देते हैं उसकी सराहना कीजिये, उनसे काफी कुछ सीखने को है ये बताईये और संतुलित प्रतिक्रिया दीजिये। उनके जैसा जुनून हर किसी में नहीं हो सकता। 
  14. कामों को टालने वाले, दूसरों पर थोपने का प्रयास करने वाले, बहानासाईटिस वाले लोगों पर अपनी निर्भरता कम कर लीजिये, उनके कामों को पूरा करने में उनकी मदद कर सकते हैं, परंतु उनके काम खुद पर लदने की परिस्थिति दिखे तो तुरंत सतर्क हो जाईये।  

                    वैसे ये कुछ ही प्रकार के लोग हैं, इनके अलावा और भी प्रकार के लोग आपको मिल सकते हैं उनसे व्यवहार के और भी तरीक़े हो सकते हैं। यह अपने जीवन अनुभव से आप सीख सकते हैं कि किस प्रकार के व्यक्ति से आप कैसा व्यवहार कर पाते हैं और स्वयं की सुरक्षा, सुविधा, सम्मान और सफलता सुनिश्चित कर पाते हैं। 

लोक व्यवहार की सप्तपदी

  • जिसे जितना बताना हो उससे ज़्यादा कभी मत बताईये। 
  • अपनी गोपनीय बातें साझा मत कीजिये। 
  • अनावश्यक अपमान मत कीजिये। अनावश्यक चुनौती मत दीजिये। 
  • आंख मूंद कर किसी पर भरोसा मत कीजिये,लोगों की मेंटल स्कैनिंग सुरक्षा के लिये आवश्यक है। 
  • ग़लत आदमी का भरोसेमंद बनने, साथ देने के प्रयास कभी मत कीजिये। 
  • अच्छे लोगों के साथ सज्जनता, विश्वसनीयता और तटस्थता रखिये। 
  •  किसी से भी सिर्फ उतनी ही निकटता बढ़ाओ जितना नुक़सान सहने की क्षमता हो। 

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा

मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा   आज मैं एक संकल्प के साथ उठता हूँ— मैं आज का दिन पूरे बोध में जीऊँगा।  कल की स्मृतियाँ और कल की चिंताएँ द...