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Monday, 2 December 2024

लोगों से उपयुक्त व्यवहार कैसे करें?

@मन्यु आत्रेय 

                 आपने अक्सर वो वाक्य पढ़ा होगा-‘‘जो व्यवहार तुम स्वयं के साथ नहीं चाहते वैसा व्यवहार दूसरों के साथ मत करो।’’ ये वाक्य किसी हद तक सही है, लेकिन कई बार हमारे अच्छा व्यवहार करने के बावजूद कुछ लोग हमसे बदतमीज़ी या असभ्यता से पेश आते हैं, हमारे हानिरहित होने के बावजूद हमें नुक़सान पहुंचाते हैं। हमसे झूठ बोलते हैं, हमसे छल करते हैं, हमारे रास्ते में रोड़े अटकाते हैं, हमें संकटों में फंसाकर आगे बढ़ने रोकते हैं। 

                    कहा जाता है कि सांप को कितना ही दूध पिला लो, उसका ज़हर अमृत नहीं बन जायेगा। धूर्त, लालची, अहंकारी, प्रतिशोध की भावना से भरे हुए व्यक्ति के साथ कितना भी अच्छा व्यवहार कर लो, वो आपको हानि पहुंचाने का अवसर शायद ही छोड़ेगा, इसलिये ऐसे लोगों के साथ बहुत ही सावधानी से व्यवहार करना चाहिये। 

                        हमारी सुरक्षा, सुविधा, सम्मान और सफलता बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि हम किसके साथ कैसा व्यवहार करते हैं। ये जितना सामने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है उससे कहीं ज़्यादा हम पर निर्भर करता है। हममें लोक व्यवहार की जितनी ज़्यादा समझ होगी, हम दूसरों से उतना उपयुक्त व्यवहार कर पायेंगे। सामने वाले व्यक्ति के स्वभाव, स्थिति परिस्थिति, प्रभाव, गतिविधियों, अपने प्रति व्यवहार, और उद्देश्य को ध्यान में रखकर उससे व्यवहार करने में समझदारी है लेकिन यह समझना बहुत ही जटिल है कि किसके साथ कैसा व्यवहार करना उचित होगा क्योंकि यह भी सामने वाले व्यक्ति पर ही निर्भर होता है जैसे क्रोधी के क्रोध को आपका शांत व्यवहार ठंडा भी कर सकता है और भड़का भी सकता है।  

 किस माथे पर कैसा चन्दन लगायें ? 

  1. समझदार, सकारात्मक संवेदनशील, सहानुभूति रखने और परवाह करने वाले लोगों के साथ ईमानदारी, सकारात्मकता और सम्मान से व्यवहार करना चाहिये, कृतज्ञता दिखानी चाहिये 
  2. ज्ञानी, लोक व्यवहार में निपुण, तीव्र बुद्धि के लोगों से मार्गदर्शन लेकर उनकी प्रशंसा करनी चाहिये। उनसे संघर्ष के समाधान का कौशल सीखना चाहिये। 
  3. आपमें उत्साह जगाने वाले, प्रेरणा देने वाले, आपकी रचनात्मकता जगाने वाले लोगों के अच्छे विचारों को ग्रहण करना, उत्साह दिखाना, उनसे रचनात्मकता को ग्रहण करना चाहिये। 
  4. अंहकारी, आत्मकेंद्रित और सहानुभूति रहित लोगों की सीमायें तय करनी चाहिये। तटस्थ और थोड़ा सा औपचारिक व्यवहार रखें। ऐसा व्यवहार न करें कि उनका अहंकार और बढ़ जाये, इससे आपका ही नुक़सान होगा। 
  5. स्वार्थी, धूर्त, दूसरों का शोषण करने वाले लोगों से सतर्क रहें। उनसे एक स्वस्थ दूरी बनाये रखें। अपनी गोपनीय बातें, अपने स्वप्न, योजनायें साझा नहीं करें। अपनी भावनात्मक कमज़ोरी कभी भी उन पर ज़ाहिर नहीं करें। 
  6. आलोचना करने, दोष निकालने वाले, जजमेंटल और नकारात्मक लोगों के व्यवहार पर शांत रहें, स्पष्ट संचार करें, उनसे मार्गदर्शन मांगने की शैली में उनकी बातों का स्पष्टीकरण मांगें जिसमें कई बार वे विफल होंगे और उनका मक़सद समझ आ जायेगा कि ये हमारा मनोबल तोड़ना चाहता है। 
  7. भावनात्मक रूप से अस्त व्यस्त, क्रोधी, पीठ पीछे प्रतिरोध करने वाले और नुक़सान पहुंचाने वाले लोगों से सीधे कट टू कट और मुद्दों पर बात करनी चाहिये। आमने सामने बात करनी चाहिये। उनसे अपेक्षा नहीं रखें, खुलकर संवाद करें। 
  8. अपनी भावनाओं से जो स्वयं ही अनजान हैं, जो दूसरों पर उनके प्रभावों को नहीं जानते, जिनके अंदर अचानक भावनाओं का विस्फोट होता है और अचानक भयानक कोई भी निर्णय ले लेते हैं, उनसे समानांतर दूरी बना कर रखें। अगर उनकी भावनाओं को लेकर उन्हें जागरूक कर सकते हैं तो अप्रत्यक्ष रूप से कीजिये। यदि नहीं कर सकते तो जितना आपका वास्ता है उसी के अनुसार उनसे तटस्थ और संयत व्यवहार रखिये। ऐसे लोग बर्र के छत्ते की तरह होते हैं ये न भूलिये। 
  9. जो आपको मार्गदर्शन करते हैं, नेतृत्व करते हैं, रास्ता दिखाते हैं उनका सम्मान करें, उनसे सीखें, नपी तुली प्रतिक्रिया दें और उनके एवं अपने साझा लक्ष्यों पर ध्यान बनाये रखें। उनके मार्गदर्शन में आपको अपने लक्ष्यों की ओर जाना है न कि उनके उद्देश्यों की पूर्ति का साधन बनना है। 
  10. जो आपका अनुसरण करते हैं, आपके सहयोगी हैं, आपके दिशा निर्देशों का पालन करते हैं, उन्हें यथासंभव स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करें, सहायता दें, उनकी राय, अभिमत और विचारों की उपयुक्तता का सम्मान करें। 
  11. चुनौती देने वाले, ख़तरा मोल लेने वाले, अधिकारों और परंपराओं से विद्रोह करने वाले लोगों के दृष्टिकोणों को देखें समझें, खुली चर्चा करें, आप क्या सोचते हैं, दोनों में समानता और असमानता को समझिये और अपना पक्ष संभालकर रखिये। 
  12. जो लोग तटस्थ, निष्पक्ष दिखते हैं, उनकी तटस्थता का सम्मान कीजिये, उनसे भी मार्गदर्शन ले सकते हैं, वे संघर्ष का समाधान कैसे निकालते हैं इसे समझिये। 
  13. कुछ लोग मिस्टर परफेक्शनिस्ट होते हैं, उन्हें हर बात एकदम परफेक्ट चाहिये होती है, आपसे जितना बनता है उतना कीजिये। जिस प्रकार वे बारीक विवरण पर ध्यान देते हैं उसकी सराहना कीजिये, उनसे काफी कुछ सीखने को है ये बताईये और संतुलित प्रतिक्रिया दीजिये। उनके जैसा जुनून हर किसी में नहीं हो सकता। 
  14. कामों को टालने वाले, दूसरों पर थोपने का प्रयास करने वाले, बहानासाईटिस वाले लोगों पर अपनी निर्भरता कम कर लीजिये, उनके कामों को पूरा करने में उनकी मदद कर सकते हैं, परंतु उनके काम खुद पर लदने की परिस्थिति दिखे तो तुरंत सतर्क हो जाईये।  

                    वैसे ये कुछ ही प्रकार के लोग हैं, इनके अलावा और भी प्रकार के लोग आपको मिल सकते हैं उनसे व्यवहार के और भी तरीक़े हो सकते हैं। यह अपने जीवन अनुभव से आप सीख सकते हैं कि किस प्रकार के व्यक्ति से आप कैसा व्यवहार कर पाते हैं और स्वयं की सुरक्षा, सुविधा, सम्मान और सफलता सुनिश्चित कर पाते हैं। 

लोक व्यवहार की सप्तपदी

  • जिसे जितना बताना हो उससे ज़्यादा कभी मत बताईये। 
  • अपनी गोपनीय बातें साझा मत कीजिये। 
  • अनावश्यक अपमान मत कीजिये। अनावश्यक चुनौती मत दीजिये। 
  • आंख मूंद कर किसी पर भरोसा मत कीजिये,लोगों की मेंटल स्कैनिंग सुरक्षा के लिये आवश्यक है। 
  • ग़लत आदमी का भरोसेमंद बनने, साथ देने के प्रयास कभी मत कीजिये। 
  • अच्छे लोगों के साथ सज्जनता, विश्वसनीयता और तटस्थता रखिये। 
  •  किसी से भी सिर्फ उतनी ही निकटता बढ़ाओ जितना नुक़सान सहने की क्षमता हो। 

3 comments:

  1. बडी पते की बातें कहीं है आपने।बहुत बार हम लोगोंको पहचान ही नही पातें,इसीलिए उनसे कैसे व्यवहार रखना है यह भी समझ नही पांते।आपने लोगोंके स्वभाव विषेश अच्छी तरह से प्रस्तुत किए हुए है।💐👌👌

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  2. Superrrr sir 👌👌🙏🙏💐💐

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  3. Achai ka jamana nai hai sahi kaha aapne soch samjh kar nazdikiyan badhani chahiye.

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