@मन्यु आत्रेय
धूर्त लोग हमेशा अपने महत्वपूर्ण और संवेदनशील काम करवाने के लिये किसी ऐसे आदमी का कांधा तलाश करते हैं जिस पर रखकर अपनी बंदूक चलवाई जाये, ताकि उसके पीछे वे स्वयं छुपे रहें। कई साल पहले क़यामत से क़यामत तक फ़िल्म देखने के लिये अपने एक कजिन के उकसावे पर मैने पिताजी से पैसे मांगे और डांट खाई। मेरा कज़िन चेहरे पर मासूमियत लिये खड़ा रहा, उल्टे मुझे पढ़ाई लिखाई के नाम पर कड़वे उपदेश सुनने पड़े।
नई दिल्ली में एनसीसी के रिपब्लिक डे कैंप के दौरान मेरे एक साथी ने मुझसे मेरी हैंड रायटिंग में एक खूबसूरत लव लेटर लिखवाया था और मैने दोस्ती यारी में लिख भी दिया। कैंप ख़त्म होने के बाद हमारी एक बैचमेट ने वो ही लेटर मुझे वापस देकर कहा था कि यदि वो ये लेटर कैंप एड्जुटेंट को दे देती तो मुझे कैंप से निकाल दिया जाता। वो जानती थी कि लेटर भले ही मेरे साथी ने दिया था लेकिन वो हैंड रायटिंग मेरी थी।
कुछ साल पहले मेरे एक सहकर्मी के शिकायत करने पर मैं उसकी टीम के कर्मचारियों को लेक्चर पिला देता था कि उन्हें कैसे अच्छे से काम करना चाहिए। ज़ाहिर सी बात है इसमें मेरे सहकर्मी का तो कुछ नहीं बिगड़ता था उल्टे मेरी ही छवि खराब हो जाती थी। हमारे एक बॉस जिनकी गुड बुक में मैं था, उनसे कोई अनुमति लेने के लिये मेरी टीम के लोग मुझे ही इस्तेमाल करते थे और इसके लिये मुझे चने के झाड़ पर चढ़ाया जाता था।
जब हमें लगता है कि हमारे प्रयास से कोई काम नही होगा, या हम खुद सामने नहीं आना चाहते तो किसी और की मदद लेते हैं। यह स्वाभाविक है, लेकिन जब लोग अपने असली मंतव्य को छुपा कर हमें भ्रमित करके अपने मकसद में इस्तेमाल करते हैं तो वह उनके लिए फायदेमंद भले हो, अक्सर हमारे लिए नुकसानदेह होता है।
लोग दूसरों के काँधे से बंदूक कैसे चलाते हैं?
एक व्यक्ति आपके पास आता है। अपने प्रयोजन की पृष्ठभूमि आपके सामने तैयार करता है। वह अपने विचार को आपके दिमाग मे भरता है। आपको समझाता है कि कैसे यह करना आपके लिए अच्छा होगा। वो आपको प्रेरित करता है, आपको कुछ संभावित तरीके सुझाता है, आपकी सहायता करता है और आपके प्रयासों के लिए आपकी सराहना करके आपमे हवा भरता है। जब आप उसके सुझाये अनुसार करते है, तो वो बिल्कुल तटस्थ बना रहता है, ऐसे दिखाता है जैसे इससे उसका कुछ भी लेना देना नहीं है।
आपको कमज़ोर पड़ता देख या राह से भटकते देख वो आपको फिर प्रेरित करता है ताकि आप उसी लाइन पर ही बने रहें। सफल हो जाने पर उसका स्वार्थ सध जाता है। वह सिर्फ लाभ, यश, और अच्छे में भागीदार बनता है, हानि बदनामी और बुराई में वो सीधा कन्नी काट लेता है। उल्टा आप मे अपराध बोध भरने का प्रयास करता है कि आपने गलत किया, आपके चक्कर मे वो स्वयं फंस गया है।
आपका कांधा क्यों चुना जाता है?
आपका कांधा इसलिये चुना जाता है क्योंकि वे लोग उस प्रयास या काम के परिणामों को स्वयं नहीं झेलना चाहते, यानी उन्हें ये लगता है कि यदि कुछ ग़लत हो गया तो उसका परिणाम नहीं भोगना है, इसलिये वे आपको बलि का बकरा बनाना चाहते हैं। या उन्हें लगता है कि आपके पास उस काम को करवाने की क्षमता, पहुंच, साधन-संसाधन हैं। या वो आपको भरोसा करने वाला और बेवकूफ़ सा मानते हैं। हो सकता है वो आपको कहीं फंसाना चाहता हो। हर एक के अपने कारण हो सकते हैं। अधिकांश बार केवल भावी परिणाम से खुद को बचाने के लिये लोग आपके कांधे पर रखकर बंदूक चलाते हैं।
जेठानी देवरानी का इस्तेमाल करके सास को दस बात सुना देती है। सास अपने बेटे के माध्यम से अपनी बहू को प्रताड़ित करती है। सहकर्मी अपने बॉस के किसी खास कर्मचारी के माध्यम से किसी बात की अनुमति पाने की कोशिश करते हैं। भाई बहनों में जो पापा के करीब होता है उसके माध्यम से कोई छूट मांगी जाती है। ये छोटी मोटी बातें हैं जिनका कोई बड़ा नुक़सान नहीं होता। परंतु आपसी लड़ाई करवाने कुछ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। राजनेता मौक़ा तलाशते रहते हैं कि किसी का कांधा मिले तो अपनी राजनीतिक बंदूक चलाई जाये।
कैसे पहचानें कि कोई आपके कांधे से बंदूक चला रहा है?
- जब कोई व्यक्ति किसी काम को करने के लिये आपको प्रेरित करता है, जो वो भी कर सकता था, तो सोचिये कि इसके पीछे इसका उद्देश्य क्या है और इसका संभावित परिणाम क्या हो सकता है?
- जब कोई तभी आपसे संपर्क करे जब उसे आपसे कुछ चाहिये, अन्यथा वो आपके संपर्क में रहने या आपके जीवन में रूचि नहीं दिखाता। स्वार्थी आदमी हमेशा इस्तेमाल करना चाहता है।
- कोई व्यक्ति आपकी भावनाओं, ज़रूरतों, प्राथमिकताओं को किनारे करने के लिये आपको प्रेरित कर रहा हो और किसी दूसरी दिशा में ले जा रहा हो तो समझो वो आपका कांधा तैयार कर रहा है।
- आवश्यकता से अधिक प्रशंसा या चापलूसी करना ऐसे लोगों की रणनीति होती है, जैसे जिसे आपसे पैसे चाहिये वो आपकी उदारता की प्रशंसा करेगा कि आप कैसे सभी की मदद करते हैं।
- कोई आप पर ही पूरा दायित्व डाल रहा है, आपको दोषी या बाध्य महसूस करवा रहा है और इससे मुक्ति सिर्फ़ तभी हो सकती है जब आप उसके अनुसार काम करें तो समझिये कि वो आपका इस्तेमाल करना चाहता है।
- जब भी कोई व्यक्ति आपको बदले में कुछ भी न दे या फिर बहुत कम दे तो समझिये कि वो आप का इस्तेमाल कर रहा था। यह बदला कुछ भी हो सकता है।
- किसी से बात करने के बाद आपकी ऊर्जा बहुत कम हो जाती है, आप विवश, नाराज़ या निराश महसूस करते हैं, तो समझिये कि आपका कांधा तैयार किया जा रहा था।
- जो व्यक्ति किसी काम के पीछे के उद्देश्यों पर खुलकर बात नहीं कर रहा है, उसके भावी नकारात्मक प्रभावों को छिपाना चाहता है या बहुत हल्के में दर्शा रहा है।
- जो आपको असावधानी या लापरवाही में रखना चाह रहा है, बहुत ही साधारण बात बनाकर पेश कर रहा है, तो हो सकता है कि वो आपका इस्तेमाल करना चाहता है।
- जो हमेशा अपनी प्राथमिकताओं पर काम करे और आपको स्वयं की प्राथमिकताओं की बजाय उसकी प्राथमिकताओं की तरफ़ ले जाये तो वो आपका इस्तेमाल करना चाहता है।
कैसे बचें ऐसे लोगों से?
- जो आपके बहुत खा़स हैं, बेहद क़रीबी हैं, जो आपके लिये बहुत कुछ करते हैं, उनके लिये कुछ भी करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन सिर्फ़ एकतरफ़ा इस्तेमाल करने वालों से सतर्क रहना सीखना जरूरी है।
- जो भी कोई काम बताये उसके मक़सद, तरीक़े, लाभ हानि के बारे में अच्छे से विचार कीजिये और अगर इस बात का कोई ठोस कारण नहीं दिखता कि वो स्वयं इसे क्यों नहीं कर रहा है, आप भी मत कीजिये।
- अपनी छठी इंद्री पर भरोसा कीजिये, आपकी अंतरात्मा आपको ऐसे लोगों के प्रति चौकस करती है, आपको कहीं न कहीं अंदर से महसूस होता है कि कुछ तो गड़बड़ है।
- जो भी आपके भीतर अपराध बोध भरकर कोई खा़स काम आपसे करवाना चाहता है तो उससे सतर्क हो जाईये।
- जो भी उस काम के भावी परिणामों से स्वयं को अलग थलग रखने की कोशिश में हो, या उस काम के प्रति एकदम अनजान या अबोध बनने की कोशिश कर रहा हो, वो आपको आगे करके खुद बचना चाहता है।
- लोगों की सीमा तय कीजिये। लोगों के काम करवाने की अपनी सीमा भी पहचानिये।

आज की दौडभागवाली जिंदगी मे हरतरफ हमें ऐसे बंदूक धारीयोंका सामना करना पडता है,तांकि वह किसी और का उपयोग करके अपना मतलब निकाल सके।
ReplyDeleteबहुत सही लिखा है आपने👌👌👍