@मन्यु आत्रेय
कभी कभी लोगों को उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए। आमतौर पर हमें अपने करीबी लोगों की परवाह होती है और हम उनके लिए कुछ करने, उनकी बातें सुनने, उन्हें भावनात्मक सहारा देने, उनकी समस्या दूर करने के लिए कुछ करना चाहते हैं, लेकिन ऐसे कई मौके होते हैं जब हमें लोगों को उनके हाल पर छोड़ देना पड़ता है।
लोगों को उनके हाल पर छोड़ देना एक बहुत ही मुश्किल और संवेदनशील निर्णय है, लेकिन कुछ परिस्थितियाँ हैं जहाँ आपको लोगों को उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए।
लोगों को उनके हाल पर छोड़ दीजिए
1) यदि किसी का व्यवहार लगातार विषाक्त, अपमानजनक या आपके लिए हानिकारक है,
2) यदि कोई आपकी भावनाओं का शोषण कर रहा है, आपको दोषी महसूस करा रहा है, या आपको नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है
3) यदि कोई व्यक्ति आपकी आर्थिक, भावनात्मक या व्यावहारिक सहायता पर निर्भर है, किंतु स्वयं को सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है
4) कोई व्यक्ति यदि आपको जन्म भर के लिए आपको बैसाखी बना के चल रहा है परंतु आपकी कद्र या सम्मान नहीं करता और आपको हल्के में लेता है
5) यदि आपको पता चल जाये कि वो पीठ पीछे आपके विरुद्ध बातें, या काम, या षड्यंत्र करता है, आपकी हंसी उड़ाता है, आपके प्रति अपमानजनक बातें करता है,
6) यदि किसी व्यक्ति की आपके जीवन में मौजूदगी आपके आगे बढ़ने, मजबूत बनने, प्रगति करने में बाधा बन रही है
7) यदि कोई व्यक्ति आपके जीवन में नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, आपको नकारात्मक विचारों और आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है,
8) यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार आपको शारीरिक या भावनात्मक नुकसान पहुँचा रहा है,
9) यदि किसी व्यक्ति का वातावरण कुंठा से भरा हुआ है, और आप उस वातावरण से नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहे हैं,
10) वो आपके सामने आपकी बातों को स्वीकार करता है लेकिन पीठ पीछे उपेक्षा करता है,
11) आपके उपलब्ध होने को अपनी बपौती या अधिकार मानता है, अपना अहंकार, ज़िद, गलत दृष्टिकोण, धारणाएं नहीं छोड़ता
12) आपकी सही बातों को समझता नहीं, उल्टा प्रतिवाद करता है, अनावश्यक विवाद खड़ा करता है या आपके शब्दों को पकड़ कर विक्टिम कार्ड खेलता है और आपमे अपराध बोध पैदा कर देता है।
किसी अपने को उनके हाल पर छोड़ना एक कठिन और दुखदायक निर्णय हो सकता है। अपने निर्णय के पीछे के कारणों को समझ कर अपने आप को प्राथमिकता देकर आप अपनी सुरक्षा और सम्मान को बनाये रखते हैं तो इसमे कुछ भी गलत नहीं है।
हो सकता है आप उसके अकेले विकल्प नहीं हों और आप ज़बरदस्ती भावुक होकर सोच रहे हों। हो सकता है आपके छोड़ देने के बाद उसे आपकी कदर, कीमत और ज़रूरत समझे। हो सकता है आपका सहारा छूटने पर वो वैसा आत्म निर्भर हो पाए जैसा आप चाहते थे। कभी कभी किसी की भलाई के लिए भी उससे दूर हो जाना पड़ता है।
कब नहीं छोड़ना चाहिए?
हां कुछ ऐसी परिस्थितियां होती है। जिनमे किसी को छोड़ देना गलत हो जाता है-
1) यदि वो जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहा है
2) गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है
3) वो किसी भावनात्मक संकट में जैसे कि अवसाद, चिंता, या आत्महत्या के विचार में है
4) यदि उसे किसी गंभीर स्थिति जैसे मृत्यु, तलाक़, दुर्घटना से अवसाद आदि के कारण भावनात्मक सहारे की आवश्यकता है
5) उसका साथ देना आपका नैतिक या कानूनी कर्तव्य है
6) उसको उसके हाल पर छोड़ देना, आगे चलकर आप को अपराध बोध से इतना भर दे कि जीना हराम हो जाये।
7) खुद को सुरक्षित रखते हुए आप यदि उसकी कोई सहायता कर सकते हैं तो मानवता के नाते ज़रूर करनी चाहिए।
8) यदि उसके जीवन की ऐसी दशा में कहीं न कहीं आपकी भूमिका है तो उसका साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि हर व्यक्ति का मामला हमारे लिए अलग हो सकता है, वो हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है, उसके पास और विकल्प क्या हैं, हमारा दायित्व बोध उसके प्रति क्या है हम कितने ज़िम्मेदार हैं उसके प्रति, इन बातों को ध्यान में रखकर हमें तय करना चाहिए कि इस व्यक्ति का साथ देना है या नहीं, कब तक देना है और कब उसके हाल पर छोड़ देना है। क्योंकि दुनिया मे ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो कलेजा काट के दे देने पर भी आपको नहीं समझेंगे।
Sahi hai unko unke haal per chodna. Per apne hi hote hai jo asa karte hai.
ReplyDeleteसही कहा आपने
Deleteसही कहा है आप ने ऐंसी परिस्थितीयोंमे सामनेवाले व्यक्ति को उसके हाल पर छोड देना चाहिए।
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