आज के दिन
मुझे अंदरूनी संघर्ष से मुक्त होना है
सही गलत अच्छा बुरा इच्छा अनिच्छा
इस संघर्ष के मोर्चे हैं
मेरे लिए कुछ बातें सही होंगी
कुछ बातें मेरे हिसाब से गलत भी होंगी
पर ऐसा नहीं है कि जिसे मैं सही मानूं
वो हमेशा मेरे लिए अच्छा ही हो
जो मेरे अनुसार गलत हो वो बुरा ही हो
सही और गलत, अच्छा और बुरा
दोनों धारणाएं हैं धारणाएं बदलती रहती हैं
क्या सही है क्या गलत है ये आज नहीं कल पता चलेगा,
अच्छा और बुरा भी भविष्य में सिद्ध होंगे
मुझे सही गलत अच्छे बुरे की धारणा के
पिंजरे में खुद को कैद नही रखना है
इसके पीछे एक गहरा द्वंद्व है
देह-मन-मस्तिष्क-और आत्मा का संघर्ष है
जैसे दो सांडों की लडाई में बाग उजड़ जाता है वैसे ही देह मन मस्तिष्क आत्मा के संघर्ष से जीवन की शांति जाती रहती है,
मुझे अपनी दैहिक संवेदना, विचार प्रक्रिया, तर्क और अंदरूनी अनुभूतियों में तालमेल करना है
मुझे समझना पड़ेगा कि ये चार अलग अलग शक्तियां नहीं हैं बल्कि मेरे ही चार आयाम हैं
ये मेरे जीवन प्रासाद के चार स्तम्भ हैं
इनको व्यस्थित करना है व्यथित नहीं
मुझे इन चारों को सिखाना है कि
एक बिंदु पर आकर ये संतुलन बनाएं
इन चारों के संतुलन से ही जीवन मे तृप्ति आएगी
@मन्यु आत्रेय
परफेक्ट सर 💐💐💐💐👌🏼👌🏼👌🏼बहुत खूब विचार.
ReplyDeleteश्रेष्ठ रचना
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteश्री मान जी , मौन धारण करते हुए श्री हरि का आराधना और चिन्तन मन मे जाप करने से तथा सत्य का मार्ग में चलने से जिवन में द्वंद्व से मुक्ति प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होतीं हैं। (श्री मान जी आपका विचार परमार्थ से जोड़ता है )
ReplyDeleteश्रेष्ठ विचार सर।
ReplyDelete