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Monday, 28 December 2020

अंदरूनी संघर्ष से मुक्त होना है


नव कल्प

आज के दिन 
मुझे अंदरूनी संघर्ष से मुक्त होना है
सही गलत अच्छा बुरा इच्छा अनिच्छा
इस संघर्ष के मोर्चे हैं 
मेरे लिए कुछ बातें सही होंगी 
कुछ बातें मेरे हिसाब से गलत भी होंगी
पर ऐसा नहीं है कि जिसे मैं सही मानूं 
वो हमेशा मेरे लिए अच्छा ही हो  
जो मेरे अनुसार गलत हो वो बुरा ही हो 
सही और गलत, अच्छा और बुरा 
दोनों धारणाएं हैं धारणाएं बदलती रहती हैं 
क्या सही है क्या गलत है ये आज नहीं कल पता चलेगा,
अच्छा और बुरा भी भविष्य में सिद्ध होंगे
मुझे सही गलत अच्छे बुरे की धारणा के 
पिंजरे में खुद को कैद नही रखना है
इसके पीछे एक गहरा द्वंद्व है 
देह-मन-मस्तिष्क-और आत्मा का संघर्ष है
जैसे दो सांडों की लडाई में बाग उजड़ जाता है वैसे ही देह मन मस्तिष्क आत्मा के संघर्ष से जीवन की शांति जाती रहती है, 
मुझे अपनी दैहिक संवेदना, विचार प्रक्रिया, तर्क और अंदरूनी अनुभूतियों में तालमेल करना है
मुझे समझना पड़ेगा कि ये चार अलग अलग शक्तियां नहीं हैं बल्कि मेरे ही चार आयाम हैं 
ये मेरे जीवन प्रासाद के चार स्तम्भ हैं 
इनको व्यस्थित करना है व्यथित नहीं 
मुझे इन चारों को सिखाना है कि 
एक बिंदु पर आकर ये संतुलन बनाएं 
इन चारों के संतुलन से ही जीवन मे तृप्ति आएगी

@मन्यु आत्रेय

5 comments:

  1. परफेक्ट सर 💐💐💐💐👌🏼👌🏼👌🏼बहुत खूब विचार.

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  2. श्रेष्ठ रचना

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  3. This comment has been removed by the author.

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  4. श्री मान जी , मौन धारण करते हुए श्री हरि का आराधना और चिन्तन मन मे जाप करने से तथा सत्य का मार्ग में चलने से जिवन में द्वंद्व से मुक्ति प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होतीं हैं। (श्री मान जी आपका विचार परमार्थ से जोड़ता है )

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  5. श्रेष्ठ विचार सर।

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